पटना. बिहार की राजनीति में प्रशांत किशोर उर्फ पीके के खुलासों ने हलचल मचा रखी है. इसी क्रम में सोमवार को भी पीके ने खुलासों का नया अध्याय खोलते हुए डिप्टी सीएम सम्राट चौथरी, मंत्री अशोक चौधरी को फिर अपने निशाने पर लिया. इसके साथ ही उन्होंने तेजस्वी यादव और राजद पर भी जोरदार प्रहार किया. अब जब सियासी दुश्मनी तल्ख होती जा रही है तो सवाल उनपर भी उठने लगे हैं. ऐसे में अक्सर विपक्षी दल उनसे यह सवाल पूछते रहे हैं कि आखिर उनके पास इतना पैसा कहां से आता है, जिससे वे चुनावी कैंपेन और अपनी पार्टी की गतिविधियां चलाते हैं.करोड़ों रुपये खर्च करने के आरोपों पर इस बार पीके ने खुद ही खुलासा कर दिया कि उनके पास पैसा किस स्रोत से आता है और कैसे वह इसे खर्च करते हैं.
विपक्ष के सवालों का जवाब
प्रशांत किशोर ने पहली बार साफ-साफ बताया कि चुनाव और अपनी पार्टी के कामकाज के लिए पैसा कहां से आता है. पीके ने स्पष्ट तौर पर कहा कि उन्होंने परामर्श सेवाओं से कमाया पैसा ही जनता और बिहार के विकास के लिए लगाया है.उन्होंने कहा कि पिछले तीन साल में उन्होंने 241 करोड़ रुपये फीस के रूप में कमाए और 30 करोड़ जीएसटी तथा 20 करोड़ आयकर भी चुकाया. इतना ही नहीं उन्होंने 98 करोड़ रुपये अपनी पार्टी को डोनेट करने का दावा किया. पीके का कहना है कि वह चोरी नहीं करते, केवल एडवाइजरी फीस यानी परामर्श शुल्क से आय अर्जित करते हैं और जो भी कमाते हैं और उसे बिहार के विकास में लगाना चाहते हैं.
परामर्श से कमाई का दावा
प्रशांत किशोर ने कहा कि उन्होंने पिछले तीन साल में केवल सलाहकार सेवाओं से ही आय अर्जित की है. उन्होंने खुलासा किया कि 2021-22 में और उसके बाद जिन लोगों ने उनसे राजनीतिक या व्यावसायिक परामर्श लिया उनसे फीस के तौर पर 241 करोड़ रुपये मिले. पीके ने यह भी बताया कि इस दौरान उन्होंने 30 करोड़ रुपये जीएसटी और 20 करोड़ रुपये आयकर चुकाया. इसके साथ ही उन्होंने 98 करोड़ रुपये अपनी पार्टी को दान करने का दावा किया. उनका कहना है कि वह चोरी या गलत तरीके से पैसा नहीं कमाते, बल्कि जो भी आय होती है वही बिहार के विकास में खर्च करते हैं.
बिहार की जनता के लिए समर्पण
प्रशांत किशोर ने कहा कि उन्हें बिहार की जनता पैसा दे या न दे, लेकिन वह अपनी कमाई को जनता के लिए खर्च करेंगे. उन्होंने यह भी कहा कि वह नेता नहीं हैं, बल्कि बिहार को सुधारने और नई दिशा देने के लिए राजनीति में सक्रिय हैं. प्रशांत किशोर ने राजनीति में पारदर्शिता पर जोर देने की बात कहते हुए केंद्र सरकार को चुनौती दी कि अगर किसी को संदेह है तो वह उनके सभी लेन-देन की जांच करा सकती है. उन्होंने कहा कि उन्हें मरना मंजूर है लेकिन चोरी करने वालों के साथ खड़ा होना कभी मंजूर नहीं.