खुद के पास परमाणु जखीरा, फिर भी ईरान को निशाना बना रहा; इजरायल की दोहरी नीति

मध्य पूर्व में जारी जंग के बीच दुनिया के परमाणु विशेषज्ञों ने इजरायल और ईरान के परमाणु कार्यक्रमों को लेकर अपनाए जा रहे दोहरे मापदंडों पर गंभीर चिंता जताई है। इजरायल का घोषित लक्ष्य ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना है। लेकिन खुद इजरायल के पास दशकों से 80 से 90 परमाणु हथियारों का एक विशाल जखीरा मौजूद है।

विशेषज्ञों का कहना है कि इजरायल ने अपनी इस क्षमता को हमेशा गोपनीय रखा और अंतरराष्ट्रीय निरीक्षणों (आईएईए) से भी बचता रहा। वहीं, ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर दशकों से अंतरराष्ट्रीय पाबंदियां लगी हैं। जबकि उसके पास फिलहाल कोई क्रियाशील परमाणु बम नहीं है।

कोई देश नहीं बोलता
यह दुनिया की राजनीति में एक ऐसा सच है जिसे सब जानते हैं लेकिन कोई बोलता नहीं। दावा किया जाता है कि इजरायल ने 1950 के दशक में इसे विकसित करना शुरू किया था और आज उसके पास 80 से 90 परमाणु हथियार हैं। हालांकि, इजरायल ने कभी भी आधिकारिक तौर पर इसे स्वीकार या खारिज नहीं किया।

दोहरे मापदंड का संकट
यह दोहरा मापदंड लंबे समय तक चल सकता है। पश्चिम देश (जैसे अमेरिका) यह मानते हैं कि कुछ देशों (जैसे इजरायल) के हाथों में परमाणु हथियार सुरक्षित हैं और दूसरों (जैसे ईरान) के हाथों में नहीं। लेकिन कैनबरा कमीशन (1996) के अनुसार, जब तक किसी एक देश के पास परमाणु हथियार रहेंगे, दूसरे देश भी उन्हें हासिल करने की कोशिश करेंगे।

ईरान के पास कोई परमाणु हथियार नहीं
जहां इजरायल के पास हथियार हैं, वहीं ईरान के पास अब तक कोई परमाणु हथियार नहीं है। 2015 के परमाणु समझौते (जेसीपीओए) के बाद ईरान पर कई पाबंदियां थीं, लेकिन 2018 में ट्रंप के इससे हटने के बाद ईरान ने यूरेनियम संवर्धन तेज कर दिया। अंतरराष्ट्रीय अधिकारियों का मानना है कि इजरायल पिछले 40 वर्षों से यह दावा कर रहा है कि ईरान बम बनाने से बस कुछ हफ्ते दूर है, लेकिन यह सच नहीं है।