बिहार में ‘गायब’ हो रहा बचपन, हर साल लापता 4000 बच्चों का सुराग नहीं, क्या मानव तस्करी के जाल में फंस रहे मासूम?

पटना: बिहार में बच्चों के गायब होने की अफवाह को लेकर पुलिस जागरूकता अभियान चलाती है। लोगों को अफवाह पर ध्यान नहीं देने की बात करती है। लेकिन आंकड़े काफी भयावह हैं। बिहार से बच्चे गायब हो रहे हैं। साथ ही उनकी बरामदगी भी नहीं हो रही है। बिहार में हर साल तीन से चार हजार बच्चे लापता हो रहे हैं। बीते कुछ वर्षों के दौरान सालाना औसतन 12 से 14 हजार गुमशुदगी के मामले दर्ज हुए, जिनमें बमुश्किल दो तिहाई बच्चे ही बरामद हो सके हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक सिर्फ 2025 में राज्यभर में बच्चों की गुमशुदगी के दर्ज हुए 14699 मामलों में उस साल 6927 बच्चों की बरामदगी संभव नहीं हो सकी थी।

क्या है पुलिस को आशंका?
इस मामले को लेकर पुलिस काफी परेशान हैं। पुलिस को आशंका है कि गायब हो रहे बच्चों को मानव तस्करी का रैकेट उठा कर ले जा रहा है। उसके बाद उनसे जबरन भिक्षावृति, बाल श्रम, वेश्यावृति आदि अनैतिक कार्यों में धकेला जा रहा है। जानकारी के मुताबिक 2013 के बाद चार गुणा गुमशुदगी का मामला बढ़ गया है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक बिहार पुलिस ने गुमशुदगी के मामलों में 24 घंटे के अंदर बरामदगी नहीं होने पर अपहरण की प्राथमिकी दर्ज कराना अनिवार्य कर दिया है। 2013 में यह प्रावधान लागू होने के बाद गुमशुदगी के आंकड़े चार गुणा तक बढ़ गए हैं। पुलिस मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक 2013 से पहले गुमशुदगी के सालाना औसतन तीन हजार मामले दर्ज होते थे, जो अब बढ़ कर 14 हजार तक हो गए हैं। इसी तरह गुमशुदा हो रहे जाने वाले बच्चों की संख्या भी बढ़ी है।

क्यों नहीं होती कार्रवाई?
हालांकि, इन घटनाओं पर प्रभावी कार्रवाई को लेकर बिहार पुलिस मुख्यालय ने पुलिस अधीक्षकों को एसओपी (मानक संचालन प्रक्रिया) जारी की। जिलों में एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट बनाई गई। रेलवे स्टेशनों और एयरपोर्ट पर भी एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट तैनात की गई है। तीन महीने तक बच्चा बरामद नहीं होने पर संबंधित केस जिले की एंट्री ट्रैफिकिंग यूनिट (एटीयू) को सौंप दिया जाता है। आंकड़ों पर गौर करें, तो सबसे ज्यादा मानव तस्करी बिहार में हो रहा है। राष्ट्रीय क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो का ताजा आंकड़ा कह रहा है कि 2023 में भी तेलंगाना, महाराष्ट्र और ओडिशा के बाद बिहार में सबसे ज्यादा मानव तस्करी के मामले दर्ज हुए। नाबालिग लड़कों की तस्करी में तस्करी में ओडिशा के बाद बिहार का राजस्थान और नाबालिग लड़कियों की नंबर रहा।

पुलिस का एक्शन क्या है?
मानव तस्करी से निपटने के लिए बिहार पुलिस ने राज्य के सभी पुलिस और रेलवे जिलों में 44 मानव तस्करी विरोधी इकाईयां (AHTU) स्थापित की हैं। इसके अतिरिक्त, प्रत्येक जिले में एसजेपीयू स्थापित किया गया है। विशेष किशोर पुलिस इकाई और पुलिस थानों में कल्याण पुलिस अधिकारियों की नियुक्ति की गई है। बिहार के 1196 पुलिस थानों को राष्ट्रीय स्तर पर संचालित मिशन वात्सल्य’ नामक ऑनलाइन पोर्टल से जोड़ा गया है, जहां लापता बच्चों के लिए एम-फॉर्म (लापता फॉर्म) और बरामद बच्चों के लिए आर फॉर्म (पुनर्प्राप्ति फॉर्म) का उपयोग करके डेटा अपलोड किया जाता है। इसके अलावा यूनिट पटना, गया और दरभंगा जैसे प्रमुख हवाई अड्डों पर कार्यरत हैं। और जल्द ही पूर्णिया हवाई अड्डे पर भी एक इकाई स्थापित करने की योजना है।