प्रशांत किशोर के निशाने पर नीतीश, लालू या भाजपा; जन सुराज की सूची से किसकी बढ़ी परेशानी?

पटना: प्रशांत किशोर के दल जन सुराज पार्टी (जेएसपी) की पहली कैंडिडेट लिस्ट 51 उम्मीदवारों के नाम के साथ आ गई है। इसके बाद पार्टी के दफ्तर में टिकट के कुछ दावेदारों ने हंगामा भी किया, जिन्हें उम्मीद थी कि उनका नाम लिस्ट में होगा। राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय सिंह उर्फ पप्पू सिंह ने समाज के सभी वर्गों के प्रतिनिधित्व की बात की और कहा कि लिस्ट में 7 सुरक्षित सीटों पर दलित (SC) कैंडिडेट के अलावा 17 अति पिछड़ा (EBC), 11 पिछड़ा (OBC) और 7 मुसलमान उम्मीदवारों को टिकट मिला है। उदय सिंह ने सवर्णों की गिनती नहीं बताई लेकिन बाकी बची 9 सीटों पर उनको गिना जा सकता है।

पार्टी सुप्रीमो प्रशांत किशोर लिस्ट जारी करने के दौरान मौजूद नहीं थे लेकिन बाद में मीडिया से बातचीत में कहा कि 51 की सूची में 17 अति पिछड़ा हैं, किसी दूसरे दल की हिम्मत नहीं है कि 30 प्रतिशत ईबीसी समाज को टिकट दे। सीएम नीतीश कुमार के नेतृत्व वाले सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) और तेजस्वी यादव की अगुवाई वाले विपक्षी महागठबंधन में सीट का बंटवारा अभी हुआ नहीं है। इसलिए यह तुलना नहीं हो सकती कि किस दल या गठबंधन ने किस जाति या बिरादरी को कितने टिकट दिए। लेकिन यह आकलन चालू है कि लिस्ट से नीतीश कुमार, लालू यादव – तेजस्वी यादव या भाजपा में किसकी परेशानी बढ़ेगी।

जन सुराज पार्टी की लिस्ट से नीतीश कुमार को कितनी परेशानी?
जन सुराज पार्टी की कैंडिडेट लिस्ट में 30 फीसदी अति पिछड़ा कैंडिडेट होना अगर किसी एक नेता के लिए चिंता का विषय हो सकता है तो वो नीतीश के अलावा कोई और नहीं होंगे। ईबीसी नीतीश का कट्टर वोट बैंक है और उसके लिए नीतीश ने कई योजनाएं चलाईं। अति पिछड़ों को झोली भरकर टिकट देना नीतीश के कोर वोट पर चोट की मंशा जाहिर कर रहा है। महिलाएं भी नीतीश की कोर वोटर मानी जाती हैं। लिस्ट में 7 औरत और एक ट्रांसजेंडर हैं। महिलाएं नीतीश के नाम पर बटन दबाती रही हैं। इसके पीछे शराबबंदी, जीविका दीदी जैसी कई पहल हैं। अभी सबको 10-10 हजार रोजगार योजना में मिला है।

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जन सुराज पार्टी की लिस्ट से लालू और तेजस्वी यादव को कितनी परेशानी?
लालू यादव या तेजस्वी यादव के लिए जन सुराज पार्टी से ओबीसी को 11 टिकट देना बहुत चिंता की बात नहीं है। किसी भी सीट पर त्रिकोणीय मुकाबले में उनकी चिंता बढ़ाने की ताकत यादव या मुसलमान कैंडिडेट में है। यादव के अलावा अन्य पिछड़ी जातियों के सरदार लालू एक जमाने में थे, लेकिन वह दौर बीत चुका है। पीएम नरेंद्र मोदी के उभार के बाद ओबीसी वोटरों का बड़ा हिस्सा भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के साथ जुड़ा है और टिका है। जन सुराज की लिस्ट में दो-तीन नाम ही यादव के हैं।

मिथिला और सीमांचल के जिलों में जन सुराज ने पहली लिस्ट में ही 7 मुसलमान उतार दिए हैं। यह लालू और तेजस्वी के लिए परेशान की वजह बन सकता है। प्रशांत जिस तरह से तेजस्वी के मुस्लिम नेताओं को उकसा रहे हैं कि दबाव बनाकर राजद से 40 सीट ले लो, उसके मद्देनजर महागठबंधन और राजद पर मुस्लिम कैंडिडेट बढ़ाने का प्रेशर बन सकता है। 51 में 7 मुस्लिम लगभग 14 परसेंट सीट बनता है।

जन सुराज पार्टी की लिस्ट से भाजपा को कितनी परेशानी?
जन सुराज पार्टी की 51 कैंडिडेट की लिस्ट में 7 दलित और 9 सवर्ण को टिकट मिला है। प्रशांत के नेतृत्व की वजह से सवर्ण समाज में कुछ हलचल है, लेकिन वो खुद इस छवि से बाहर रहकर राजनीति करना चाहते हैं। करीब 18 फीसदी टिकट सवर्णों को मिला है। सवर्ण सामान्य रूप से भाजपा के साथ हैं। जन सुराज द्वारा सवर्णों को लड़ाना भाजपा की चिंता का विषय हो सकता है। राज्य के दोनों बड़े दलित नेता चिराग पासवान और जीतनराम मांझी भाजपा के ही साथ हैं। मोदी के साथ खड़े चिराग और मांझी के प्रभाव को जन सुराज के एससी कैंडिडेट चुनौती दे पाएंगे, यह आसान नहीं है।

जन सुराज पार्टी ने चूंकि पहले कैंडिडेट लिस्ट जारी कर दी है इसलिए असली चुनावी खेल तब समझ में आ सकता है जब एनडीए और महागठबंधन के उम्मीदवारों की सूची आ जाए। तीनों के उम्मीदवार और सीट के वोट-गणित को एक साथ देखने के बाद ही समझ आ सकता है कि प्रशांत किशोर का कैंडिडेट फायदे में रहेगा या किसी के फायदे की वजह बनेगा।