बिहार चुनाव में मिली करारी हार के बाद से महागठबंधन के सहयोगी आरजेडी और कांग्रेस के बीच ब्लेम गेम शुरू हो गया है। हाल ही में दिल्ली में कांग्रेस आलाकमान की बैठक बुलाई गई। जिसमें पार्टी नेताओं का एक वर्ग राजद के साथ गठबंधन की बजाय अकेले चुनाव लड़ने के पक्ष में है। कांग्रेस के विधायक दल के नेता शकील अहमद खान ने कहा कि हमारे ज़्यादातर उम्मीदवारों ने यही भावना व्यक्त की है कि अगर हमने राजद के साथ गठबंधन नहीं किया होता तो हम बेहतर प्रदर्शन कर सकते थे। भविष्य की रणनीति क्या होनी चाहिए, यह पार्टी आलाकमान को तय करना है।
आपको बता दें कांग्रेस 61 सीटें लड़कर सिर्फ 6 सीटें जीतने में सफल हो पाई थी। कदवा विधानसभा सीट से खुद शकील अहमद को हार का सामना करना पड़ा। जेडीयू के दुलाल चंद्र गोस्वामी ने उन्हें 18 हजार वोटों से हराया है। जहां से कांग्रेसी हैट्रिक की उम्मीद लगाए बैठे थे। वहीं 2024 में हुए लोकसभा चुनाव में कटिहार से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता तारिक अनवर की भी हार हुई थी।
कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक कई नेताओं का मानना है कि सत्तारूढ़ एनडीए का ‘जंगल राज’ का नेरेटिव , जो कथित तौर पर आरजेडी के बिहार शासन के दौरान व्याप्त अराजकता को उजागर करने की कोशिश थी, उसका गठबंधन सहयोगियों पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। इसके अलावा 1990 में मंडल मंथन से लालू यादव की पार्टी आरजेडी का उदय माना जाता है। जिससे ऊंची जातियां नाराज हो गई हैं। जो पहले कांग्रेस के समर्थक माने जाते थे, वो अब भाजपा की ओर चले गए हैं। राजद को पिछले चुनाव में मिली 75 सीटों के मुकाबले इस बार सिर्फ 25 सीटें मिलीं हैं।
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वहीं इन सबके बीच राजद के प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल ने भी कांग्रेस को उसकी हैसियत बताने की कोशिश की है। उन्होने कहा कि अगर कांग्रेस अकेले चुनाव लड़ना चाहती है, तो उसे हर हाल में ऐसा करना चाहिए। उसे अपनी औकात का एहसास हो जाएगा। उन्होंने कहा, “कांग्रेस को जो भी वोट मिले हैं, वो राजद की बदौलत हैं। राज्य में यह एक ख़त्म हो चुकी ताकत है। हम चुनाव दर चुनाव उनकी बेतुकी मांगों को झेलते आ रहे हैं। 2020 में, उन्होंने 70 सीटों पर चुनाव लड़ने की ज़िद की और सिर्फ़ 19 सीटें ही जीत पाए। हाल के चुनावों में उनका स्ट्राइक रेट बहुत खराब रहा है। फिर भी, अगर उन्हें लगता है कि अकेले ही काम चलाना उनके लिए बेहतर है, तो उन्हें हर हाल में ऐसा करना चाहिए।
आपको बता दें चुनावों में गठबंधन सहयोगियों के बीच सीटों का बंटवारा भी ठीक से नहीं हो पाया। एक दर्जन से ज्यादा सीटों पर राजद, कांग्रेस और वाम दलों के बीच फ्रेंडली फाइट हुई। विपक्षी खेमे में असमंजस का भरपूर फायदा उठाने वाला भाजपा नेतृत्व वाला गठबंधन (एनडीए) इस नए विवाद का भरपूर मजा ले रहा है।
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सैयद शाहनवाज हुसैन ने कहा, कि कांग्रेस और राजद चुनाव के दौरान लड़ रहे थे और अब भी लड़ रहे हैं। ऐसा होना ही था क्योंकि उनके गठबंधन का न तो कोई वैचारिक आधार है और न ही जनता के मुद्दों के प्रति कोई साझा प्रतिबद्धता। यह दरार और बढ़ने वाली है
हालांकि इस तकरार के बीच गठबंधन के सहयोगी सोमवार से शुरू हो रहे 18वीं विधानसभा के उद्घाटन सत्र से पहले एकता का दिखावा करने पर सहमत हो गए हैं। शनिवार को महागठबंधन की एक बैठक बुलाई गई, जिसमें सभी गठबंधन सहयोगियों के विधायकों ने सर्वसम्मति से राजद के तेजस्वी यादव को अपना नेता नामित किया। बैठक में कांग्रेस का प्रतिनिधित्व एमएलसी और राज्य इकाई के कार्यकारी अध्यक्ष समीर कुमार सिंह और उसके दो विधायकों ने किया। कांग्रेस सूत्रों के अनुसार शेष चार विधायक दिल्ली में थे, जबकि बैठक पटना में हुई।