Bihar News: नवजात शिशु के लिए मां का दूध पहला और सबसे जरूरी आहार माना जाता है. यह न सिर्फ बच्चे की पोषण संबंधी सभी जरूरतों को पूरा करता है बल्कि इसमें मौजूद एंटीबॉडी उसे विभिन्न प्रकार के संक्रमण से भी बचाते हैं. बिहार से आई एक चिंताजनक स्टडी ने बताया है कि भूजल प्रदूषण का असर अब मां के दूध तक पहुंचने लगा है. महावीर कैंसर संस्थान, पटना में अक्टूबर 2021 से जुलाई 2024 तक हुए शोध में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं.
सभी सैंपल में मिला यूरेनियम
रिसर्च टीम ने बिहार के छह जिलों—भोजपुर, समस्तीपुर, बेगूसराय, खगड़िया, कटिहार और नालंदा—की 40 महिलाओं के ब्रेस्ट मिल्क के सैंपल लिए. जांच के बाद हर सैंपल में यूरेनियम पाया गया. औसतन इसका स्तर 5 माइक्रोग्राम/लीटर दर्ज किया गया, जबकि सबसे अधिक 5.25 माइक्रोग्राम/लीटर कटिहार में मिला. यह जांच NIPER, हाजीपुर की ICP-MS मशीन से की गई .
नवजात बच्चों के खून में भी मिला यूरेनियम
शोध में यह बात भी सामने आई कि उसी दूध को पीने वाले नवजात बच्चों के ब्लड में करीब 4 माइक्रोग्राम/लीटर यूरेनियम मिला है. सभी सैंपल 25 से 40 वर्ष की महिलाओं से लिए गए थे. विशेषज्ञों के अनुसार, पीने का पानी यूरेनियम का सबसे बड़ा स्रोत हो सकता है, हालांकि भोजन के माध्यम से भी इसके शरीर में जाने की संभावना हो सकता है लेकिन यह अभी शोध का विषय है.
खतरा कम, लेकिन और शोध की जरूरत
पीने के पानी में यूरेनियम की सुरक्षित सीमा 30 माइक्रोग्राम/लीटर है, जबकि ब्रेस्ट मिल्क के लिए अभी तक कोई मानक तय नहीं किया गया है. विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान स्तर गंभीर खतरे का संकेत नहीं देता, लेकिन भविष्य में संभावित प्रभावों को समझने के लिए और गहन शोध की आवश्यकता है. महावीर कैंसर संस्थान की टीम ने बताया कि इस विषय पर आगे भी विस्तृत अध्ययन जारी रहेगा.