मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के शपथ ग्रहण से दूरी, निशांत कुमार की गैरहाजिरी से उठे सवाल

सम्राट चौधरी के पॉलिटिकल मेगा इवेंट से निशांत कुमार क्यों गायब हुए? निशांत कुमार के शपथ ग्रहण से दूरी बनाने की क्या कहानी है? बिहार में जनता दल यूनाइटेड से मुख्यमंत्री की कुर्सी बुधवार को बीजेपी को हस्तांतरित कर दी गई और लोक भवन में इस राजनीतिक मेगा इवेंट से निशांत कुमार की दूरी ने एक नए विवाद को जन्म दे दिया. बिहार में पिछले एक महीने से सत्ता हस्तांतरण को लेकर राजनीति गरमाई हुई थी, जिसे नीतीश कुमार ने 14 अप्रैल को लोक भवन जाकर अपना इस्तीफा सौंपकर शांत कर दिया था, लेकिन नए मुख्यमंत्री के तौर पर सम्राट चौधरी का नाम फाइनल होने के बाद जब नीतीश कुमार के बेटे निशांत के सरकार में शामिल होने की बात उठी तो सूत्रों के मुताबिक़ निशांत ने खुद को इस लायक ना मानते हुए सरकार में शामिल होने और कोई भी पद लेने से इनकार कर दिया.

इसके बाद केन्द्रीय मंत्री ललन सिंह और कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा ने नीतीश कुमार को विजय कुमार चौधरी का नाम बताया. बाद में नीतीश कुमार ने इसमें विजेंद्र यादव का भी नाम जोड़ा. नीतीश कुमार ने पार्टी की बैठक में इस नाम के पीछे का तर्क भी दिया कि यादव वोट कभी भी जेडीयू के साथ नहीं रहा, लेकिन विजेंद्र यादव के नाम से यादव वोट बैंक पर असर होगा.

इसके बाद जेडीयू की तरफ से विजय कुमार चौधरी और विजेंद्र यादव का नाम फाइनल कर दिया गया. शपथ ग्रहण समारोह में सम्राट चौधरी ने मुख्यमंत्री और विजय चौधरी और विजेंद्र यादव ने मंत्री के रूप में शपथ ली, लेकिन राज्य के इस सबसे बड़े पॉलिटिकल इवेंट से निशांत ने दूरी बना ली.

नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ने और राज्यसभा जाने के फैसले के बाद निशांत कुमार को बड़े धूमधाम से जेडीयू में शामिल कराया गया था. यहां तक कि निशांत कुमार को पार्टी में मुख्यमंत्री बनाने की मांग भी नेताओं ने की थी. निशांत कुमार का इस कार्यक्रम से दूर होने से कई सारे सवाल उठते हैं.