पटना: राजधानी पटना में नीट की तैयारी कर रही छात्रा संवेदना की संदिग्ध मौत मामले में मुख्य आरोपियों में से एक, हॉस्टल मालिक मनीष रंजन को अदालत से करारा झटका लगा है. पटना की प्रथम श्रेणी की न्यायिक दंडाधिकारी प्रियंका कुमारी की अदालत ने मनीष रंजन की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए उसे सिरे से खारिज कर दिया. अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए मनीष रंजन को फिलहाल राहत देने से साफ इनकार कर दिया है.
कोर्ट ने कहा- मामला बेहद गंभीर
सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की ओर से लंबी दलीलें पेश की गईं. मनीष रंजन के वकील ने अपना पक्ष रखते हुए जमानत की गुहार लगाई, लेकिन सरकारी वकील और पीड़िता के पक्ष ने इसका कड़ा विरोध किया. दलीलों को सुनने के बाद न्यायिक दंडाधिकारी प्रियंका कुमारी ने टिप्पणी की कि छात्रा की मौत का यह मामला अत्यंत गंभीर प्रकृति का है और जांच के इस पड़ाव पर आरोपी को जमानत नहीं दी जा सकती.
क्या है पूरा मामला?
बता दें कि पटना में रहकर मेडिकल की तैयारी कर रही छात्रा संवेदना की हॉस्टल में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी. इस घटना ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया. संवेदना के माता-पिता ने हॉस्टल प्रबंधन पर लापरवाही और कई गंभीर आरोप लगाए थे. परिजनों का कहना है कि उनके बच्चे के साथ कुछ अनहोनी हुई है, जिसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है.
हॉस्टल मालिक मनीष रंजन को गिरफ्तार किया था. मनीष रंजन पर आरोप है कि हॉस्टल में सुरक्षा मानकों की अनदेखी की गई और घटना के बाद साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ की संभावना बनी रही. फिलहाल मनीष रंजन पटना के केंद्रीय आदर्श कारा बेउर जेल में बंद है.
परिजनों की मांग और पुलिस की कार्रवाई
संवेदना के माता-पिता लगातार न्याय की गुहार लगा रहे हैं. उन्होंने मनीष रंजन के अलावा कुछ अन्य लोगों पर भी संदेह जताया है. एसआईटी इस मामले में हर एंगल से जांच कर रही है. कोर्ट द्वारा जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद अब मनीष रंजन को फिलहाल जेल की सलाखों के पीछे ही रहना होगा.