पटना: बिहार विधानसभा चुनाव में इस बार राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) और विपक्षी महागठबंधन के बीच कांटे की टक्कर दिख रही है. एक आंतरिक सर्वे में खुलासा हुआ है कि दोनों गुटे के बीच वोट शेयर में महज एक प्रतिशत का फासला हो सकता है. यह सर्वे सत्ताधारी एनडीए गठबंधन ने ही करवाया है, जिसे देखकर पार्टी नेताओं की धड़कन बढ़ गई है.
‘हिंदुस्तान टाइम्स’ की रिपोर्ट के मुताबिक, एनडीए के इस आतंरिक सर्वे में उसे मामूली बढ़त मिलती दिख रही है. सर्वे के मुताबिक, उसे इस बार राज्य की 243 सदस्यीय विधानसभा में 130 सीटें मिल सकती हैं. सर्वेक्षण में शामिल 65% लोगों ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व पर भरोसा जताया है, जबकि चुनावी रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी को लगभग 9% वोट शेयर मिलने की संभावना दिखाई गई है.
कांग्रेस के सर्वे में भी झटका
इस तरह की एक शुरुआती जमीनी सर्वे कांग्रेस ने भी कराया था, जिसमें पता चला कि सीएम नीतीश के खिलाफ इस बार वैसे सत्ता विरोधी लहर नहीं दिख रही है. विपक्ष ने 74 वर्षीय मुख्यमंत्री पर भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और स्वास्थ्य को लेकर हमले तेज कर दिए हैं. आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने नीतीश कुमार की स्वास्थ्य स्थिति को लेकर भी सवाल उठाए हैं. वहीं, प्रशांत किशोर लगातार राज्य सरकार के मंत्रियों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगा रहे हैं. बावजूद इसके, सर्वे में केवल 31 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने माना कि नीतीश कुमार का कार्यकाल निराशाजनक रहा है.
सर्वे में विपक्षी महागठबंधन को 102 से 107 सीटें, जबकि अन्य दलों (जन सुराज सहित) को दो से तीन सीटें मिलने की संभावना जताई गई है. यह स्थिति 2020 जैसी हो सकती है, जब चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी ने केवल एक सीट जीती थी, लेकिन कई सीटों पर जेडीयू उम्मीदवारों को नुकसान पहुंचाया था.
हालांकि, यहां यह भी ध्यान देने वाली बात है कि ऐसे आंतरिक सर्वे में आम तौर पर उसी दल को फायदा दिखाया जाता है, जिसने उन्हें कराया हो. इसके अलावा, बिहार जैसे विविधता भरे जातीय और सामाजिक ढांचे वाले राज्य में कई बार ऐसे सर्वे असल नतीजों से भटक चुके हैं. इसलिए इन्हें केवल राजनीतिक रुझान और माहौल का संकेतक माना जा सकता है, न कि अंतिम भविष्यवाणी.
सर्वे देखकर जदयू बम-बम
हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, जेडीयू के विधान परिषद सदस्य नीरज कुमार ने कहा कि लोग देख रहे हैं कि नीतीश कुमार के नेतृत्व में गांव-गांव तक विकास हुआ है. उन्होंने कहा, ‘तेजस्वी यादव हर परिवार को सरकारी नौकरी देने का वादा कर रहे हैं, जो न तो व्यावहारिक है, न संभव. वहीं, हमारी सरकार जीविका दीदी योजना के तहत हर महिला को 10,000 रुपये दे रही है. हमने महिलाओं को लगातार सशक्त किया है.’
कांग्रेस के टिकट के दावेदार और पूर्व चुनाव रणनीतिकार शशांक शेखर ने कहा कि एनडीए फिलहाल आगे है, लेकिन प्रशांत किशोर की लोकप्रियता 6-7 प्रतिशत तक सीमित रहेगी. उन्होंने आरोप लगाया कि किशोर रणनीतिक रूप से ऐसे उम्मीदवार उतारेंगे जो महागठबंधन के वोट काटेंगे, लेकिन जनता ‘उनकी चाल’ को समझ चुकी है.
बता दें कि 2020 के विधानसभा चुनाव में एनडीए ने 125 सीटें, जबकि विपक्षी महागठबंधन ने 110 सीटें जीती थीं. उस समय दोनों गठबंधनों के वोट शेयर में मात्र 0.03 प्रतिशत का अंतर था. इस बार भी मुकाबला उतना ही रोमांचक होने की संभावना है.