नीतीश के बिना भी सरकार बनाने की स्थिति में बीजेपी, क्या इतना बड़ा रिस्क लेंगे PM मोदी-अमित शाह?

Bihar Chunav Result 2025: बिहार विधानसभा चुनाव, 2025 में बीजेपी और एनडीए की आई आंधी में विपक्ष के डब्बे गोल हो गए हैं. भाजपा को अकेले इतनी सीटें हासिल हो गई हैं कि वह बिना जेडीयू के चिराग पासवान, उपेंद्र कुशवाहा और जीतनराम मांझी के साथ मिलकर सरकार बना सकती है, लेकिन सवाल यह है कि क्या पीएम मोदी और अमित शाह इतना बड़ा रिस्क बिहार में ले सकते हैं और क्या नीतीश कुमार को दूसरा एकनाथ शिंदे बना सकते हैं. अगर ऐसा होता है तो यह राजनीति की कड़वी सच्चाई होगी. हालांकि ऐसा करना इतना आसान नहीं होगा. लोकसभा चुनाव, 2024 में जेडीयू को 12 सांसदों के रूप में ऐसी चाभी मिली है कि भाजपा कुछ भी करके बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को इग्नोर करने का जोखिम नहीं ले सकती.

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विधानसभा चुनाव में भाजपा को अभी 95 सीटों पर बढ़त हासिल होती दिख रही है. लोजपा 19 सीटों पर आगे चल रही है. हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा 5 तो राष्ट्रीय लोक मोर्चा 4 सीटों पर आगे चल रही है. इन सभी को जोड़ दें तो बीजेपी, लोजपा, रालोमो और हम को बहुमत मिलता दिख रहा है. अगर बीजेपी सरकार बनाना चाहे तो वह बिना नीतीश कुमार के समर्थन के अपनी सरकार बना सकती है. हालांकि यह इतना आसान नहीं है.

दरअसल, विधानसभा चुनाव में सीट शेयरिंग के दौरान देखा गया था कि जेडीयू यानी जनता दल यूनाइटेड केवल भाजपा से बातचीत कर रही थी और भाजपा बाकी सहयोगी दलों जैसे लोक जनशक्ति पार्टी रामविलास, उपेंद्र कुशवाहा के राष्ट्रीय लोक मोर्चा और जीतनराम मांझी के हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा के साथ डील कर रही थी. जेडीयू का कहना था कि यह सभी सहयोगी दल चूंकि भाजपा लेकर एनडीए में आई है तो उनसे डील भी वही करे. इस तरह बिहार एनडीए में शामिल ये दल जेडीयू की तुलना में भाजपा के ज्यादा करीब हैं.

दरअसल, लोकसभा चुनाव, 2024 में नीतीश कुमार के हाथ 12 सांसदों की ऐसी चाभी हाथ लगी है, जिसे वो जब चाहें तब भुना सकते हैं. अगर भाजपा बिहार में बिना नीतीश कुमार के अपनी सरकार बनाना चाहे तो केंद्र में मोदी सरकार को खतरा हो सकता है, क्योंकि नीतीश कुमार 12 सांसदों का समर्थन वापस ले सकते हैं. हालांकि इससे सरकार को गिरने का खतरा नहीं होगा, लेकिन उसके बाद चंद्रबाबू नायडू की मोलभाव करने की क्षमता बढ़ती चली जाएगी, जिससे मोदी सरकार को परेशान होना पड़ सकता है. इसलिए भाजपा बिहार में अपनी सरकार बनाने की सोच भी नहीं सकती.

यही एक कारण नहीं है अपनी सरकार न बनाने का. दरअसल, नीतीश कुमार अब उम्र के उस पड़ाव पर पहुंच चुके हैं कि राजनीतिक रूप से अगले चुनाव तक वह शायद ही सक्रिय रह पाएं. अगर वह राजनीति से दूर होते हैं तो उनकी राजनीतिक विरासत पर भाजपा अपनी स्वाभाविक दावेदारी पेश कर सकती है. इसका अर्थ यह नहीं है कि भाजपा, जेडीयू पर कब्जा कर सकती है, बल्कि इसका अर्थ यह है कि नीतीश कुमार जिस वोटबैंक के सहारे अभी तक बिहार की सत्ता को संभालते आ रहे हैं, उसके उत्तराधिकार पर भाजपा दावा कर सकती है.