बिहार के लिए कैसा है नीतीश सरकार का बजट? केंद्रीय फंड पर भारी निर्भरता से एक्सपर्ट की चिंता बढ़ी

पटना: बिहार विधानसभा सत्र के दूसरे दिन मंगलवार 3 जनवरी को बजट पेश किया गया। बिहार के वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने 3 लाख 47 हजार 589 करोड़ रुपये का बजट पेश किया। बजट में बिहार के विकास का रोडमैप पेश किया गया। हालांकि बिहार का बजट 2026-27 एक्सपर्ट्स को प्रभावित करने में नाकाम रहा। एक्सपर्ट ने चिंता जाहिर करते हुए बताया कि बिहार की अर्थव्यवस्था अभी भी केंद्रीय सहायता पर बहुत ज़्यादा निर्भर है, जो किसी भी लिहाज से ठीक नहीं है।

बिहार इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक फाइनेंस एंड पॉलिसी (BIPFP) के फैकल्टी सदस्य बख्शी अमित कुमार सिन्हा ने नीतीश सरकार के बजट पर अपनी राय रखी। बख्शी अमित कुमार सिन्हा ने कहा कि ‘बजट के आकार के मामले में बिहार अभी यूपी, महाराष्ट्र जैसे राज्यों से बहुत पीछे है। उत्तर प्रदेश का बजट 8.1 लाख करोड़ रुपये का है। महाराष्ट्र का बजट 7.6 लाख करोड़ रुपये है। बिहार बजट के मामले में 10 नंबर पर है।’

बिहार की वित्तीय योजना के लिए कैसे चुनौती?
उन्होंने कहा कि 2026-27 की अवधि के लिए, बिहार का प्रति व्यक्ति बजट आवंटन लगभग 27,000 रुपये है। बिहार के कुल राजस्व का 73.6 फीसदी हिस्सा केंद्र से आता है, जिसमें 55.4 फीसदी टैक्स का हिस्सा और 18.2 प्रतिशत सहायता अनुदान शामिल है। चिंता की बात यह है कि बिहार सरकार ने केंद्र से 1.58 लाख करोड़ रुपये मिलने का अनुमान लगाया है, जबकि केंद्रीय बजट में बिहार के लिए केवल 1.52 लाख करोड़ का ही प्रावधान है। इससे लगभग 6,000 करोड़ का अंतर बिहार की वित्तीय योजना के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है, जो कुल बजट का लगभग 2 फीसदी है।

बिहार की प्रगति के लिए कैसा है नीतीश सरकार का बजट?
पटना विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र के सहायक प्रोफेसर अविरल पांडे ने बताया कि बिहार का बजट राज्य की प्रगति के लिए एक स्थिर आधार तैयार करता है। उन्होंने कहा कि राजकोषीय घाटे को 3 फीसदी के करीब रखकर वित्तीय अनुशासन बनाए रखा गया है। उन्होंने कहा कि ‘बजट परिव्यय में 30,694 करोड़ रुपये की वृद्धि NDA सरकार के तहत प्रयोग के बजाय मजबूती को दर्शाती है। बजट धीरे-धीरे और स्थिर विकास की नींव रखता है, लेकिन इसकी दीर्घकालिक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि कौशल, महिलाओं की कार्यबल भागीदारी, पर्यटन, खेल, शहरीकरण और निजी पूंजी में निवेश को सरकारी वित्त पोषित विस्तार से परे उत्पादक और स्थायी रोजगार में प्रभावी ढंग से बदला जाता है या नहीं।’

बजट इस बात पर भी जोर देता है कि सात निश्चय-3 के तहत, एनडीए सरकार 1 करोड़ नौकरियां पैदा करने, प्रति व्यक्ति आय को दोगुना करने और स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को सशक्त बनाने पर ध्यान केंद्रित करेगी।
अविरल पांडे, प्रोफेसर, पटना विश्वविद्यालय

बिहार के बजट पर चिंता की बात क्या?
बख्शी के अनुसार, राज्य ने 2.31 लाख करोड़ रुपये आवंटित करके विकास खर्च को प्राथमिकता दी है, जो कुल बजट का 66.5 फीसदी है, जो पिछले साल की तुलना में लगभग 12 फीसदी की वृद्धि है। हालांकि, उन्होंने बताया कि बजट का एक बड़ा हिस्सा रखरखाव और स्थापना लागत पर खर्च होता है। चिंता का बात 2025-26 वित्तीय वर्ष की तुलना में 2026-27 के लिए पूंजीगत व्यय में 2.2 फीसदी की गिरावट है।