आज हम पति-पत्नी में झगड़े के विज्ञान का विश्लेषण करेंगे. आपने ये पंक्ति अवश्य सुनी होगी “प्रेम गली अति सांकरी जा में दो न समाय” यानी प्रेम गली इतनी पतली है कि इसमें दो लोग नहीं समा सकते. उन्हें एक होना ही पड़ेगा. यानी प्रेम करने वालों को अपना अहम विसर्जित कर के पार्टनर के लिए समर्पित होना पड़ेगा लेकिन ये प्रेम की आदर्श स्थिति है EXCEPTION है. विज्ञान इस चीज को नहीं मानता.
क्या कहता है विज्ञान?
विज्ञान कहता है कि पति और पत्नी एक नहीं दो आइडेंटिटि हैं।. यानी ये दो जिस्म एक जान नहीं बल्कि दो जिस्म दो जान हैं. दोनों की सोच अलग है. ऐसे में दोनों की सोच कभी अपने पार्टनर से मेल खाएगी और कभी मेल नहीं खाएगी. इसलिए पति-पत्नी के बीच संबंध कभी नीम-नीम तो कभी शहद-शहद होगा और इसके कुछ ठोस वैज्ञानिक कारण हैं.
व्यवहार में होता है अंतर
एक नए रिसर्च में यह खुलासा हुआ है कि महिला और पुरुष के दिमाग में 90 प्रतिशत जीन तो एक जैसे होते हैं लेकिन अलग-अलग तरह के भी सैकड़ों जीन पाए जाते हैं. पुरुष में 610 और महिलाओं में 316 जीन अधिक सक्रिय होते हैं जो एक दूसरे से अलग होते हैं. इन्हीं वजहों से पति-पत्नी के विचार और व्यवहार में अंतर होता है.