नालंदा: बिहार पुलिस के लिए दिगंबर जैन धर्मशाला का कमरा नंबर 6AB पहेली बना हुआ है। ऐतिहासिक पर्यटन स्थल राजगीर में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब धर्मशाला के कमरे में चार सैलानियों के शव बरामद हुए। कर्नाटक के तुमकुरु जिले के रहने वाले इन मृतकों में 50 वर्षीय जीआर नागा प्रसाद, उनकी मां और दो बहनें शामिल हैं। चौंकाने वाली बात ये है कि सभी के शव फंदे से झूल रहे थे, लेकिन उनके हाथ बंधे हुए थे और मुंह पर सेलो टेप चिपका था। हालांकि, कमरा अंदर से बंद पाया गया है, जिससे ये मामला सामूहिक आत्महत्या और सोची-समझी हत्या के बीच फंसा हुआ है।
मृतकों का आपराधिक इतिहास
राजगीर पुलिस को जांच के दौरान पता चला है कि मृतक नागा प्रसाद एक इंजीनियरिंग ग्रेजुएट था, लेकिन वो बेरोजगार था। सबसे अहम सुराग ये मिला है कि वो अपने ही भांजे की हत्या के आरोप में पांच महीने जेल में रहा था। 17 दिसंबर को ही जमानत पर बाहर आया था। कर्नाटक से पहुंचे परिजनों और वहां की स्थानीय पुलिस के मुताबिक, ये परिवार आर्थिक तंगी से जूझ रहा था और मानसिक रूप से भी स्थिर नहीं था। परिवार अक्सर सामाजिक और धार्मिक आयोजनों से दूरी बनाकर रखता था। फिलहाल, नालंदा पुलिस की टीम को और अधिक जानकारी जुटाने के लिए कर्नाटक भेजा जा रहा है।
धर्मशाला प्रबंधन की लापरवाही
दिगंबर जैन धर्मशाला में दहशत का माहौल है। 65 कमरों वाली इस धर्मशाला में दर्जनों कर्मचारियों के होने के बावजूद, कमरे के भीतर तीन दिनों तक शव पड़े रहे और किसी को भनक तक नहीं लगी। स्थानीय लोग और पर्यटक प्रबंधन की इस बड़ी लापरवाही पर सवाल उठा रहे हैं। घटना के बाद से धर्मशाला में सन्नाटा पसरा है। ज्यादातर सैलानियों ने डर के मारे कमरे खाली कर दिया है और नए बुकिंग पर रोक लग गई है।
हत्या या सामूहिक आत्महत्या
धर्मशाला में मिले शवों की स्थिति ऐसी है कि हाथ बंधे हुए थे और मुंह पर टेप लगा था। सीधे तौर पर हत्या की ओर इशारा करती दिख रही है। लेकिन कमरे का अंदर से बंद होना आत्महत्या की थ्योरी को भी बल दे रहा है। एक आशंका ये जताई जा रही है कि नागा प्रसाद ने पहले तीनों महिलाओं को मारकर फंदे से लटकाया और फिर खुद जान दे दी। पुलिस ने कमरे को सील कर दिया है और विशेषज्ञों की देखरेख में पटना में पोस्टमार्टम कराया गया। सांसद कौशलेन्द्र कुमार ने भी मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और निष्पक्ष जांच का भरोसा दिया है।