बिहार के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि, 25 साल बाद नहाने योग्य हुआ गंगा जल, ऐसे हुआ सुखद खुलासा

पटना: बिहार के लिए एक बड़ी और सुखद खबर सामने आई है. लगभग ढाई दशकों के लंबे अंतराल के बाद प्रदेश में गंगा नदी का पानी एक बार फिर नहाने के मानक के अनुरूप पाया गया है. बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा की गई ताजा जल गुणवत्ता जांच की रिपोर्ट में यह क्रांतिकारी बदलाव देखने को मिला है.

33 स्थानों के सैंपल्स ने दी गवाही
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने गंगा नदी की स्वच्छता और जल की शुद्धता को मापने के लिए बिहार के विभिन्न 33 प्रमुख स्थलों से पानी के नमूने लिए थे. इन नमूनों की गहन जांच के बाद जो आंकड़े सामने आए हैं, वे पर्यावरण प्रेमियों और श्रद्धालुओं के लिए बेहद उत्साहजनक हैं. रिपोर्ट के अनुसार, गंगा के जल में प्रदूषण का स्तर काफी हद तक कम हुआ है.

बैक्टीरिया की संख्या में भारी गिरावट
किसी भी जल स्रोत के ‘नहाने योग्य’ होने का सबसे बड़ा पैमाना उसमें मौजूद ‘फ़िकल कोलीफॉर्म’ बैक्टीरिया की संख्या होती है.

8 महत्वपूर्ण मापदंडों पर हुई जांच
प्रदूषण बोर्ड पानी की गुणवत्ता तय करने के लिए मुख्य रूप से 8 तत्वों की जांच करता है। इनमें पानी में घुली ऑक्सीजन (Dissolved Oxygen), बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड (BOD), पीएच मान (pH value) और फ़िकल कोलीफॉर्म जैसे तत्व शामिल हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) के सक्रिय होने और ‘नमामि गंगे’ जैसी परियोजनाओं के असर से गंगा के पारिस्थितिकी तंत्र में यह सुधार संभव हो पाया है.

श्रद्धालुओं और पर्यटन के लिए शुभ संकेत
25 साल बाद गंगा जल का शुद्ध होना न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह पारिस्थितिक तंत्र के पुनर्जीवित होने का भी प्रमाण है. अब श्रद्धालु बिना किसी चर्म रोग या संक्रमण के डर के गंगा में आस्था की डुबकी लगा सकेंगे. बोर्ड का मानना है कि यदि इसी तरह स्वच्छता अभियान जारी रहा, तो आने वाले समय में गंगा का पानी अन्य श्रेणियों में भी अव्वल होगा.