बुरी खबरः इन लोगों को नहीं मिलेगा सरकारी योजनाओं का लाभ, राशन कार्ड होंगे रद्द

Bad News: These People Will Not Receive Benefits from Government Schemes; Ration Cards to Be Cancelled.
Bad News: These People Will Not Receive Benefits from Government Schemes; Ration Cards to Be Cancelled.

नई दिल्ली। चुनाव आयोग द्वारा वोटर लिस्ट को अपडेट करने के लिए चलाए गए ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) अभियान का असर अब सिर्फ चुनाव तक सीमित नहीं रह गया है। पश्चिम बंगाल और बिहार की सरकारों ने एक बड़ा फैसला लिया है। इन दोनों राज्यों में अब उन लोगों को सरकारी और कल्याणकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिलेगा, जिनका नाम चुनाव आयोग के इस अभियान के तहत वोटर लिस्ट से हटा दिया गया है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य सरकारी योजनाओं के वितरण में होने वाली धांधली को रोकना और अपात्र लोगों को सिस्टम से बाहर करना है।

क्या है मामला और कितने नाम कटे?
चुनाव आयोग ने बिहार (2025) और पश्चिम बंगाल (2026) विधानसभा चुनावों से पहले वोटर लिस्ट को साफ करने के लिए SIR अभियान चलाया था। इस अभियान के तहत मृतकों, दोहरी प्रविष्टि (डुप्लीकेट) या अपात्र लोगों के नाम लिस्ट से हटाए गए थे। रिपोर्ट के अनुसार, इस प्रक्रिया में बिहार में करीब 65 लाख और पश्चिम बंगाल में 91 लाख नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए।

बंगाल में हटाए गए 91 लाख में से 27 लाख से ज्यादा लोगों के नाम ‘तार्किक विसंगतियों’ की सूची में रह गए थे, जिस कारण वे 23 और 29 अप्रैल को हुए विधानसभा चुनाव में वोट नहीं डाल सके थे। अब आधार-बैंक के अधूरे लिंक, फर्जी लाभार्थियों और फंड डायवर्जन जैसी गड़बड़ियों को रोकने के लिए दोनों राज्य सरकारें इसी वेरीफाइड डेटाबेस का इस्तेमाल कर रही हैं।

पश्चिम बंगाल में क्या होगा असर?
रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली नई भाजपा सरकार ने साफ कर दिया है कि वोटर लिस्ट से हटाए गए लोगों को फिलहाल सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिलेगा। इसमें वे लोग भी शामिल हैं जिनकी अपील ट्रिब्यूनल में लंबित है।

राज्य की महिला, बाल एवं सामाजिक कल्याण मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने बताया कि 1 जून से महिलाओं के लिए ‘अन्नपूर्णा भंडार’ योजना शुरू होगी, जिसमें हर महीने 3,000 रुपये मिलेंगे। यह योजना टीएमसी की ‘लक्ष्मी भंडार’ की जगह लेगी।

अग्निमित्रा पॉल ने कहा, “हम 1 जून से पहले एनालिसिस करेंगे। जो लोग मृत हैं या जो इस देश के नागरिक नहीं हैं, उन्हें इसका लाभ नहीं मिलना चाहिए। जिनके नाम कट गए हैं, उन्हें लाभार्थियों की सूची से हटाया जाएगा।” हालांकि, अधिकारी ने यह भी बताया कि अगर बाद में किसी का नाम वोटर लिस्ट में वापस जुड़ता है, तो उसे योजना का लाभ मिलने लगेगा।

सीएम शुभेंदु अधिकारी ने भी स्पष्ट किया है कि कोई भी पुरानी योजना बंद नहीं होगी, लेकिन अब सब कुछ पारदर्शी तरीके से होगा। किसी भी मृतक, अवैध घुसपैठिए या गैर-भारतीय को नागरिकों के हक़ का फायदा नहीं उठाने दिया जाएगा।

बिहार में राशन कार्ड के साथ बैंक पासबुक भी होंगे रद्द
पश्चिम बंगाल की तरह ही, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली बिहार की एनडीए सरकार भी कड़े कदम उठा रही है। सीएम सम्राट चौधरी ने स्पष्ट किया है कि जिन लोगों के नाम बिहार की वोटर लिस्ट से काटे गए हैं, वे राशन और अन्य कल्याणकारी योजनाओं सहित किसी भी सरकारी लाभ के हकदार नहीं होंगे। उन्होंने यह भी बताया कि तय समय में ऐसे लोगों के बैंक पासबुक भी रद्द कर दिए जाएंगे।

बिहार के खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री अशोक चौधरी के मुताबिक, SIR अभियान के बाद राज्य में राशन कार्ड धारकों में से करीब पांच लाख लोगों के नाम पहले ही हटाए जा चुके हैं।

टीएमसी का आरोप: बंगाल में अल्पसंख्यक और प्रवासी बहुल इलाकों में इस अभियान पर काफी विवाद हुआ था। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी ने आरोप लगाया था कि इसका मकसद सिर्फ वोटरों को दबाना है।

कांग्रेस का एतराज: कांग्रेस नेता और राज्यसभा सांसद पी. चिदंबरम ने बंगाल और बिहार सरकार के इस कदम को ‘अपमानजनक’ (outrageous) करार दिया है। उन्होंने सवाल उठाया, “क्या वोटर लिस्ट में शामिल होना नागरिकता का आधार है, या नागरिकता वोटर लिस्ट में शामिल होने का आधार है? सुप्रीम कोर्ट को इस सवाल पर विचार करना चाहिए।”