कौन हैं वो 4 विधायक, जिन्होंने बढ़ा दी तेजस्वी की टेंशन, बिहार में राज्यसभा चुनाव के बीच हो गया खेला?

पटना: बिहार में राज्यसभा चुनाव के बीच गहमागहमी तेज हो चुकी है. राज्यसभा चुनाव के लिए बिहार विधानसभा परिसर में सुबह 9 बजे से शुरू हुई वोटिंग के बाद अब तक करीब-करीब सारे विधायकों ने मतदान कर दिया है. लेकिन, कांग्रेस के 3 और आरजेडी के एक विधायक ने महागठबंधन और तेजस्वी यादव की टेंशन बढ़ा दी है. दरअसल महागठबंधन के चार विधायक अब तक मतदान के लिए विधानसभा नहीं पहुंचे.

ऐसे में राज्यसभा चुनाव के बीच इन विधायकों की गैरमौजूदगी ने महागठबंधन की टेंशन बढ़ा दी और राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं. जिन चार विधायकों को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा है, उनमें मनिहारी के विधायक मनोहर प्रसाद, फारबिसगंज के विधायक मनोज विश्वास, वाल्मीकिनगर के विधायक सुरेंद्र प्रसाद कुशवाहा और ढाका के विधायक फैसल रहमान शामिल हैं.

मनोहर प्रसाद: सबसे पहले बात मनिहारी से विधायक मनोहर प्रसाद की. वे कांग्रेस के नेता हैं और कटिहार जिले की मनिहारी सीट से विधायक चुने गए हैं. क्षेत्र में उनकी पहचान एक जमीनी नेता के रूप में मानी जाती है. राज्यसभा चुनाव के दौरान उनके विधानसभा नहीं पहुंचने से कांग्रेस खेमे में चिंता बढ़ गई.

मनोज विश्वास: फारबिसगंज से विधायक मनोज विश्वास भी कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे थे. सीमांचल क्षेत्र की इस सीट पर युवा चेहरे के रूप में उनका मजबूत जनाधार माना जाता है. मतदान के दौरान उनसे संपर्क नहीं हो पाने की खबर सामने आने के बाद सियासी हलकों में कई तरह की अटकलें लगने लगीं.

सुरेन्द्र कुशवाहा: तीसरे विधायक सुरेंद्र प्रसाद कुशवाहा वाल्मीकिनगर से कांग्रेस के विधायक हैं। उत्तर बिहार की राजनीति में उनका प्रभाव माना जाता है। राज्यसभा चुनाव के दौरान उनके मतदान के लिए देर से पहुंचने या संपर्क नहीं हो पाने की खबर ने महागठबंधन की चिंता और बढ़ा दी।

फैसल रहमान: महागठबंधन चौथे विधायक ढाका से आने वाले फैसल रहमान हैं, जो आरजेडी के टिकट पर विधायक बने. पूर्वी चंपारण की ढाका सीट से उनका मजबूत राजनीतिक आधार माना जाता है. राज्यसभा चुनाव में उनके देर से विधानसभा पहुंचने की खबर ने राजनीतिक हलचल को और तेज कर दिया. खासकर मुस्लिम चेहरे के तौर पर फैसल रहमान का चुनाव में अब तक शामिल नहीं होना तेजस्वी के लिए बड़ी टेंशन की बात है.

राज्यसभा चुनाव के बीच इन चार विधायकों की गैरमौजूदगी ने महागठबंधन के भीतर बेचैनी बढ़ा दी. हालांकि बाद में कई विधायकों के मतदान करने की खबरें भी सामने आती रहीं, लेकिन शुरुआती घंटों में इन चार नामों को लेकर राजनीतिक गलियारों में “खेला” की चर्चा खूब होती रही.