3 करोड़ का एक टिकट! ईरान के डर से दुबई छोड़ रियाद की ओर क्‍यों दौड़े अरबपति?

बेशुमार दौलत वाले दुबई और अबू धाबी के उन आलीशान पेंटहाउस में धीरे-धीरे सन्नाटा पसर रहा है. यहां कभी दुनिया के सबसे अमीर लोग छुट्टियां बिताते थे. खाड़ी का जो आसमान कभी दुनिया के सबसे सुरक्षित ‘नो फ्लाई जोन’ जैसा लगता था, आज ईरानी मिसाइलों और सुसाइड ड्रोन की गूंज से थर्रा उठा है. जैसे ही कतर, बहरीन और दुबई के पर्यटन केंद्रों पर धमाके हुए, अरबपतियों के बीच अपनी जान बचाने की ऐसी होड़ मची कि उन्होंने एक-एक टिकट के लिए 3 लाख 50 हजार डॉलर (करीब 3 करोड़ रुपये) की बोली लगा दी. जो रईस कल तक रेगिस्तान की रेत पर लग्जरी का लुत्फ उठा रहे थे, आज वे एसयूवी (SUV) के काफिलों में छिपकर रियाद की ओर भाग रहे हैं. यह केवल एक हमला नहीं बल्कि उस सुरक्षित किले के ढहने की कहानी है जिसे दुनिया ने दशकों से अपनी तिजोरी मान रखा था.

अरब के ‘सेफ हेवन’ का अंत
ईरान के हालिया हमलों ने खाड़ी देशों की उस सुरक्षा छवि को चकनाचूर कर दिया है जो दुनिया भर के निवेशकों और पर्यटकों के लिए सबसे बड़ा आकर्षण थी. अब तक यह माना जाता था कि पश्चिम एशिया के संघर्षों से दुबई और कतर जैसे आर्थिक केंद्र सुरक्षित रहेंगे लेकिन मिसाइलों के गिरने ने इस धारणा को बदल दिया है.

1. रईसों का ‘ग्रेट एस्केप’: डेली मेल और सेमाफोर की रिपोर्टों के अनुसार, खाड़ी देशों से निकलने के लिए लोग करोड़ों रुपये पानी की तरह बहा रहे हैं. दुबई से रियाद तक की 10 घंटे की लंबी सड़क यात्रा के लिए निजी सुरक्षा फर्मों ने लग्जरी एसयूवी का बेड़ा उतार दिया है. रियाद के किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट को एक एग्जिट हब की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है, जहां से चार्टर्ड जेट्स के जरिए ग्लोबल फर्म्स के सीईओ और रईस यूरोप की ओर पलायन कर रहे हैं.

2. ऊर्जा के गढ़ ‘रास तनुरा’ पर प्रहार: इस पूरे संकट में सबसे खतरनाक मोड़ तब आया जब सोमवार सुबह सऊदी अरब के रास तनुरा स्थित ‘अरामको’ तेल रिफाइनरी को ड्रोन से निशाना बनाया गया. यह जगह सऊदी अरब के ऊर्जा तंत्र की रीढ़ मानी जाती है. विश्लेषकों का मानना है कि ईरान ने यह संदेश दिया है कि खाड़ी का कोई भी कोना उसकी जद से बाहर नहीं है. इस हमले के बाद वैश्विक तेल बाजार में भारी उथल-पुथल की आशंका है.

3. क्या होगा अगला कदम: सऊदी अरब के रक्षा मंत्रालय ने दो ड्रोन मार गिराने की पुष्टि तो की है लेकिन तनाव कम होने के संकेत नहीं हैं. यदि ईरान अपनी आक्रामकता जारी रखता है तो सऊदी अरब और अन्य खाड़ी देश अमेरिका और इजरायल के सैन्य अभियानों में सीधे तौर पर शामिल हो सकते हैं. यह स्थिति पूरे मध्य पूर्व को एक महायुद्ध की ओर धकेल सकती है.