पटनाः बिहार की राजनीति में राज्यसभा चुनाव के नतीजों ने महागठबंधन के अंदर एक नई ‘सिरदर्दी’ पैदा कर दी है. खबर है कि चुनाव में अपने ही विधायकों की ‘बेवफाई’ के कारण कांग्रेस और राजद अब इस सोच में पड़े हैं कि आखिर इन बागियों का किया क्या जाए. मामला दांव-पेच और कानूनी उलझनों में ऐसा फंसा है कि पार्टियां कार्रवाई करने से कतरा रही हैं.
क्या है पूरा मामला?
हाल ही में हुए राज्यसभा चुनाव में महागठबंधन को एनडीए के हाथों हार झेलनी पड़ी. हार की बड़ी वजह रहे वो चार विधायक जिन्होंने ऐन मौके पर पाला बदल लिया या वोटिंग से ही गायब रहे. इनमें कांग्रेस के तीन और राजद का एक विधायक शामिल है.
किसने मारी पलटी?
कांग्रेस के तीन नाम: सुरेंद्र मेहता (वाल्मीकि नगर), मनोज विश्वास (फारबिसगंज) और मनोहर प्रसाद सिंह (मनिहारी). इन तीनों ने वोट नहीं डाला.
राजद का एक नाम: ढाका से विधायक फैसल रहमान भी वोटिंग के दिन नदारद रहे.
बहाने और आरोप-प्रत्यारोप
इन विधायकों के पास भी अपने बहाने तैयार हैं। राजद विधायक फैसल रहमान ने कहा कि उनकी मां बीमार थीं, इसलिए वो नहीं आ पाए। वहीं, कांग्रेस के तीनों विधायकों ने राजद पर बड़ा आरोप जड़ा है. उनका कहना है कि राजद ने बिना पूछे एडी सिंह को उम्मीदवार बना दिया और उन्हें गठबंधन में “बेइज्जत” महसूस कराया गया.
तेजस्वी के आने का इंतजार
फिलहाल सबकी नजरें तेजस्वी यादव पर टिकी हैं. उनके पटना लौटते ही राजद अपने विधायक फैसल रहमान पर फैसला लेगी. दूसरी तरफ, भाजपा और जदयू इस कलह पर मजे ले रहे हैं. उनका कहना है कि एनडीए अपनी एकजुटता की वजह से जीता है, जबकि विपक्ष ताश के पत्तों की तरह बिखर रहा है.
कुल मिलाकर, महागठबंधन इस समय ‘उगलते बने न निगलते’ वाली स्थिति में है. अगर कार्रवाई की तो कुनबा और छोटा होगा, और अगर छोड़ दिया तो अनुशासन की धज्जियां उड़ेंगी.