पटना: जब जब किसी को लगता है कि वो बिहार की राजनीति को पूरी तरह समझ चुका है, तब तब यहां की राजनीति उसे ऐसे झटके देती है, जिसकी उसे उम्मीद नहीं होती। पहले राजद MLC सोनू राय के शपथ ग्रहण में सीएम सम्राट चौधरी पहुंचे तो तेजस्वी ने उनसे हाथ मिलाया, प्रणाम भी किया। लेकिन अब ताजा मामला ले लीजिए। राजद के एक विधायक सीएम सम्राट चौधरी से मिलने पहुंच गए।
माजरा क्या है?
राज्यसभा चुनाव के दौरान राजद के एक विधायक, जो कि पूर्वी चंपारण के ढाका से चुनाव जीते हैं, फैसल रहमान वोटिंग के दिन आए ही नहीं। बाद में उन्होंने बताया कि उनकी माता जी की तबीयत खराब थी, लिहाजा उनके इलाज के लिए वो दिल्ली में थे। लेकिन शुक्रवार को वो सीएम सम्राट चौधरी से मिलने पहुंच गए। अब बड़ी बात ये कि फैसल रहमान ने कभी नहीं कहा कि उनका अपनी पार्टी यानी राजद से कोई भी मतभेद है। लेकिन पार्टी में नमक मिर्च के लिए एक तस्वीर ही काफी थी।
राजद एमएलसी सोनू राय के शपथ ग्रहण में पहुंचे सम्राट चौधरी
इससे कुछ ही दिन पहले सीएम सम्राट चौधरी भोजपुर-बक्सर से निर्वाचित विधान पार्षद सोनू राय के शपथ ग्रहण में पहुंचे। यहां तेजस्वी यादव ने उन्हें प्रणाम किया और दोनों में थोड़ी देर बात भी हुई। इसको लेकर भी खूब चर्चा हुई। कई तरह की बातें बनीं। लेकिन सच्चाई किसी में नहीं थी।
पहले समझिए सम्राट चौधरी क्यों पहुंचे राजद MLC के शपथ ग्रहण समारोह में
इस शपथ ग्रहण समारोह में NDA अपने संसदीय कार्य मंत्री को भेज कर कोरम पूरा कर सकता था। लेकिन बजाए इसके सीएम सम्राट चौधरी ने वहां जाना चुना। इसका मकसद साफ था। विपक्षी कांग्रेस केंद्र में जिस तरह से पीएम मोदी पर वेंडेटा यानी नफरत की राजनीति का आरोप लगाती है, सम्राट चौधरी ने इस शपथ ग्रहण समारोह में पहुंचकर विपक्ष के ऐसे किसी भी प्लान पर पानी फेर दिया। कल को अगर विपक्षी नेताओं पर किसी तरह की कानूनी कार्रवाई होती है, तो सम्राट पर ये आरोप लगाना राजद के लिए मुश्किल हो जाएगा। फिर उसकी मजबूरी होगी कि वो पूरी पार्टी यानी बीजेपी को घेरे। ऐसे में धार कुंद पड़ेगी ही।
राजनीति में ऐसी मुलाकातों को लेकर संभावनाएं बनती भी हैं और बची भी रहती हैं। लेकिन अभी की इस मुलाकात को शिष्टाचार मुलाकात कहना ही बेहतर होगा। आगे क्या होगा, इस पर कुछ कहना मुश्किल है।
संजय कुमार, शिक्षाविद् एवं पॉलिटिकल एक्सपर्ट
अब समझिए राजद विधायक फैसल रहमान के सीएम सम्राट से मिलने वाला माजरा
इस बात को समझने के लिए ज्यादा माथापच्ची की जरूरत नहीं है। फैसल रहमान भले ही कुछ कहें। लेकिन ये तो सच है कि उनका मन डोल चुका है। ऐसा नहीं होता तो उन्हें सरकार की तरफ से विधानसभा समिति में राजद से चुनकर जगह दी जाती। सियासी गलियारे में चर्चा तो यही है कि फैसल रहमान ज्यादा दिनों तक राजद में टिके रहेंगे, इस पर संशय ही है। या तो पार्टी उन्हें किनारे लगा दे, या वो खुद ही निकल लें।
अब समझिए लब्बोलुआब
अब बात बिहार की राजनीति में खेला होने की, तो इसकी गुंशाइश तो राज्य में कभी खत्म नहीं होनेवाली। सियासत चीज ही ऐसी है कि बात कहीं से निकलती है और कहीं पहुंच जाती है। लेकिन हाल फिलहाल में कोई बड़ा बदलाव हो, इसकी गुंजाइश न के बराबर ही है। ऐसे में ये मान कर चलिए कि फिलहाल जो है वही रहेगा, उसमें कोई बदलाव की कोई संभावनाएं नहीं हैं।