गयाजी : केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने बुधवार को गया में गोदावरी स्थित अपने आवास पर बिहार की शराबबंदी नीति को लेकर तीखा बयान दिया। उन्होंने कहा कि शराबबंदी का निर्णय सिद्धांत रूप में सही है, लेकिन इसका क्रियान्वयन पूरी तरह गड़बड़ हो चुका है, जिससे गरीब वर्ग सबसे अधिक प्रभावित हो रहा है।
‘तस्करी करने वालों को पैसे लेकर छोड़ दिया जाता है’
मांझी ने आगे कहा कि तीसरी समीक्षा के दौरान स्पष्ट प्रावधान किया गया था कि मामूली मात्रा में शराब पीने या 250 से 500 ग्राम तक शराब ले जाने वालों को गिरफ्तार नहीं किया जाएगा। इसके बावजूद छोटे और गरीब लोगों को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि जो लोग मामूली मात्रा में शराब लेकर जा रहे हैं, उन्हें पकड़ा जा रहा है, जबकि हजारों-लाखों लीटर की तस्करी करने वालों को पैसे लेकर छोड़ दिया जाता है।
बाहर से आ रही महंगी शराब
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि शराबबंदी के वर्तमान हालात बिहार को भारी आर्थिक नुकसान पहुंचा रहे हैं। जब शराबबंदी प्रभावी नहीं है, होम डिलीवरी हो रही है और बाहर से महंगी शराब आ रही है, तो राज्य का पैसा दूसरे राज्यों में चला जा रहा है। इस पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है।
गरीब लोग विषैली शराब के शिकार
विषैली शराब के बढ़ते मामलों पर चिंता जताते हुए मांझी ने कहा कि इसका सबसे बड़ा शिकार गरीब और दलित समाज के लोग हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि दो घंटे में नौशादर, यूरिया और ऑक्सीटॉसिन मिलाकर जहरीली शराब बनाई जाती है। बड़े लोग महंगी शराब पी लेते हैं, जबकि गरीब लोग इसी विषैली शराब के कारण अपनी जान गंवा देते हैं।
एससी समाज के लोग परेशान
मांझी ने दावा किया कि एससी समाज के लाखों लोग शराबबंदी कानून से जुड़े मामलों में फंसे हुए हैं। कोई जमानत पर है, कोई फरार। करीब साढ़े चार लाख लोग इस कानून के कारण प्रभावित हैं। मांझी ने मांग की कि छोटे मामलों में फंसे गरीब लोगों को राहत दी जाए और असली शराब तस्करों पर कड़ी कार्रवाई हो। उन्होंने कहा, ‘तभी शराबबंदी का उद्देश्य पूरा हो सकेगा।’