सम्राट ही होंगे बिहार के अगले ‘चौधरी’, 15 अप्रैल तक बनेगी नई सरकार! समृद्धि यात्रा के बाद नीतीश सौंप देंगे सत्ता

नीतीश कुमार के राज्यसभा का सदस्य निर्वाचित होते ही सीएम पद से उनके इस्तीफे का काउंट डाउन शुरू हो गया है. उनके इस्तीफे की तारीख का अनुमान भी लोग लगाने लगे हैं. सब कुछ ठीक रहा तो पखवाड़े भर में वे बिहार विधान परिषद की सदस्यता छोड़ देंगे. सीएम पद छोड़ने में थोड़ा वक्त लग सकता है. पर, इतना तय माना जा रहा है कि 15 अप्रैल तक वे सीएम पद से भी इस्तीफा दे देंगे. जन प्रतिनिधित्व कानून के मुताबिक कोई व्यक्ति एक साथ दो सदनों का सदस्य नहीं रह सकता. एक सदन का सदस्य रहते कोई दूसरे सदन का सदस्य निर्वाचित होता है तो उसे किसी एक सदन से 14 दिनों के अंदर इस्तीफा देना होता है. नीतीश राज्यसभा के लिए 16 मार्च 2026 को निर्वाचित हुए हैं. वे किस सदन का सदस्य रहेंगे, अब उन्हें तय करना है. पर, हर हाल में उन्हें 14 दिनों के अंदर ही यह फैसला करना होगा. नीतीश के संदर्भ में वह तारीख 30 मार्च होगी. वे पहले से बिहार विधान परिषद के सदस्य हैं. अनुमान है कि नीतीश कुमार अपनी चल रही समृद्धि यात्रा खत्म होते ही इस्तीफा दे देंगे. हालांकि वे चाहें तो विधान परिषद से इस्तीफे के बाद भी 6 महीने तक सीएम पद पर बने रह सकते हैं. नीतीश के सीएम पद छोड़ने पर भाजपा से नया सीएम बनना तय है.

BJP की साध अब होगी पूरी
बिहार में भाजपा का मुख्यमंत्री बनना ऐतिहासिक पल होगा. बिहार में पहली बार भाजपा का नेता मुख्यमंत्री बनेगा. भाजपा की वर्षों पुरानी मुराद अब पूरी होगी. लंबे समय से बिहार में मुख्यमंत्री पद की चाहत भाजपा की रही है. 2005 से नीतीश कुमार की अगुवाई में एनडीए सरकार चल रही है, मुख्यमंत्री हमेशा जेडीयू से ही रहा. भाजपा दो मौकों पर सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद मुख्यमंत्री पद से वंचित रही. अब नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के फैसले के साथ भाजपा का यह लंबा इंतजार खत्म होने वाला है. 2020 में भाजपा विधायकों की संख्या जेडीयू से अधिक थी. तब भी सीएम नीतीश कुमार ही बने. तब भाजपा के 80 तो जेडीयू के 43 विधायक थे. 2025 में भी भाजपा ने दूसरी बार जेडीयू से अधिक सीटें जीतीं. इसके बावजूद गठबंधन की शर्तों के मुताबिक भाजपा ने सीएम की कुर्सी जेडीयू को ही सोंप दी. नीतीश ने 10वीं बार सीएम पद की शपथ ली. अब चूंकि नीतीश राज्यसभा के लिए चुन लिए गए हैं, इसलिए भाजपा का सीएम बनना पक्का है.

बंगाल चुनाव से पहले बदलाव
भाजपा का शीर्ष नेतृत्व चाहता है कि नीतीश कुमार पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव शुरू होने के पहले सीएम की कुर्सी खाली कर दें. भाजपा नेतृत्व परिवर्तन से पड़ोसी राज्य बंगाल को संदेश देना चाहती है कि उसका साम्राज्य तेजी से बढ़ रहा है. पश्चिम बंगाल में अगले महीने विधानसभा चुनाव होने हैं. तारीखों का ऐलान भी हो चुका है. भाजपा बंगाल में तृणमूल कांग्रेस को चुनौती दे रही है. बिहार में भाजपा का मुख्यमंत्री बनना पार्टी के लिए बंगाल में मनोबल बढ़ाने वाला होगा. बंगाल में भाजपा पिछड़ा और अन्य वर्गों को साधने की कोशिश कर रही है. पिछड़े वर्ग के नेता का मुख्यमंत्री बनने बंगाल में भी संदेश जाएगा. नीतीश कुमार का राज्यसभा जाना और भाजपा का सीएम बनना एनडीए की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है. इससे केंद्र-राज्य का समन्वय मजबूत होगा. बंगाल चुनाव से पहले यह बदलाव भाजपा को पूर्वी भारत में मजबूत स्थिति देगा. विपक्षी महागठबंधन इसे भाजपा की साजिश बता रहा है, लेकिन एनडीए इसे विकास और स्थिरता का प्रतीक मान रहा है. बंगाल में 15 अप्रैल से नववर्ष की शुरुआत होती है. दूसरा कारण यह कि तब तक खरमास भी खत्म हो जाएगा. खरमास हिन्दू संस्कृति में नए काम के लिए शुभ नहीं माना जाता. इसीलिए 15 अप्रैल से पहले ही बिहार में नेतृत्व परिवर्तन का अनुमान लगाया जा रहा है.

नीतीश के इस्तीफे के बाद मुख्यमंत्री की रेस में कई नाम चर्चा में हैं. केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय भी पिछड़ा वर्ग से आते हैं. यादव समाज की 14 प्रतिशत आबादी को देखते हुए उनके नाम की चर्चा हो रही है. वे केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के विश्वासपात्र भी माने जाते हैं. उन्हें सीएम बनाया जाता है तो वे आरजेडी सुप्रीमो लालू यादव की काट साबित होंगे. बिहार में लालू को ही यादव अपना नेता मानते आए हैं. संगठन में भी नित्यानंद की मजबूत पकड़ मानी जाती है. उनके अलावा पिछड़े वर्ग से आने वाले दिलीप जायसवाल के नाम की भी चर्चा है. भाजपा ने अगर सवर्ण समाज से किसी को मुख्यमंत्री की कुर्सी सौंपने का मन बनाया तो विजय सिन्हा का नाम भी हो सकता है. वे अभी डेप्युटी सीएम हैं. पर, इन सभी नामों के अलावा डेप्युटी सीएम सम्राट चौधरी का नाम सबसे अधिक चर्चा में है.