बिहार में किशोरों में सिम लेने का ट्रेंड तेजी से बढ़ा है। इसकी संख्या में पांच साल में पांच गुनी वृद्धि हुई है। हाल में दूर संचार विभाग की ओर से जारी आंकड़े के अनुसार वर्ष 2021 में राज्यभर में केवल 20,466 किशोरों के नाम ही सिम था। आज सात करोड़ उपभोक्ताओं में एक करोड़ सिम नौ से 17 साल के किशोर के नाम हैं। नौ से 17 साल तक के 72 फीसदी किशोरों के हाथ में स्मार्ट फोन है। इनमें अधिकतर के पास उनके नाम से ही सिम भी हैं।
कई किशोरों के नाम एक से अधिक सिम
हाल में दूर संचार विभाग ने ऑनलाइन सर्वे किया था। इसमें राज्य के 26 लाख पांच हजार 436 ऐसे लोग शामिल किये गये थे, जिनके पास पांच से ज्यादा सिम थे। यह सिम एक व्यक्ति नहीं, बल्कि परिवार के अलग-अलग व्यक्ति के नाम हैं। इसमें पांच में तीन सिम नौ से 17 साल तक के बच्चों के नाम भी हैं। इसमें 12 लाख लोग ऐसे थे, जिनके बच्चों के नाम दो से तीन सिम है। सेर्विस देने वाली कंपनियों ने इन्हें सिम जारी करते हुए कोई खास छानबीन नहीं किया।
बच्चे मोबाइल ना ले, इसलिए बच्चे के नाम खरीदा सिम
दूर संचार विभाग के सर्वे के दौरान अभिभावकों ने बताया कि बच्चे मोबाइल लेकर गेम आदि खेलने की जिद करते है। इसके अलावा आये दिन बच्चों द्वारा शैक्षणिक चीजों के लिए मोबाइल इस्तेमाल किया जाता था। इस कारण मजबूरी में बच्चे के नाम का सिम लेना पड़ा। इससे उनकी पढ़ाई में सहूलियत होगी। लेकिन ज्यादातर बच्चे पढ़ाई से ज्यादा गेम खेलने के लिए इस्तेमाल करते हैं। इन दिनों बच्चों में एआई माध्यम से भी गेम खेलने की संख्या में बढ़ोतरी हुई है।
अधिकारी का बयान
पिछले कुछ वर्षों में बच्चे और किशोर के नाम से सिम कनेक्शन की संख्या बढ़ी है। अभी नौ से 17 साल के उम्र वालों के नाम एक करोड़ के लगभग सिम कनेक्शन है। इसकी संख्या लगातार बढ़ रही है। -दिलीप कुमार, उप महानिदेशक, दूर संचार विभाग।
कोरोना काल के बाद इसमें काफी इजाफा हुआ। स्कूलों से लेकर कॉलेज की पढ़ाई ऑनलाइन होने लगी। बच्चों को उनके अभिभावकों ने मोबाइल की सुविधा दे दी। धीरे धीरे कई इंस्टिट्यूट भी ऑनलाइन मोड में आ गए। इनकी पढ़ाई बच्चे मोबाइल, टैब या लैपटॉप से करने लगे। इसी दौरान लाखों की संख्या में सिम निकाले गए। हालांकि, समाजशास्त्री इसे सही नहीं मानते क्योंकि नादान उम्र में बच्चे इंटरनेट का गलत इस्तेमाल करके गलत राह पर जा सकते हैं।