पीएम मोदी से डोनाल्ड ट्रंप की जल्द होगी मुलाकात! अमेरिकी विदेश मंत्री के बयान से दिखे शुभ संकेत

भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड टैरिफ को लेकर मचा घमासान अब थमता हुआ दिखाई दे रहा है. भारत-अमेरिका रिश्तों में जमी बर्फ अब पिघलती हुई नजर आ रही है. अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने हाल में ही एक बयान दिया था जिसमें उन्होंने कहा था कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारत पर लगाए गए भारी टैरिफ को लेकर अब इसे फिक्स करने को तैयार हैं. रुबियो ने अपनी बात में ये भी स्पष्ट किया कि अमेरिका ने ये महंगा टैरिफ भारत पर सिर्फ इसलिए थोपा था क्योंकि भारत रूस से लगातार कच्चे तेल की खरीदी कर रहा था. हालांकि अब अमेरिका इस मद्दे के समाधान की ओर कदम बढ़ाने का इच्छुक नजर आ रहा है.

उधर, अमेरिका ने इस मामे में अब रूस पर भारी टैरिफ लगाने का विचार कर रहा है. अमेरिका ने रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर रूस के खिलाफ नई रणनीति की तैयारी करने जा रहा है. ऐसा करने के लिए ट्रंप प्रशासन को पहले भारत को लेकर नरमी दिखानी होगी. अमेरिका को भारत के साथ आर्थिक, रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने पर विचार करना होगा. वहीं भारत के विदेशमंत्री एस जयशंकर और वाणिज्यमंत्री पीयूष गोयल पहले से ही अमेरिकी दौरे पर गए हुए हैं.

पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत-अमेरिका रिश्तों में आई तल्खी
जम्मू-कश्मीर में हुए पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान पर बदले की कार्रवाई के लिए ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया. इसके बाद से ही अमेरिका और भारत के बीच संबंधों में खटास आनी शुरू हुआ. देखते ही देखते दोनों देशों के बीच कुछ ऐसी परिस्थितियां बन गईं कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के खिलाफ एक के बाद एक करके कई कड़े फैसले ले लिए. हालांकि भारत अपनी जगह पर मजबूती से खड़ा रहा. वो ट्रंप की धमकियों से बिलकुल भी प्रभावित नहीं हुआ. पहले 50 फीसदी का टैरिफ और बाद में H1B वीजा नीति को लेकर अमेरिका लगातार भारत को झुकाने की नाकाम कोशिश करता रहा. लेकिन भारत पर इन चालों का कोई असर नहीं हुआ.

भारत पर परोक्ष रूप से रूस की आर्थिक मदद का आरोप
अमेरिका लगातार रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर भारत द्वारा रूस की परोक्ष मदद करने का आरोप लगाता रहा. अमेरिका का कहना था कि अगर भारत रूस से इतनी भारी मात्रा में कच्चा तेल नहीं खरीदे तो रूस आर्थिक रूप से टूट जाएगा और युद्ध में समर्पण कर देगा. आखिरकार थक हारकर अमेरिका को बैकफुट पर आना पड़ा और अब दोनों देशों के संबंधों पर जमी बर्फ पिघलनी शुरू हो चुकी है. आने वाले समय में बहुत जल्दी ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति की मुलाकात होने के आसार दिखाई देने लगे हैं.

पिघल रही भारत-अमेरिका के रिश्तों पर जमी बर्फ
अमेरिका और भारत के तल्ख हो रहे रिश्तों के बीच हाल के दिनों में नई गर्माहट के संकेत मिले हैं. अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने सोमवार को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 80वें सत्र के मौके पर भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात की. दोनों नेताओं के बीच करीब एक घंटे तक बातचीत हुई. यह बैठक दोनों देशों के बीच खास महत्व रखती है क्योंकि हाल ही में भारत पर अमेरिकी टैरिफ और रूस से भारत के ऊर्जा आयात को लेकर दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया था. इस मुलाकात के बाद रुबियो ने कहा था, ‘भारत, अमेरिका के लिए बहुत महत्वपूर्ण सहयोगी है, खासतौर पर व्यापार, ऊर्जा, फार्मा और क्रिटिकल मिनरल्स के मामले में.’