रिकॉर्ड हाई के बाद अचानक सोना क्यों बेच रहे भारतीय? सामने आई चौंकाने वाली हकीकत

Old Gold Jewellery Selling: साल 2026 की शुरुआत में सोने के दाम ने आसमान छू ल‍िया. लेकिन ईरान जंग शुरू होने के बाद इसके दाम में नरमी देखी जा रही है. इस बदलाव के बीच भारतीय परिवारों की तरफ से अपने पुराने सोने के गहनों की ब‍िक्री की गई. इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल से जून के बीच लोगों ने करीब 50 टन सोने की ब‍िक्री की, यह पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 43 प्रत‍िशत ज्‍यादा है. ज्यादातर लोगों के मन में यह डर है क‍ि कहीं आने वाले समय में कीमतें और ज्यादा न गिर जाएं. इस डर के कारण लोग सोना बेचकर नकदी (कैश) जुटा रहे हैं. सोने के घरेलू बाजार में दाम र‍िकॉर्ड लेवल से 52,000 रुपये (करीब 34 फीसदी) गिर चुके हैं.

बाजार से जुड़े जानकारों का मानना है कि लोगों को केवल छोटी अवधि के उतार-चढ़ाव को देखकर नहीं, बल्कि अपनी फाइनेंश‍ियल जरूरत के आधार पर सोना बेचने का फैसला लेना चाहिए. सोने की कीमत ने इस साल की शुरुआत जनवरी में नया रिकॉर्ड बनाया था, लेकिन पिछले कुछ हफ्तों में इसकी कीमत में अच्छी-खासी गिरावट आई है. बाजार के जानकारों को उम्मीद है कि आने वाले समय में कीमत में और सुधार यानी गिरावट आ सकती है. यही कारण है क‍ि कस्‍टमर कीमत के और नीचे जाने से पहले अपने पुराने गहनों पर ज्यादा से ज्यादा रिटर्न या प्रॉफ‍िट कमाना चाहते हैं.

सोने में आई तेजी के बाद प्रॉफ‍िट बुक‍िंग पर फोकस
आईएबीजेए (IBJA) के नेशनल सेक्रेटरी सुरेंद्र मेहता का कहना है कि बिक्री में आई हालिया तेजी से साफ है कि लोग सोने की रिकॉर्ड रैली के बाद प्रॉफ‍िट बुक‍िंग कर रहे हैं. कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्‍व‍िटीज की इक्‍व‍िटीज की मार्च की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय परिवारों के पास करीब 5 ट्रिलियन डॉलर का सोना है. यह उनकी गैर-जमीन जायदाद वाली संपत्‍त‍ि का 65 फीसदी हिस्सा है. घरेलू मार्केट के साथ-साथ इंटरनेशनल माके्रट में भी सोने की कीमतें भारी दबाव का सामना कर रही हैं.

ज‍ियो-पॉल‍िट‍िकल टेंशन से बढ़े क्रूड ऑयल के दाम
वेस्‍ट एशिया में बढ़ती ज‍ियो-पॉल‍िट‍िकल टेंशन ने क्रूड ऑयल की कीमत को बढ़ा दिया है, वहीं दूसरी तरफ अमेरिकी फेडरल रिजर्व की तरफ से ब्याज दर को लंबे समय तक ऊंचा रखने की आशंकाओं ने सोने की चमक को थोड़ा फीका कर दिया है. आमतौर पर जब ब्याज दरें बढ़ती हैं तो सोना कम आकर्षक हो जाता है क्योंकि इससे कोई न‍िश्‍च‍ित आमदनी या ब्याज नहीं मिलता है. ऐसे समय में निवेशक अपना पैसा ब्याज देने वाली संपत्तियों में लगाना पसंद करते हैं. इससे सोने की मांग घटती है और कीमत पर नीचे की तरफ दबाव बनता है.

गोल्ड रीसाइक्लिंग इंडस्ट्री में आया उछाल
पुराने सोने की बिक्री बढ़ने से देश के गोल्ड रीसाइक्लिंग (सोने को दोबारा इस्तेमाल के लायक बनाने वाले) इंडस्‍ट्री को बड़ा बूस्ट मिला है. लॉकर्स में सालों से बंद पड़े गैर-जरूरी गहनों को लोग जमकर बेच रहे हैं, उन्‍हें पिघलाकर नई ज्‍वैलरी बनाई जा रही है. एक रिपोर्ट के अनुसार मुथूट एक्‍ज‍िम गोल्ड प्‍वाइंट के 100 से ज्‍यादा आउटलेट पर पुराने सोने की खरीद में करीब 40 फीसदी का इजाफा देखा गया है. इससे साफ है क‍ि ग्राहक अब पुरानी ज्‍वैलरी बेचने के लि‍ए पारदर्शी और भरोसेमंद जरिया चुन रहे हैं.

दुनियाभर में सोने के सबसे बड़े आयातकों में भारत
भारत दुनियाभर में सोने के सबसे बड़े आयातक में से एक है. अपनी जरूरत पूरी करने के लि‍ए भारत को ज्यादातर सोना विदेश से आयात करना पड़ता है. वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान देश ने करीब 72.4 अरब डॉलर के सोने का आयात किया था. जानकारों का कहना है क‍ि यद‍ि देश के अंदर सोने की रीसाइक्लिंग इसी तरह बढ़ती रही, तो विदेशों से सोना मंगाने पर भारत की निर्भरता धीरे-धीरे कम हो सकती है. एक अनुमान के अनुसार भारतीय परिवारों के पास करीब 30,000 टन सोना मौजूद है. इसका जरूरत पड़ने पर सही इस्तेमाल किया जा सकता है.