बिहार पंचायत चुनाव से पहले बड़ा बवाल! मुखिया संघ ने उठा दी बड़ी मांग, क्या फंसेगा पेंच?

पटना. बिहार में पंचायत चुनाव की आहट के बीच मुखिया संघ ने सरकार के सामने बड़ी मांग रखी है. मुखिया संघ ने चुनाव से पहले राज्य की पंचायतों का नए सिरे से परिसीमन (री-डिलिमिटेशन) कराए जाने की मांग की है. इस मुद्दे को लेकर पंचायत प्रतिनिधियों ने एकजुट होकर अपनी आवाज बुलंद की है. जानकारी के अनुसार, हाल ही में आयोजित मुखिया संघ की राज्य स्तरीय कार्यकारिणी बैठक में इस मांग को लेकर गहन चर्चा हुई.

बैठक के बाद सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया गया कि पंचायत चुनाव से पहले पंचायतों का पुनः परिसीमन कराया जाना जरूरी है. प्रतिनिधियों का कहना है कि वर्तमान परिसीमन जनसंख्या और भौगोलिक स्थिति के अनुरूप नहीं है, जिससे पंचायतों के संचालन और विकास कार्यों में दिक्कतें आ रही हैं.
मुखिया संघ ने दिया यह तर्क

मुखिया संघ का तर्क है कि कई पंचायतों में आबादी अत्यधिक बढ़ चुकी है, जबकि कुछ पंचायतों का क्षेत्रफल और जनसंख्या काफी कम है. ऐसे में समान विकास, प्रशासनिक संतुलन और प्रभावी प्रतिनिधित्व के लिए परिसीमन बेहद जरूरी हो गया है. संघ का कहना है कि बिना परिसीमन कराए चुनाव कराना लोकतांत्रिक भावना के खिलाफ होगा. बैठक में मौजूद पंचायत प्रतिनिधियों ने साफ तौर पर कहा कि अगर सरकार उनकी मांगों पर समय रहते ध्यान नहीं देती है, तो वे पटना उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने से भी पीछे नहीं हटेंगे. मुखिया संघ ने इसे पंचायत स्तर पर लोकतंत्र को मजबूत करने की लड़ाई बताया है.

मुखिया संघ ने कानूनी विकल्प की दी धमकी
मुखिया संघ के नेताओं का कहना है कि उन्होंने इस संबंध में पहले भी कई बार सरकार और संबंधित विभागों को ज्ञापन सौंपा है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई. ऐसे में पंचायत प्रतिनिधियों के पास कानूनी रास्ता अपनाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा. पंचायत चुनाव से पहले उठी इस मांग ने बिहार की सियासत और प्रशासनिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है. अब देखना होगा कि राज्य सरकार मुखिया संघ की इस मांग पर क्या रुख अपनाती है और क्या पंचायत चुनाव से पहले परिसीमन को लेकर कोई फैसला लिया जाता है या नहीं.

फिलहाल, पंचायत प्रतिनिधियों की एकजुटता और संभावित कानूनी लड़ाई ने यह साफ कर दिया है कि आने वाले दिनों में पंचायत चुनाव से पहले यह मुद्दा और गरमाने वाला है.