नई दिल्ली: सोने की कीमत लगातार नए रेकॉर्ड बना रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने का भाव 4,500 डॉलर प्रति औंस के पार चला गया है। यह अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है। इस वजह से भारत के घरों में रखे सोने का कुल मूल्य 5 ट्रिलियन डॉलर के पार पहुंच गया है। यह रकम भारत के पूरे सकल घरेलू उत्पाद (GDP) से भी ज्यादा है।
मॉर्गन स्टेनली की एक रिपोर्ट के अनुसार, पिछले साल अक्टूबर में भारतीय घरों में लगभग 34,600 टन सोना था। पिछले हफ्ते सोने के रिकॉर्ड 4,550 डॉलर प्रति औंस के भाव पर यह कुल मिलाकर 5 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा की दौलत बन जाती है। वहीं, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के मुताबिक भारत की जीडीपी करीब 4.1 ट्रिलियन डॉलर है।
क्या है एक्सपर्ट की राय?
इकोनॉमिक टाइम्स के अनुसार इन्फोमेट्रिक्स वैल्यूएशन एंड रेटिंग्स के मुख्य अर्थशास्त्री डॉ. मनोरंजन शर्मा ने बताया कि यह एक चौंकाने वाला आंकड़ा है जिस पर हमें गहराई से सोचना चाहिए, न कि सिर्फ तुलना करनी चाहिए। उन्होंने आगे कहा, जीडीपी एक प्रवाह (flow variable) है और सोने का भंडार एक स्टॉक (stock) है। फिर भी यह अंतर भारतीय अर्थव्यवस्था में सोने के असाधारण सांस्कृतिक, वित्तीय और मनोवैज्ञानिक महत्व को उजागर करता है।
गहनों की मात्रा ज्यादा
एमके ग्लोबल (Emkay Global) फर्म ने पिछले 15 सालों में सोने की तीन बड़ी रैलियों का विश्लेषण किया और पाया कि इनसे उपभोग (consumption) पर कोई खास असर नहीं पड़ा। एमके ग्लोबल के अनुसार लोग सोने को उपभोग और लंबी अवधि की बचत दोनों मानते हैं और सोने के भंडार का 75 से 80% हिस्सा गहनों के रूप में है।
भारत दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता
भारत सोने का दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता है, जो वैश्विक मांग का लगभग 26% हिस्सा है। चीन 28% के साथ पहले स्थान पर है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के अनुसार जून 2025 तक, पिछले पांच सालों के औसत 23% से बढ़कर भारत की हिस्सेदारी 26% हो गई है। हालांकि गहनों की मांग सबसे ज्यादा है, लेकिन पिछले पांच सालों में सिक्कों और बिस्कुट के रूप में सोने में खुदरा निवेश का हिस्सा बढ़ा है। जून 2020 में यह 23.9% था, जो जून 2025 तक बढ़कर 32% हो गया।
रिजर्व बैंक ने भी की जमकर खरीदारी
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) भी सोने की इस दौड़ में शामिल हो गया है। मॉर्गन स्टेनली के अनुसार, केंद्रीय बैंक ने साल 2024 से अब तक लगभग 75 टन सोना खरीदा है, जिससे कुल भंडार 880 टन हो गया है। यह भारत के कुल विदेशी मुद्रा भंडार का लगभग 14% है।