ईरान के सामने ट्रंप का सरेंडर, होर्मुज पर कंट्रोल, 300 अरब डॉलर, देंखे पूरी महाडील

Trump's surrender to Iran, control over Hormuz, $300 billion—see the full mega-deal.

तेहरान: ईरान की मेहर न्यूज एजेंसी ने ट्रंप के साथ प्रस्तावित समझौते का ड्राफ्ट टेक्स्ट छापा है। इसे देखने से ऐसा लगता है कि अमेरिका ने ईरान के आगे सरेंडर कर दिया है। ईरानी एजेंसी ने बताया है कि होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान का कंट्रोल रहेगा साथ ही ईरान को तुरंत 24 अरब डॉलर नकद और पुनर्निर्माण के लिए 300 अरब डॉलर दिए जाएंगे।

मेहर न्यूज ने बताया है कि ईरान पर लगे प्रतिबंध हटाए जाएंगे और मध्य पूर्व से अमेरिकी सेना को वापस बुलाया जाएगा। इसके अलावा ईरान को उसकी मिसाइलों और प्रॉक्सी (सहयोगी गुटों) के मामले में दोबारा परेशान न करने और लेबनान में इज़राइल को रोकने का वादा भी शामिल है।

इसके बदले में अमेरिका को NPT (परमाणु अप्रसार संधि) का सम्मान करने का एक मामूली सा वादा मिलता है। इसीलिए इस 14 प्वाइंट को देखने के बाद ऐसा लगता है कि निश्चित तौर पर अमेरिका इसे नहीं मानेगा और अगर अगर अमेरिका इसे मानता है तो इसे डोनाल्ड ट्रंप का सरेंडर माना जाएगा।

ईरान की तरफ से बताए गये 14 प्वाइंट क्या सब हैं?

सभी मोर्चों पर युद्धविराम-
लेबनान सहित सभी मोर्चों पर तुरंत और स्थायी रूप से युद्ध को पूरी तरह से रोका जाएगा।

ईरान की संप्रभुता का सम्मान-
अमेरिका वचन देगा कि वो ईरान के आंतरिक मामलों में दखल नहीं देगा और इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान की संप्रभुता का सम्मान करेगा।

नौसैनिक नाकेबंदी हटाना-
समझौते के लागू होने के 30 दिनों के भीतर ईरान पर लगी सभी प्रकार की नौसैनिक नाकेबंदी को पूरी तरह हटा लिया जाएगा।

अमेरिकी सेना की वापसी-
अमेरिका ईरान के आसपास के क्षेत्रों (मिडिल ईस्ट) से अपने सैन्य बलों को वापस बुलाने के लिए प्रतिबद्ध होगा।

स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज पर ईरानी नियंत्रण-
अगले 30 दिनों के भीतर ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ को दोबारा खोला जाएगा लेकिन इसका पूरा इंतजाम और नियंत्रण ईरान की तरफ से तय किए गये शर्तों के मुताबिक होगा।

तेल और प्रतिबंधों से राहत-
ईरान पर लगे तेल, पेट्रोकेमिकल उत्पादों और उससे जुड़े सामानों की बिक्री पर से प्रतिबंध हटाए जाएंगे। इसके साथ ही ईरान को अपनी कमाई की पूरी रकम का इस्तेमाल करने की छूट मिलेगी।

ईरान के पुननिर्माण के लिए 300 अरब डॉलर-
अमेरिका और उसके सहयोगियों को ईरान के पुनर्निर्माण के लिए कम से कम 300 बिलियन डॉलर यानि करीब 25 लाख करोड़ रुपये देने होंगे।

60 दिनों की अंतिम बातचीत अवधि-
परमाणु मुद्दों, अमेरिकी प्रतिबंधों को पूरी तरह हटाने और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के साथ साथ IAEA के प्रस्तावों को निरस्त करने के लिए 60 दिनों का एक बातचीत का समय तय किया जाएगा।

NPT पर सिर्फ वादा
– ईरान परमाणु अप्रसार संधि (NPT) के तहत अपनी इस प्रतिबद्धता को दोहराएगा कि वह परमाणु हथियार नहीं बनाएगा।

नए प्रतिबंधों और सेना पर रोक-
इन 60 दिनों की बातचीत के दौरान अमेरिका न तो क्षेत्र में कोई नई सेना तैनात करेगा और न ही ईरान पर कोई नया प्रतिबंध लगाएगा।

24 अरब डॉलर नकदी-
इस बातचीत के दौरान ईरान के फ्रीज फंड में से 24 बिलियन डॉलर जारी किए जाएंगे। इसमें से आधी रकम यानि 12 बिलियन डॉलर बातचीत शुरू होने से ठीक पहले ईरान को मिलनी जरूरी है।

निगरानी तंत्र –
इस पूरे समझौते की शर्तों को सही ढंग से लागू करने और उन पर नजर रखने के लिए एक विशेष निगरानी तंत्र की स्थापना की जाएगी।

संयुक्त राष्ट्र (UN) की मंजूरी-
इस अंतिम समझौते को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के प्रस्ताव के जरिए आधिकारिक मंजूरी दी जाएगी।

मिसाइल और प्रॉक्सी मुद्दों पर बात नहीं-
अंतिम बातचीत तभी शुरू होगी जब आधी रकम मिल जाएगी और नाकेबंदी हट जाएगी। सबसे बड़ी बात यह है कि इस अंतिम समझौते में ईरान के मिसाइल कार्यक्रम और उसके रेजिस्टेंस ग्रुप्स यानि प्रॉक्सी संगठनों को लेकर कोई बात नहीं होगी।

ईरान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता के मुताबिक इस मसौदे की ईरान में संबंधित अधिकारियों की तरफ से समीक्षा की जाएगी और अंतिम मंजूरी मिलना अभी बाकी है। ईरान ने कहा है कि अमेरिका के विरोध के बावजूद समझौते के मुख्य हिस्से तय कर लिए गए हैं। प्रेस टीवी के अनुसार दक्षिण में ईरानी ठिकानों पर अमेरिका के हमलों और कमर्शियल जहाजों जिनमें तीन भारतीय जहाज भी शामिल थे और जिनमें भारतीय नाविकों की मौत हुई थी पर जानलेवा हमलों के बाद ईरान की आर्म्ड फोर्सेज के जनरल स्टाफ ने सभी जहाजों के लिए जलडमरूमध्य को बंद करने की घोषणा की।