हरियाणा में आवारा कुत्तों का आतंक, 58 लोग को काट खाया, लोगों में दहशत

मेवात. हरियाणा के नूंह जिले के तावडू क्षेत्र में आवारा और कथित पागल कुत्तों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है. हालात इतने भयावह हो गए हैं कि पिछले तीन दिनों में ही 58 लोग कुत्तों के काटने का शिकार हो चुके हैं. इस बढ़ती घटना से नगरवासियों में दहशत और आक्रोश का माहौल है. लोग प्रशासन से जल्द से जल्द ठोस कार्रवाई की मांग कर रहे हैं.

दरअसल, तावडू नगर के साथ – साथ बाईपास क्षेत्र की बुराका – ग्वारका कॉलोनी में आवारा कुत्तों का आतंक सबसे अधिक देखा जा रहा है. स्थानीय लोगों के अनुसार, बीते दो दिनों में ही इस कॉलोनी में करीब 15 छोटे-बड़े लोग कुत्तों के हमले में घायल हुए हैं. लोग बच्चों को बाहर भेजने से डर रहे हैं. बुराका कॉलोनी निवासी वसीम, साहुल अली और मोहम्मद ने बताया कि मंगलवार सुबह एक आवारा पागल कुत्ते ने 16 वर्षीय युवक गुलफान पर हमला कर दिया. कुत्ते ने युवक के चेहरे पर गंभीर रूप से काट लिया. घायल को पहले तावडू के सरकारी अस्पताल ले जाया गया, जहां से उसे नल्हड़ मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया.

स्थानीय लोगों ने बताया कि पिछले एक सप्ताह में कॉलोनी में करीब 15 लोग कुत्तों का शिकार बन चुके हैं. इनमें गुलफान पुत्र साहुन (16), मिस्बाबुल पुत्र अब्बास (22) गंभीर रूप से घायल हैं. इसके अलावा फरदीन और अयान, दोनों भाई भी आवारा कुत्तों के हमले में गंभीर रूप से चोटिल हुए हैं. परेशान क्षेत्रवासी जल्द ही ग्राम पंचायत और अन्य सामाजिक लोगों के सहयोग से तावडू उपमंडल अधिकारी को ज्ञापन सौंपेंगे और आवारा कुत्तों पर शिकंजा कसने की मांग करेंगे.तावडू सरकारी अस्पताल के एसएमओ डॉ. निहाल सिंह सोलंकी ने बताया कि बीते तीन दिनों में 58 लोग डॉग बाइट के शिकार होकर अस्पताल पहुंचे हैं. यह सिर्फ दर्ज आंकड़ा हैं. वास्तविक संख्या इससे अधिक हो सकती है. प्रतिदिन 10 – 12 ऐसे मामले सामने आ रहे हैं. खास बात यह है कि अधिकतर मामले तावडू नगर क्षेत्र से ही जुड़े हुए हैं.

गौरतलब है कि तावडू में आवारा कुत्तों की नसबंदी और जनसंख्या नियंत्रण के लिए नगर पालिका प्रशासन ने एक निजी कंपनी को ठेका दिया है. इसके तहत प्रति कुत्ता करीब 1430 रुपये खर्च किए जा रहे हैं, जिसमें से लगभग 500 कुत्तों की नसबंदी की जानी है. हालांकि प्रक्रिया चालू होने के बावजूद आवारा कुत्तों के आतंक पर अब तक कोई प्रभावी नियंत्रण नजर नहीं आ रहा है. आवारा कुत्तों पर लगाम कसने को लेकर प्रशासन की ओर से अभी तक कोई स्पष्ट रणनीति या आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है. ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर आम जनता की सुरक्षा को लेकर प्रशासन कब गंभीर कदम उठाएगा.