बिहार की इप्शा पाठक ने मिथिला पेंटिंग में पिरोई ‘हनुमान चालीसा’, हर चौपाई के बाद प्रभु श्रीराम का नाम

मुजफ्फरपुर: बिहार के मुजफ्फरपुर शहर की रहने वाली कलाकार इप्शा पाठक ने पारंपरिक मिथिला पेंटिंग को एक नया और आध्यात्मिक आयाम देते हुए हनुमान चालीसा को इस लोककला शैली में साकार किया है. उनकी यह अनोखी पहल न सिर्फ कला प्रेमियों, बल्कि सनातन संस्कृति से जुड़े लोगों के बीच भी खासा आकर्षण का केंद्र बनी हुई है.

हर चौपाई के बाद प्रभु श्री राम का नाम: इप्शा पाठक ने हनुमान चालीसा की चौपाइयों पर आधारित खूबसूरत मिथिला पेंटिंग बनाई है. हर चौपाई के पूर्ण होने पर प्रभु श्रीराम का नाम भी उकेरा है. हनुमान चालीसा को मिथिला पेंटिंग शैली में उकेरने के बाद से उन्हें देश ही नहीं बल्कि विदेशों से भी ऑर्डर मिल रहा है.

मिथिला पेंटिंग में हनुमान चालीसा का चौपाइयां: इप्शा पाठक ने बताया कि हनुमान चालीसा को मिथिला पेंटिंग में उकेरने के पीछे उनका सबसे बड़ा उद्देश्य आम लोगों को सनातन धर्म से अधिक से अधिक जोड़ना है. उनका मानना है कि यदि कोई व्यक्ति सुबह नींद से उठते ही भगवान से जुड़ी किसी कलाकृति को देखता है, तो मन में स्वतः सकारात्मकता आ जाती है और दिन की शुरुआत अच्छे भावों के साथ होती है. इसी सोच के साथ उन्होंने इस पवित्र ग्रंथ को कला के माध्यम से लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया.

“यह काम आसान नहीं था. जब मैंने पहली बार हनुमान चालीसा को मिथिला पेंटिंग के रूप में दर्शाने का विचार किया, तब सबसे बड़ी चुनौती हर एक श्लोक के भाव के अनुरूप चित्र को प्रस्तुत करना था. हनुमान चालीसा के प्रत्येक श्लोक में अलग-अलग भाव, प्रसंग और संदेश छिपा है, जिसे रंगों और रेखाओं के माध्यम से दिखाना काफी कठिन रहा. इसके बावजूद मैंने धैर्य और समर्पण के साथ इस चुनौती को स्वीकार किया.”- इप्शा पाठक, कलाकार

25 दिन का लगा समय: इस पूरी कलाकृति को तैयार करने में उन्हें लगभग 25 दिन का समय लगा है. इस दौरान उन्होंने पारंपरिक मिथिला पेंटिंग की शैली, रंग संयोजन और प्रतीकों का विशेष ध्यान रखा, ताकि मूल लोककला की पहचान भी बनी रहे और हनुमान चालीसा की आध्यात्मिक गरिमा भी. तैयार होने के बाद यह कलाकृति लोगों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो गई.

विदेशों से ऑर्डर: इप्शा पाठक ने बताया कि इस मिथिला हनुमान चालीसा की काफी डिमांड आ रही है. खास बात यह है कि इसे विदेश में रहने वाले भारतीयों ने भी काफी पसंद किया है. सूडान में रहने वाले एक भारतीय ने इसका ऑर्डर दिया था. इसके अलावा मुंबई और बेंगलुरु जैसे महानगरों में भी यह कलाकृति भेजी जा चुकी है. इससे यह स्पष्ट होता है कि पारंपरिक भारतीय कला और सनातन संस्कृति के प्रति लोगों का जुड़ाव देश-विदेश में लगातार बढ़ रहा है.

पेंटिंग की कितनी है कीमत?: वर्तमान में इप्शा पाठक फ्रेम की गई मिथिला हनुमान चालीसा को लगभग चार हजार रुपये में बेच रही हैं. उनका कहना है कि भविष्य में वे इसी तरह अन्य धार्मिक ग्रंथों और विषयों को भी मिथिला पेंटिंग के माध्यम से प्रस्तुत करना चाहती हैं, ताकि यह लोककला नई पीढ़ी तक पहुंचे और हमारी सांस्कृतिक विरासत जीवित रह सके.

कोरोना काल में हुनर को दी धार: बता दें कि आपदा के समय आमतौर पर सबकी हालत दयनीय हो जाती है. कोरोना काल इसका बड़ा उदाहरण रहा, लेकिन इसी आपदा के दौर में कुछ ऐसे लोग भी सामने आए, जिन्होंने संकट को अवसर में बदला और नई ऊंचाइयों को छुआ. इन्हीं में मुजफ्फरपुर की इप्शा पाठक भी शामिल हैं, जिन्होंने कोरोना काल में नौकरी छूटने के बाद अपने हुनर को हथियार बनाकर एक अलग पहचान बनाई.

‘आवरण’ नाम से चला रही कंपनी: मुजफ्फरपुर शहर के पुरानी बाजार निवासी इप्शा पाठक ‘आवरण’ नाम से अपनी कंपनी चला रही हैं. वे हैंड पेंटेड बैग, कड़े, कैलेंडर, मास्क, बेडशीट, पर्दे समेत कई तरह के उत्पाद तैयार करती हैं. उनके बनाए उत्पाद न सिर्फ बिहार, बल्कि देश-विदेश में भी बेचे जा रहे हैं.

शिक्षा से लेकर करियर तक का सफर: इप्शा बताती हैं कि इसकी शुरुआत कोरोना काल में हुई थी. शुरुआत में उन्होंने मास्क बनाना शुरू किया और फिर धीरे-धीरे अपने प्रोडक्ट्स की रेंज बढ़ाती चली गईं. इप्शा की शुरुआती पढ़ाई मुजफ्फरपुर में हुई. उन्होंने वर्ष 1997 में मैट्रिक और 1999 में इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी की.

2010 में मुजफ्फरपुर ट्रांसफर: इसके बाद ग्रेजुएशन के लिए वह सिक्किम चली गईं. ग्रेजुएशन के अंतिम वर्ष में उन्होंने एक निजी बैंक में काम किया. इसी दौरान उन्होंने पुणे में मैनेजमेंट (एचआर एंड मार्केटिंग) में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की. बाद में वर्ष 2010 में उनका ट्रांसफर मुजफ्फरपुर हो गया, हालांकि कुछ कारणों से उन्होंने नौकरी छोड़ दी.

शादी के बाद मुजफ्फरपुर में नई शुरुआत: इप्शा बताती हैं कि पुणे में काम के दौरान ही उनकी शादी तय हो गई थी. परिवार की सहमति से वर्ष 2008 में उनका विवाह हुआ. शादी के बाद वह मुजफ्फरपुर आ गईं. उनके पति एक निजी कंपनी में इंजीनियर हैं और उनकी एक बेटी भी है.

महिलाओं के लिए बनीं मिसाल: शादी के बाद उन्होंने मुजफ्फरपुर में ही अपने करियर की नई शुरुआत की और एक एनजीओ में काम करने लगीं. आज इप्शा पाठक अपनी मेहनत और रचनात्मकता के दम पर न सिर्फ आत्मनिर्भर बनी हैं, बल्कि कई लोगों खासकर महिलाओं के लिए प्रेरणा भी बन चुकी हैं.

मिथिला पेंटिंग की खासियत: मिथिला पेंटिंग में प्राकृतिक रंगों का उपयोग होता है. इसमें रंगों को प्राकृतिक स्त्रोतों जैसे हल्दी(पीला), नील (नीला), सिंदूर (लाल) और चावल के पाउडर (सफेद) से तैयार किया जाता है. खाली स्थानों को फूलों, पक्षियों या ज्यामितीय आकृतियों से भरा जाता है. दोहरी रेखाओं का पेंटिंग को आकर्षक बनाने के लिए प्रयोग होता है. विशेष शारीरिक बनावट के लिए आंखें बड़ी और उभरी हुई बनायी जाती है. इसके अंतर्गत भरनी, कचनी, तांत्रिक, गोदना और कोहबर पांच शैलियां आती हैं.