पटना: ‘जमी जमाई व्यवस्था’ को कड़क IAS केके पाठक ने शिक्षा विभाग में ध्वस्त कर डाला था। वैसे, नीतीश कुमार और केके पाठक के बीच एक ट्यूनिंग रही। अगर नीतीश कुमार किसी विभाग को केके पाठक के हवाले करते थे तो 6-8 महीने तक उस तरफ देखते भी नहीं थे कि वो क्या कर रहे हैं। मतलब, खुली छूट। यहां तक कि केके पाठक से पंगा लेने वाले मंत्री और कलेक्टर तक को नीतीश कुमार ने बदल डाला। केके पाठक का हालिया चर्चित असाइनमेंट बिहार का शिक्षा विभाग रहा। केके पाठक की तारीफ कम से कम वो लोग जरूर करते हैं, जिनके बच्चे सरकारी स्कूलों में पढ़ते हैं। या फिर वैसे लोग जिनको केके पाठक के रीजन में सरकारी नौकरी (करीब 2 लाख) वाला ख्वाब पूरा हुआ। बिहार में नए मंत्रिमंडल गठन के साथ ही एक बार फिर केके पाठक की एंट्री हुई है। वैसे, केके पाठक बिहार कैडर के ही IAS है, फिलहाल सेंट्रल डेप्युटेशन पर चल रहे हैं। बताया जा रहा है कि इस बार उनके साथ दिल्ली का पावर भी है।
कड़क IAS केके पाठक की बिहार में एंट्री
दरअसल, केके पाठक की पोस्टिंग फिलहाल भारत सरकार के कैबिनेट सचिवालय के विशेष सचिव के तौर पर है। बिहार में नई सरकार बनने के बाद वो न्यू असाइनमेंट के साथ एक बार फिर ऐक्टिव हैं। पटना में मुख्य सचिव समेत टॉप ब्यूरोक्रेट्स की शुक्रवार को बड़ी बैठक हुई। केके पाठक ने कहा है कि राज्य के सभी विभागों से अनावश्यक नियमों को समाप्त करें। उन्होंने विभागों को निर्देश दिया कि ऐसे नियमों और रजिस्टरों की सूची तैयार करें। उन्होंने कहा कि प्रत्येक अनावश्यक नियम निवेश के मार्ग में बाधा है।
केके पाठक और मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की संयुक्त अध्यक्षता में ये मीटिंग मुख्य सचिवालय स्थित सभाकक्ष में हुई बैठक में राज्य में निवेश को बढ़ावा देने, व्यापार सुगमता में सुधार और पुराने पड़ चुके कानूनों को समाप्त करने के लिए ‘वि-विनियमन 1.0 एवं 2.0’ की विस्तृत समीक्षा हुई। बैठक में विशेष सचिव केके पाठक ने ये भी निर्देश दिया कि राज्य के सभी विभाग अपने कार्यक्षेत्र से अनावश्यक अनुपालन बोझ को कम करें। व्यावसायिक कानूनों के तहत छोटी तकनीकी चूकों के लिए कारावास जैसे कठोर प्रावधानों को हटाकर उन्हें अर्थदंड में परिवर्तित करने की प्रक्रिया में तेजी लाएं। अगर कोई सुधार एक से अधिक विभागों से संबंधित है, तो कैबिनेट सचिवालय विभाग समन्वय की भूमिका निभाए।
निवेश को बढ़ावा देने वाले मिशन पर केके पाठक
विशेष सचिव केके पाठक ने निर्देश दिया है कि ‘डीरेगुलेशन फेज-2’ के तहत लंबित सभी कार्यों को अगले 15 दिनों के भीतर पूरा कर पोर्टल पर अपडेट किया जाए।
व्यावसायिक कानूनों में बदलाव कर छोटी तकनीकी गलतियों के लिए जेल के प्रावधान को समाप्त किया जाएगा और इसकी जगह केवल पेनालिटी का नियम लागू होगा।
निवेश में बाधा बनने वाले पुराने नियमों, रिटर्न और रजिस्टरों की पहचान कर उन्हें खत्म करने की प्रक्रिया शुरू होगी, ताकि ‘कम्पलायनस बर्डन’ कम हो सके।
राज्य के बिल्डिंग बाय-लॉज में ‘राष्ट्रीय भवन संहिता 2026’ के मानकों को जोड़ा जाएगा। साथ ही, फ्लोर एरिया रेशियो (FAR) के नियमों को तर्कसंगत बनाया जाए।
मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने सभी विभागों को ‘मिशन मोड’ में काम करने और मानवीय हस्तक्षेप कम करने के लिए ‘सिंगल विंडो सिस्टम’ और ‘स्व-प्रमाणीकरण’ को अनिवार्य रूप से लागू करने का निर्देश दिया।
बिहार कैडर के आईएएस केके पाठक कौन हैं?
केके पाठक (केशव कुमार पाठक) 1990 बैच के आईएएस अधिकारी हैं।
तत्कालीन सीएम नीतीश कुमार के सबसे भरोसेमंद अधिकारियों में गिने जाते हैं।
अपनी बेहद सख्त कार्यशैली और अनुशासन के लिए जाने जाते हैं।
भ्रष्टाचार और लापरवाही के खिलाफ हमेशा कड़ा रुख अपनाया।
शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव के रूप में बेहतरीन काम किया।
उनके कार्यकाल में लगभग 2 लाख शिक्षकों की रिकॉर्ड बहाली हुई।
केके पाठक ने अपने करियर में लालू, राबड़ी, नीतीश के साथ काम किया।
बिहार के चौथे सीएम सम्राट चौधरी के तौर पर केके पाठक के सामने।
बिहार के ब्यूरोक्रेस में चाहिए न्यू एक्सपेरिमेंट
बिहार की ब्यूरोक्रेसी को नया प्रयोग चाहिए। नहीं तो इनका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। मगर, केके पाठक का खौफ ब्यूरोक्रेसी में भी रहता है। वो कोई भी काम फुल ऑथोरिटी से करते हैं। मौजूदा सम्राट सरकार के सामने बिहार के समग्र विकास और बेहतर कानून-व्यवस्था की एक बड़ी चुनौती है। ऐसे में सख्त और रिजल्ट ओरिएंटेड अधिकारियों की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है। ऐसी बात नहीं कि ईमानदार और कड़क अफसरों की बिहार में कमी है, मगर सेटिंगबाजों के आगे वो टिकते नहीं है। जब तक, ऊपर से गारंटी नहीं मिलती तो कोई लफड़ा भी नहीं चाहता। मगर, इन सबसे अलग केके पाठक हैं। जहां भी रहे, जितने दिन के लिए रहे, अहसास कराते रहते हैं।
अभी हालिया उदारहण सीके अनिल हैं। भू-राजस्व विभाग के सचिव के तौर पर वो बेहतरीन काम कर रहे थे। घूसखोर अफसरों को परेशानी हो रही थी। मगर, उनके साथ ‘गारंटी’ वाली बात नहीं थी। लिहाजा, सरकार बदलते ही अपने पुराने विभाग में भेज दिए गए। बिहार की ब्यूरोक्रेसी में आईएएस अधिकारी सीके अनिल (चंद्रकांत अनिल) को सुलझा हुआ माना जाता है। अगर, ऊपर से गारंटी मिले से इस तरह के अफसर नई सरकार के लिए कारगार साब