बिहार में मोबाइल चोरी से खाली हो रहे बैंक खाते, 380 करोड़ की डिजिटल लूट

पटना। बिहार में मोबाइल चोरी अब केवल एक आम अपराध नहीं रहा, बल्कि यह साइबर ठगी का सबसे बड़ा हथियार बन चुका है। चोरी गए मोबाइल फोन के जरिए अपराधी बैंक खातों तक पहुंच बना रहे हैं और लोगों की सालों की जमा पूंजी मिनटों में साफ कर दे रहे हैं। आंकड़े बताते हैं कि बीते पांच साल में मोबाइल चोरी और उससे जुड़ी डिजिटल ठगी से करीब 380 करोड़ रुपये की लूट हो चुकी है।

फोन चोरी के बाद बैंकिंग ऐप बने सबसे आसान निशाना
साइबर अपराधियों के लिए चोरी किया गया मोबाइल किसी खजाने से कम नहीं होता। फोन में मौजूद बैंकिंग ऐप, ओटीपी, ई-मेल और यूपीआई एक्सेस के जरिए अपराधी सीधे खातों पर हाथ साफ कर लेते हैं। कई मामलों में पीड़ित को तब तक भनक नहीं लगती, जब तक अकाउंट पूरी तरह खाली नहीं हो जाता। 2021 से 2025 तक मोबाइल चोरी के मामलों में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसके साथ ही ठगी की रकम भी कई गुना बढ़ी है। वर्ष 2025 में ही अब तक 147 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी सामने आ चुकी है।

शहरी इलाकों में ज्यादा खतरा, युवाओं को बनाया जा रहा निशाना
विशेषज्ञों के अनुसार, शहरी इलाकों में युवा और कामकाजी लोग सबसे ज्यादा शिकार हो रहे हैं। ऑनलाइन भुगतान, मोबाइल बैंकिंग और सोशल मीडिया की अधिक निर्भरता अपराधियों के लिए मौका बन गई है। भीड़भाड़ वाले इलाकों, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और बाजार मोबाइल चोरी के हॉटस्पॉट बन चुके हैं।

नेटवर्क नहीं, सिस्टम की कमजोरी से हो रही ठगी
पुलिस और साइबर सेल के अनुसार, ज्यादातर मामलों में ठगी नेटवर्क की वजह से नहीं, बल्कि लोगों की डिजिटल लापरवाही से हो रही है। फोन लॉक न होना, ऐप में ऑटो-लॉगिन, पासवर्ड सेव रहना और सिम लॉक न होना अपराधियों के काम को आसान बना देता है।

पुलिस और साइबर सेल की चुनौती बढ़ी
बढ़ते मामलों ने पुलिस और साइबर सेल की चिंता बढ़ा दी है। चोरी के मोबाइल को ट्रैक करना, सिम बदलने के बाद अपराधियों तक पहुंचना और ठगी की रकम रिकवर करना बड़ी चुनौती बन चुका है। हालांकि पुलिस का दावा है कि तकनीकी निगरानी और जागरूकता अभियान के जरिए इस पर काबू पाने की कोशिश जारी है।

सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव
साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि मोबाइल चोरी होने पर तुरंत सिम ब्लॉक कराना, बैंक को सूचना देना और साइबर थाना में शिकायत दर्ज कराना बेहद जरूरी है। साथ ही मोबाइल में मजबूत लॉक, टू-स्टेप वेरिफिकेशन और बैंकिंग ऐप में अतिरिक्त सुरक्षा जरूरी हो गई है।

डिजिटल सुविधा के साथ डिजिटल सतर्कता जरूरी
डिजिटल इंडिया के दौर में मोबाइल जीवन का अहम हिस्सा बन चुका है, लेकिन थोड़ी सी लापरवाही लाखों का नुकसान करा सकती है। बढ़ते आंकड़े साफ संकेत दे रहे हैं कि अब डिजिटल सुविधा के साथ डिजिटल सतर्कता भी उतनी ही जरूरी है, वरना मोबाइल चोरी सीधे आपकी जमा-पूंजी पर हमला बनती जाएगी।