बदले की राह पर तेज प्रताप? तेजस्वी के खिलाफ खोला मोर्चा, लालू के लाल ने RJD नेताओं को दिया खुला ऑफर

Bihar Politics: तेज प्रताप यादव इन दिनों पूरी तरह अपनी नई राजनीतिक पार्टी जनशक्ति जनता दल (JJD) को मजबूत करने और उसके विस्तार में जुटे हुए हैं। वे लगातार यह संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं कि अब उनका फोकस केवल संगठन निर्माण और नई राजनीतिक राह पर आगे बढ़ने का है। हाल ही में एक पॉडकास्ट में बातचीत के दौरान तेज प्रताप ने कहा कि वे पार्टी कार्यकर्ताओं को एकजुट कर रहे हैं और सभी को स्पष्ट जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। उनके अनुसार, संगठन तेजी से फैल रहा है और अलग-अलग राज्यों में पार्टी की नींव मजबूत की जा रही है।

जनशक्ति जनता दल के प्रदेश अध्यक्षों की की जा चुकी है नियुक्ति
तेज प्रताप यादव ने बताया कि उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और दिल्ली जैसे अहम राज्यों में जनशक्ति जनता दल के प्रदेश अध्यक्षों की नियुक्ति की जा चुकी है। उनका दावा है कि लगातार नए लोग पार्टी से जुड़ रहे हैं और जमीनी स्तर पर संगठन को खड़ा किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि पूर्व आरजेडी विधायक और अन्य नेता भी अब जेजेडी के संपर्क में हैं। रजौली से प्रकाश वीर, जो पहले आरजेडी के विधायक रह चुके हैं, जेजेडी के टिकट पर चुनाव लड़ चुके हैं। इसके अलावा दो और विधायकों ने भी उनकी पार्टी से चुनाव में किस्मत आजमाई थी।

तेज प्रताप ने राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के उन विधायकों को खुला न्योता दिया है, जो चुनाव हार चुके हैं। उन्होंने कहा कि अगर ऐसे नेता जेजेडी में शामिल होना चाहते हैं तो उनका स्वागत किया जाएगा और पार्टी में उन्हें पूरा मान-सम्मान मिलेगा। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि उनकी पार्टी में परिवारवाद के लिए कोई जगह नहीं होगी। तेज प्रताप ने यह भी संकल्प दोहराया कि वे मरते दम तक जनशक्ति जनता दल को परिवारवाद से दूर रखेंगे, चाहे इसके लिए उन्हें कितनी भी राजनीतिक चुनौतियों का सामना क्यों न करना पड़े।

महुआ सीट से चुनाव लड़ने को लेकर उठे सवालों पर तेज प्रताप ने कहा कि उन्हें चुनाव न लड़ने के लिए कॉल जरूर आए थे, लेकिन उन्होंने किसी को कोई जवाब नहीं दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब उन्होंने चुनाव लड़ने का फैसला कर लिया था तो पीछे हटने का सवाल ही नहीं था। खुद को श्रीकृष्ण का भक्त बताते हुए उन्होंने कहा कि रणभूमि में उतरकर पीठ दिखाना उनका स्वभाव नहीं है। हार-जीत राजनीति का हिस्सा है और इससे कोई नेता छोटा या बड़ा नहीं बनता। उन्होंने अपने पिता लालू प्रसाद यादव का उदाहरण देते हुए कहा कि वे भी कई चुनाव हारे हैं, लेकिन इससे उनके कद पर कोई असर नहीं पड़ा।

जहां कृष्ण का अपमान, वहां विजय संभव नहीं: तेज प्रताप
बिहार विधानसभा चुनाव में आरजेडी की हार पर बोलते हुए तेज प्रताप यादव ने कहा कि इसकी सबसे बड़ी वजह “जयचंदों की घुसपैठ” और “कृष्ण का अपमान” है। उन्होंने प्रतीकात्मक भाषा में कहा कि जहां कृष्ण का अपमान होता है, वहां विजय संभव नहीं होती। दिलचस्प बात यह है कि वे बिहार की एनडीए सरकार के प्रति नरम रुख अपनाते नजर आ रहे हैं और समय-समय पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की तारीफ भी करते हैं।

वोटबैंक की राजनीति पर तेज प्रताप ने कहा कि वे केवल मुस्लिम-यादव (एमवाई) समीकरण तक सीमित नहीं रहना चाहते। उनका कहना है कि उनकी राजनीति सभी वर्गों को साथ लेकर चलने की है। इसी कड़ी में उन्होंने ब्राह्मण-भूमिहार एकता मंच से जुड़े नेताओं से मुलाकात का भी जिक्र किया। कुल मिलाकर, आने वाले समय में तेज प्रताप यादव और तेजस्वी यादव के बीच सियासी टकराव और तेज होने के संकेत साफ नजर आ रहे हैं।