उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी में बड़े फेरबदल के आसार, इस विधायक को बनाया जा सकता है प्रदेश अध्यक्ष

पटना: बिहार की राजनीति में उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) इस समय बड़े बदलावों के दौर से गुजर रही है। अपने बेटे को बिना चुनाव लड़ाए मंत्री बनाने के फैसले पर आलोचकों के निशाने पर आए कुशवाहा अब डैमेज कंट्रोल में जुट गए हैं। पार्टी के भीतर विधायकों की नाराजगी को दूर करने और संगठन को नई ऊर्जा देने के लिए आज पटना के मौर्य होटल में दोपहर 1:30 बजे एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई है। चर्चा है कि इस दौरान दिनारा से विधायक आलोक सिंह को पार्टी का नया प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया जा सकता है। ये फैसला पार्टी के अंदरूनी असंतोष को शांत करने और आगामी चुनावों के लिए सामाजिक समीकरणों को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है।

आलोक सिंह के नाम पर बनी सहमति
सूत्रों के अनुसार, पार्टी में पिछले कुछ समय से नेतृत्व के फैसलों को लेकर खींचतान चल रही थी। इसी को खत्म करने के लिए हाल ही में वरिष्ठ नेता माधव आनंद और विधायक आलोक सिंह ने पटना में उपेंद्र कुशवाहा से मुलाकात की थी। मंथन के बाद ये तय हुआ कि संगठन की कमान अब आलोक सिंह को सौंपी जाएगी। माधव आनंद पहले से ही विधानसभा में विधायक दल के नेता हैं, जबकि कुशवाहा की पत्नी स्नेह लता कुशवाहा सचेतक की जिम्मेदारी निभा रही हैं।

कुशवाहा-राजपूत समीकरण साधने की रणनीति
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि आलोक सिंह को प्रदेश अध्यक्ष बनाना एक सोची-समझी रणनीति है। कुशवाहा समाज से आने वाले उपेंद्र कुशवाहा अब शाहाबाद क्षेत्र में मजबूत आधार रखने वाले राजपूत समाज को पार्टी से जोड़ना चाहते हैं। आलोक सिंह के जरिए कुशवाहा और राजपूत समाज के बीच संतुलन बनाकर पार्टी अपनी पैठ को और गहरा करना चाहती है, जिससे संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूती मिल सके।

कुशवाहा की साख पर टिकीं नजरें
प्रेस कॉन्फ्रेंस पर सबकी नजरें इसलिए भी हैं क्योंकि उपेंद्र कुशवाहा पिछले कुछ दिनों से अपने व्यक्तिगत फैसलों को लेकर सवालों के घेरे में रहे हैं। इस नियुक्ति के माध्यम से वे ये संदेश देना चाहते हैं कि पार्टी एकजुट है और लोकतांत्रिक तरीके से वरिष्ठ नेताओं को जिम्मेदारी दी जा रही है। अगर आज आलोक सिंह के नाम की घोषणा होती है, तो यह पार्टी के भविष्य के लिए एक नई दिशा तय करेगा।