लखनऊ: लखनऊ में रहने वाले 73 वर्षीय अचल नारायण शुक्ला पिछले दो साल से लगातार एक गंभीर परेशानी का सामना कर रहे हैं। उनकी कार, जिसका नंबर UP 32 KW 1632 है, घर से बाहर न निकलने के बावजूद उसके फास्टैग से टोल कट रहा है। यह मामला पहली बार नहीं, बल्कि पिछले दो साल में पांचवीं बार सामने आया है, जिससे बुजुर्ग व्यक्ति बेहद परेशान और मानसिक तनाव में हैं।
आईआईएम रोड स्थित एल्डिको सिटी में रहने वाले शुक्ला बताते हैं कि उन्होंने इस समस्या के समाधान के लिए कई बार पुलिस से लेकर NHAI और बैंक अधिकारियों तक शिकायत की, लेकिन हर विभाग ने सिर्फ औपचारिकता निभाई। पुलिस शिकायत लेने से कतराती है, जबकि बैंक और एनएचएआइ के अधिकारी सिर्फ आश्वासन देकर भर देते हैं, परंतु समस्या वहीं की वहीं बनी हुई है। उनका कहना है कि शिकायतें टोल फ्री नंबरों पर दर्ज तो कर ली जाती हैं, लेकिन न पैसे वापस होते हैं और न ही भविष्य में गलत कटौती रोकने के लिए कोई ठोस कदम उठाया जाता है।
सबसे ताज़ा घटना 13 नवंबर 2025 को हुई, जब यूपी के फतेहगढ़ स्थित एलपेन मेन प्लाजा 21 पर उनके फास्टैग से 465 रुपये कट गए। शुक्ला बताते हैं कि पैसा कटने का मैसेज तुरंत आता है, और फास्टैग में बैलेंस कम होने पर दोबारा कटौती नहीं हो पाती, लेकिन गलत लेनदेन लगातार जारी है।
उन्होंने पहले पेटीएम का फास्टैग इस्तेमाल किया था, तब भी इसी तरह की कटौती हुई थी। इसके बाद उन्होंने बैंक ऑफ बड़ौदा का फास्टैग लिया, लेकिन समस्या फिर भी नहीं रुकी। 21 मार्च 2024 को नवाबगंज टोल प्लाजा पर 90 रुपये कटे, इसके बाद 13 अप्रैल 2024 को उसी टोल प्लाजा पर दोबारा 90 रुपये कट गए। फिर 30 अगस्त 2025 को बहराइच के गुलाल पुरवा टोल पर 55 रुपये कटे।
बार-बार हो रही गड़बड़ियों के बाद उन्होंने बैंक ऑफ बड़ौदा में फिर से शिकायत दर्ज कराई। बैंक अधिकारियों ने उन्हें नया फास्टैग जारी करने की सलाह दी। वहीं शुक्ला बताते हैं कि उन्होंने NHAI से संबंधित कंपनी के टोल फ्री नंबर 18001034568 और NHAI के नंबर 1033 पर भी शिकायतें करवाईं, लेकिन हर बार की तरह इस बार भी सिर्फ शिकायत नंबर सीएमपी000000000312873 देकर मामला खत्म कर दिया गया।
एनएचएआइ के परियोजना निदेशक कर्नल शरद चंद्र सिंह का कहना है कि जिस बैंक के खाते से टोल राशि कटी है, उसी बैंक से संपर्क किया जाए। एनएचएआइ इस मामले में कोई जानकारी उपलब्ध नहीं करा सकता।
लगातार हो रही कटौती और समाधान के अभाव में अचल नारायण शुक्ला अब साइबर अटैक की आशंका भी जता रहे हैं। उनका कहना है कि जिम्मेदार विभाग या तो तकनीकी गड़बड़ी का पता नहीं लगा पा रहे, या फिर इस मामले को गंभीरता से नहीं ले रहे।