सीतामढ़ी. कभी जिन नक्सलियों के खिलाफ हथियार उठाकर क्षेत्र को आतंक से मुक्त कराने वाले नितेश सिंह उर्फ महाराज जी अब राजनीतिक मैदान में अपनी नई पारी शुरू कर रहे हैं. उनकी पत्नी अर्पणा सिंह को जन सुराज पार्टी ने बेलसंड विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया है. ‘आजाद हिंद फौज’ के संस्थापक के रूप में पहचान बनाने वाले महाराज जी पिछले कुछ महीनों से राजनीति में सक्रिय थे, और क्षेत्र में लगातार जनसंपर्क कर रहे थे. इसी दौरान जिला प्रशासन ने उन पर CCA (जिला बदर की कार्रवाई) लागू कर दी थी, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने पीछे हटने के बजाय अपनी पत्नी को चुनावी मैदान में उतार दिया है.
कभी नक्सलियों का गढ़ रहा बेलसंड और तरियानी क्षेत्र आज शांत है, और इसका बड़ा श्रेय ग्रामीण नितेश सिंह को देते हैं. वे बताते हैं कि नितेश सिंह ने नक्सलवाद के खिलाफ खुला मोर्चा खोला था, जब पुलिस तक वहां जाने से डरती थी. स्थानीय ग्रामीण लाल सिंह कहते हैं, “महाराज जी ने पुलिस के साथ मिलकर कई बार माओवादियों का सामना किया. अगर उन्होंने हिम्मत नहीं दिखाई होती, तो शायद आज भी हम डर के साए में जी रहे होते.” कभी माओवादियों के गढ़ रहे इन इलाकों में हत्या, लूट और रंगदारी की घटनाएं आम बात थीं. लेकिन नितेश सिंह के प्रयासों और संघर्ष से यह इलाका आज मुख्यधारा से जुड़ चुका है.
माओवादी से मिला छुटकारा
स्थानीय दुकानदार राहुल कुमार और रूपलाल बताते हैं कि पहले माओवादी धमकी देते थे कि शाम 5 बजे के बाद कोई दुकान नहीं खुलेगी. लोग हफ्तों तक बाजार नहीं खोलते थे. “आज वही बाजार चहल-पहल से भरा है. यह सब महाराज जी की देन है,” राहुल कहते हैं. उनके मुताबिक, जब पूरा क्षेत्र दहशत में था, तब नितेश सिंह ने मोर्चा संभाला. कई बार जेल गए, लेकिन डटे रहे. ग्रामीण मुकेश कुमार बताते हैं कि जहां कभी माओवादियों का कैंप हुआ करता था, अब वहां स्कूल चल रहा है और जहां तरियानी रेफरल अस्पताल बन रहा है, वो कभी नक्सलियों का सेंटर था.
राजनीति में बदलाव, नक्सलियों के लिए काल
अब राजनीति में नई जंग की तैयारी है. जन सुराज से अर्पणा सिंह को टिकट मिलने के बाद बेलसंड की राजनीति में नया समीकरण बन गया है. कहा जा रहा है कि नितेश सिंह की जमीनी पकड़ और जनसंपर्क नेटवर्क इस चुनाव में निर्णायक भूमिका निभाएगा. क्षेत्र के लोग अब उम्मीद कर रहे हैं कि जैसे उन्होंने नक्सलवाद से बेलसंड को मुक्त कराया, वैसे ही अब विकास की नई कहानी भी यहीं से शुरू होगी. ग्रामीणों के शब्दों में- “महाराज जी पहले नक्सलियों के लिए काल थे, अब राजनीति में बदलाव की लहर बन सकते हैं.”