शपथ लेने में सबसे आगे, पर कुर्सी पर टिके रहने में पीछे! जानिए अब तक कितने दिन सीएम रह चुके हैं नीतीश

Nitish Kumar Bihar CM: बिहार में एनडीए ने बंपर जीत हासिल की है. शाम 5 बजे तक एनडीए गठबंधन 203 सीटों पर आगे है. जबकि आरजेडी गठबंधन 34 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है. ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम 5 सीटों पर आगे है. अब प्रचंड जीत के साथ बिहार में एक बार फिर सरकार बनाने के लिए तैयार है. कमान एक बार फिर होगी नीतीश कुमार के हाथों में. भले ही सबसे लंबे वक्त तक मुख्यमंत्री रहने के रिकॉर्ड से नीतीश कुमार काफी पीछे हों लेकिन सबसे ज्यादा बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने में वह सबसे आगे हैं. यानी नीतीश कुमार कुर्सी पर टिकने के मामले में जरा कच्चे हैं. चलिए जानते हैं कि सबसे लंबे वक्त तक मुख्यमंत्री कौन रहा.

पवन चामलिंग के नाम बड़ा रिकॉर्ड
सबसे लंबे वक्त तक सीएम रहने का रिकॉर्ड सिक्किम के सीएम रहे पवन चामलिंग के नाम दर्ज हैं, जो 24 साल 165 दिन तक मुख्यमंत्री रहे. दूसरी ओर, नीतीश कुमार 18 साल 347 दिन से मुख्यमंत्री हैं. इस दौरान उन्होंने कई बार सियासी पलटी मारी है. कभी वह एनडीए के साथ रहे तो कभी महागठबंधन का हाथ थामा. इसके लिए उन्होंने बार-बार इस्तीफा दिया और पद की शपथ ली.

7 दिन के सीएम बने थे नीतीश
साल 2000 में बिहार का विभाजन हुआ और झारखंड अस्तित्व में आया. इसके बाद इसी साल में चुनाव हुए. लेकिन नीतीश कुमार 7 दिन के लिए मुख्यमंत्री बने. इसके बाद राज्य में राष्ट्रपति शासन लग गया और अक्टूबर 2005 में जब दोबारा चुनाव हुए तो एनडीए को स्पष्ट जनादेश मिला और नीतीश कुमार सीएम बने. 2010 के विधानसभा चुनाव में भी यही कहानी दोहराई गई. एनडीए जीती और नीतीश सीएम. जेडीयू 115 सीटों पर जीती और बीजेपी को 91 सीटों पर विजय मिली. इसके चार साल तक नीतीश ने बतौर सीएम काम किया.

कभी एनडीए कभी महागठबंधन का थामा दामन
लेकिन जब 2014 में बीजेपी ने पीएम पद के लिए नरेंद्र मोदी का नाम आगे किया तो नीतीश बिफर गए और एनडीए के साथ रिश्ता तोड़कर कांग्रेस-आरजेडी संग मिलकर सरकार में बने रहे. 2014 के लोकसभा चुनाव में जेडीयू के खराब प्रदर्शन की वजह से नीतीश ने इस्तीफा देकर जीतन राम मांझी को मुख्यमंत्री पद सौंप दिया. लेकिन इसके बाद नीतीश और मांझी के संबंधों में खटास आ गई.

फरवरी 2015 में नीतीश दोबारा सीएम बन गए. 2015 में बिहार में दोबारा इलेक्शन हुआ. इस बार दो दशक बाद नीतीश लालू के साथ मिलकर चुनाव लड़े और महागठबंधन को बड़ी जीत मिली. आरजेडी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी. मगर सीएम नीतीश ही रहे. लेकिन महागठबंधन से नीतीश का मोह दो साल में ही भंग हो गया और उन्होंने 2017 में महागठबंधन का साथ छोड़कर फिर एनडीए का दामन थाम लिया और मुख्यमंत्री पद की शपथ ली.

सियासत के पलटू राम
फिर आया 2020 का विधानसभा चुनाव. यहां नीतीश कुमार एनडीए के झंडे तले चुनाव लड़े और 125 सीटें हासिल की. इस चुनाव में बीजेपी को ज्यादा और जेडीयू को कम सीटें मिली थीं. लेकिन बावजूद इसके नीतीश कुमार ही मुख्यमंत्री बने. मगर 2022 आते-आते बीजेपी के नेताओं के सुर नीतीश के खिलाफ होने लगे. नीतीश को लगा कि बीजेपी जेडीयू तोड़ने की कोशिश कर रही है. उन्होंने आरसीपी सिंह को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया. इसके बाद नीतीश ने फिर पलटी मारी और तेजस्वी के साथ मिलकर सरकार बनाई. मगर नीतीश का मन यहां भी ज्यादा दिन नहीं लगा और जनवरी 2024 में वह फिर से एनडीए में लौट आए.