बिहार में डॉक्टरों की तैनाती को लेकर खत्म हुई अनिश्चितता; स्वास्थ्य विभाग ने जारी किए नियम

पटना। बिहार के स्वास्थ्य विभाग ने बॉन्ड सेवा से जुड़े डॉक्टरों की पदस्थापना और योगदान को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसका उद्देश्य विभागीय व्यवस्था को सुव्यवस्थित करना और बॉन्ड सेवा की अवधि पूर्ण होने के बाद चिकित्सकों की स्थिति को लेकर व्याप्त भ्रम को दूर करना है। जारी निर्देशों के अनुसार, बिहार स्वास्थ्य सेवा संवर्ग के वे डॉक्टर, जिन्हें क्षेत्रीय चिकित्सीय संस्थानों में स्वीकृत एवं रिक्त पदों के विरुद्ध बॉन्ड सेवा के तहत पदस्थापित किया गया है, वे बॉन्ड अवधि पूरी होने के बाद भी उसी पद पर नियमित रूप से कार्य करते रहेंगे। वहीं, जो चिकित्सक बिहार स्वास्थ्य सेवा संवर्ग के नहीं हैं और फ्लोटिंग पदों पर केवल अनिवार्य बॉन्ड अवधि पूरी करने के उद्देश्य से पदस्थापित किए गए हैं, उन्हें अवधि समाप्त होते ही पद से मुक्त कर दिया जाएगा।

टेन्‍योर समाप्‍त‍ि बाद व‍िभाग में योगदान
इसके अलावा, बिहार स्वास्थ्य सेवा संवर्ग के सामान्य एवं विशेषज्ञ चिकित्सा पदाधिकारी, जो बॉन्ड अवधि के दौरान राजकीय चिकित्सा महाविद्यालयों एवं अस्पतालों में सीनियर रेजिडेंट या ट्यूटर के टेन्योर पद पर कार्यरत हैं, उन्हें टेन्योर अवधि समाप्त होने के बाद स्वास्थ्य विभाग (मुख्यालय) में योगदान कर पदस्थापन की प्रतीक्षा करनी होगी।

इसी प्रकार, बॉन्ड से आच्छादित वे डॉक्टर, जिन्हें उच्चतर अध्ययन अथवा अन्य विशिष्ट चिकित्सा संस्थानों में सीनियर रेजिडेंट या ट्यूटर के रूप में कार्य करने हेतु विभागीय अनापत्ति प्रमाण-पत्र प्रदान किया गया है, उन्हें अध्ययन या टेन्योर अवधि पूरी होने के बाद स्वास्थ्य विभाग (मुख्यालय) में योगदान करना अनिवार्य होगा।

स्वास्थ्य सेवा संवर्ग से बाहर के ऐसे चिकित्सक, जो बॉन्ड से बंधे हैं और उच्चतर अध्ययन के लिए उपर्युक्त संस्थानों में गए हैं, उन्हें भी अध्ययन उपरांत शेष बॉन्ड अवधि पूरी करने के लिए मुख्यालय में योगदान करना होगा। विभाग का कहना है कि इन निर्देशों से चिकित्सकों की तैनाती प्रक्रिया में पारदर्शिता और स्पष्टता आएगी।