नई दिल्ली| देश में जीएसटी (GST reforms) ढांचे में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। सरकार चार स्लैब (5, 12, 18 और 28%) की जगह केवल दो स्लैब 5% और 18% करने की तैयारी में है। लग्जरी और हानिकारक सामानों पर पहले की तरह अतिरिक्त सेस (1% से 290% तक) लगता रहेगा। इस बदलाव को लेकर एसबीआई रिसर्च (SBI Research) की ताज़ा रिपोर्ट कहती है कि राज्यों को इसमें बड़ा फायदा (state revenue gains) होगा।
रिपोर्ट के मुताबिक, चालू वित्त वर्ष (2025-26) में राज्यों को कुल 14.10 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का फायदा हो सकता है। इसमें 10 लाख करोड़ राज्यों के SGST से आएंगे और करीब 4.1 लाख करोड़ रुपए केंद्र से डिवोल्यूशन के जरिए मिलेंगे।
पहले हुआ था राजस्व पर असर
2018 और 2019 में जब टैक्स दरों में कटौती हुई थी, तो शुरुआत में राजस्व 3-4% तक गिर गया था। यह करीब 60,000 करोड़ रुपए का सालाना घाटा था। लेकिन कुछ ही महीनों में कलेक्शन तेजी से बढ़ने लगे और हर महीने 5-6% की ग्रोथ देखने को मिली। नतीजा यह निकला कि साल के अंत तक सरकार को लगभग 1 लाख करोड़ रुपए की अतिरिक्त कमाई हुई।
राज्यों की चिंता और राहत
कई विपक्ष शासित राज्यों का कहना है कि दरें घटने से उन्हें 1.5-2 लाख करोड़ रुपए तक का नुकसान हो सकता है। हालांकि, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की ताजा स्टडी कहती है कि टैक्स-शेयरिंग सिस्टम की वजह से राज्यों को नुकसान नहीं होगा। क्योंकि जीएसटी की कुल वसूली का 70% हिस्सा राज्यों को जाता है।
टैक्स दरों में गिरावट
जीएसटी लागू होने के समय औसत टैक्स दर 14.4% थी। सितंबर 2019 तक यह घटकर 11.6% रह गई। अब प्रस्तावित बदलाव के बाद यह 9.5% तक आ सकती है। SBI का मानना है कि इससे टैक्स सिस्टम आसान होगा, अनुपालन (compliance) बेहतर होगा और लंबे समय में कलेक्शन और मजबूत होंगे।
दिखेगा सकारात्म असर
एक्सपर्ट्स का मानना है कि जीएसटी दरों का सरलीकरण केवल लोगों के लिए राहत नहीं, बल्कि राज्यों के लिए भी फायदे का सौदा साबित हो सकता है। राजस्व का प्रवाह स्थिर रहने के साथ-साथ टैक्स बेस भी बढ़ेगा। यानी आने वाले समय में देश की अर्थव्यवस्था पर इसका सकारात्मक असर देखने को मिलेगा।