बिहार में कैसे-कैसे IAS; रिश्वत के पैसे से एक ने किया यूरोप ट्रिप तो दूसरे ने गिफ्ट में लिया आईफोन

पटना: बिहार के सरकारी ठेकों में करप्शन मामले में फिलहाल दो आईएएस अधिकारियों पर गाज गिरी है। आईएएस अभिलाषा कुमारी शर्मा और योगेश कुमार सागर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। वर्तमान में 2014 बैच की आईएएस अभिलाषा जीविका की अपर मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी सह मनरेगा आयुक्त थीं। जबकि, 2017 बैच के आईएएस योगेश कुमार सागर समाज कल्याण विभाग के अपर निदेशक सह निःशक्तता निदेशक थे। योगेश और अभिलाषा को विशेष निगरानी इकाई (एसवीयू) से प्राप्त ईडी की उस रिपोर्ट पर निलंबित किया गया है, जिसमें इनके खिलाफ रिश्वत, कमीशन और अनुचित लाभ लेने का आरोप है।

अकूत संपत्ति बनाने के मामल में आरोपी ठेकेदार रिशु श्री से आईएएस अभिलाषा कुमारी शर्मा और योगेश कुमार सागर के संबंध उजागर हुए थे। एसवीयू ने रिशुश्री को गुरुवार को गिरफ्तार किया था। इस मामले में अब तक संजीव हंस सहित तीन आइएएस पर कारवाई हा चुका है। जबकि, एक दर्जन से अधिक आईएएस, बिहार प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों और वरिष्ठ इंजीनियरों पर जांच की तलवार लटकी हुई है।

भवन निर्माण विभाग, नगर विकास एवं आवास विभाग, बुडको, बीएमएसआईसीएल (बिहार मेडिकल सर्विसेज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरपोरेशन लिमिटेड), बिहार राज्य पुल निर्माण निगम सहित अन्य विभागों के तैनात रहे तत्कालीन आईएएस, बिहार प्रशासनिक सेवा के अधिकारी और इंजीनियर निशाने पर हैं।

रिशुश्री के खर्च पर योगेश ने की थी सपरिवार यूरोप की यात्रा
एसवीयू ने ईडी की जांच रिपोर्ट के हवाले से बताया है कि रिशुश्री ने योगेश कुमार सागर और उनके आठ रिश्तेदारों को यूरोप की यात्रा कराई थी। 22 जून 2024 से 30 जून 2024 तक की यात्रा में योगेश और उनके परिवार के आठ लोग ऑस्ट्रिया के विएना, सॉल्जवर्ग और वॉल्फगैंग शहर घूमे। आलीशान होटलों में ठहरे। हवाई यात्रा और विदेशी होटलों में रुकने पर करीब 21.92 लाख रुपये खर्च हुए। यह ट्रिप रिशु श्री ने मैनेज किया था। उस वक्त योगेश बुडको में तैनात थे। योगेश कुमार उत्तर प्रदेश के बरेली के मूल निवासी हैं। उन्होंने लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस की डिग्री ले रखी है।

अभिलाषा ने घर की छत पर कराया था बागवानी-सौंदर्यीकरण
सीतामढ़ी में डीएम और वित्त विभाग में संयुक्त सचिव सहित कई महत्वपूर्ण परदों पर रह चुकी अभिलाषा शर्मा पर रिशुश्री के खर्च पर अपने घर की छत पर बागवानी और सौदर्यीकरण कराने का आरोप है। रिपोर्ट के मुताबिक इस बागवानी पर हुए करीब नौ लाख रुपये का खर्च रिशु श्री ने ही उठाया था। रिशु श्री से आईफोन सहित महंगे गिफ्ट लेने और परिवार के सदस्यों को सैर कराने का भी आरोप है। अभिलाषा बिहार के नवादा जिले की रहने वाली हैं।

ठेकों में करप्शन पर अबतक आधा दर्जन रसूखदार नपे
सरकारी ठेकों में भ्रष्टाचार करने वाले कई चेहरे जांच एजेंसियों ने सामने लाए हैं। इनमें चर्चित ठेकेदार रिशु श्री से जुड़े कई चेहरों की पहचान हो चुकी है, जबकि कई अधिकारी-कर्मी जांच एजेंसी की रडार पर हैं। ईडी की रिपोर्ट के आधार पर एसवीयू ने अब तक आईएएस संजीव हंस, मुख्य अभियंता तारिणी दास, संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारी मुमुक्षु चौधरी, बीएमएसआईसीएल के डीजीएम (प्रोजेक्ट) पंकज कुमार के विरुद्ध कार्रवाई की है। पूछताछ के बाद जांच का दायरा और बढ़ेगा।

संजीव हंस (आईएएस): जल संसाधन, ऊर्जा सहित अन्य विभागों में सचिव रहते रिशु श्री की कंपनी को कमीशन लेकर फायदा पहुंचाने का आरोप है। उन पर ईडी, एसवीयू और सीबीआई ने मनी लांड्रिंग व भ्रष्टाचार की तीन अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज कर रखी है, जिनमें जांच चल रही है। जेल से छूटने के बाद फिलहाल निलंबन मुक्त होकर राजस्व पर्षद में अपर सचिव पद पर तैनात हैं।

मुमुक्षु चौधरी(बिहार प्रशासनिक सेवा के संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारी: ईडी ने 27 मार्च 2025 को उनके आवास पर भी छापेमारी की थी। इनके आवास से करीब दो करोड़ रुपये नकद बरामद हुए थे। मुमुक्षु चौधरी पर सीतामढ़ी और सहरसा में नगर आयुक्त रहते कमीशन लेकर रिशु की कंपनियों को भ्रष्ट तरीके से ठेके देने का आरोप है। वर्तमान में वित्त विभाग में संयुक्त सचिव पद पर तैनात हैं। एसवीयू ने उनके विरुद्ध कांड दर्ज किया है, जिसमें जांच चल रही है।

तारिणी दास (भवन निर्माण विभाग के तत्कालीन मुख्य अभियंता: 27 मार्च 2025 को ईडी की छापेमारी में उनके आवास से 8.50 करोड़ नकद बरामद हुए थे। बाद में उनको बर्खास्त कर दिया गया। तारिणी 31 अक्टूबर 2024 को भवन निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता (उत्तर) पद से सेवानिवृत हुए थे। हालांकि, विभाग ने 9 नवंबर 2024 को उन्हें इसी पद पर दो साल के लिए पुनः संविदा नियोजित कर लिया था।

उमेश कुमार सिंह(नगर विकास एवं आवास विभाग के कार्यपालक अभियंता): ईडी की रिपोर्ट पर एसवीयू ने 9 अप्रैल 2026 को इन पर सरकारी पद का दुरुपयोग कर आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने की प्राथमिकी दर्ज की है। आरोप है कि उमेश सिंह के द्वारा रिशुश्री कंपनी मेसर्स रिलायबल सहित अन्य ठेकेदारों से उनके बिल भुगतान के एवज में रिश्वत प्राप्त की जाती थी। उमेश सिंह के आवास एक करोड़ रुपया नकद जब्त किया गया था।
पंकज कुमार (डीजीएम प्रोजेक्ट, बीएमएसआईसीएल): एसवीयू ने 12 मार्च 2026 को इनके 5 तीन ठिकानों पर छापेमारी की थी। 32 लाख रुपये नकद सहित 1.31 करोड़ रुपये के आभूषण बरामद हुए थे। इस छापेमारी को भी रिशुश्री कनेक्शन से जोड़ कर देखा जा रहा है।