Tariff Vs GST: अमेरिका ने भारत पर 50 फीसदी टैरिफ लगाकर बड़ा झटका दिया है. अमेरिकी राष्ट्रपति ने रशियन तेल को बहाना बनाकर भारत पर टैरिफ का बम फोड़ दिया. जाहिर है कि इससे भारत के कारोबार, उसके निर्यात, उद्योग, नौकरी सब पर असर पड़ेगा. माना जा रहा है कि ट्रंप के टैरिफ से भारत के जीडीपी ग्रोथ पर 0.4 से 0.6 फीसदी तक की गिरावट देखने को मिल सकती है.
ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) की माने तो 50 फीसदी टैरिफ लगने से भारत का 5.4 लाख करोड़ रुपये का निर्यात प्रभावित होगा. टैरिफ के कारण अप्रैल 2027 तक भारत से अमेरिका को एक्सपोर्ट गिरकर 4.3 लाख करोड़ तक पहुंच सकता है. ट्रंप भारत को जो नुकसान पहुंचाना चाहते हैं या दवाब बढ़ाकर ट्रेड डील अपनी शर्तों पर करना चाहते हैं. अब तो उन्होंने रूस-यूक्रेन युद्ध में भी भारत का नाम घसीट दिया है. ट्रंप के टैरिफ पर जवाब टैरिफ की मांग उठ रही है. व्यापारी चाहते हैं कि भारत भी अमेरिका से आने वाले सामानों पर टैरिफ बढ़ाए, लेकिन भारत ने अपना प्लान तैयार कर लिया है. भारत जैसे को तैसा जवाब देने के बजाए टैरिफ के वार को घर में खत्म करने की प्लानिंग पर काम कर रहा है.
ट्रंप के टैरिफ का जवाब देगी मोदी की GST
अमेरिकी निर्यात पर टैरिफ बढ़ने से अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी. बिना अमेरिका को कुछ जवाब दिए भारत ने घरेलू स्तर पर ही इससे निपटने का प्लान तैयार कर लिया है. भारत उन देशों में से हैं, जो आपदा में अवसर की तलाश कर लेता है. जीएसटी रिफॉर्म उसी का नतीजा है. 15 अगस्त को लाल किले से जब पीएम मोदी ने जीएसटी दरों में कटौती की बात कही तो स्पष्ट हो गया कि भारत मांग को बढ़ाकर टैरिफ से होने वाले नुकसान को कम करने का रास्ता चुन लिया है. पढ़ें- दांव पर ₹7.5 लाख करोड़, 10 लाख नौकरियों पर मंडराया संकट…ट्रंप के धोखे की मार सबसे ज्यादा इन सेक्टर्स पर, आज से अमेरिका वसूलेगा 50% लगान
मोदी का GST कैसे सहेगा अमेरिकी टैरिफ का वार
सरकार ने जीएसटी स्लैब में कटौती की तैयारी कर दी है. जीएसटी के 4 स्लैब को घटाकर सिर्फ 2 रखे जाएंगे. 5%, 12%, 18%, 28% को घटाकर दो स्लैब 5% और 18% रखा जाएगा. जीएसटी की दरों में कटौती करने से चीजें सस्ती हो जाएंगी. कीमतें कम होने से मांग बढ़ेगी, लोगों की खरीदारी बढ़ेगी. जीएसटी में कटौती से भारतीय उत्पाद सस्ते होंगे. अगर घरेलू मांग बढ़ता है तो कंपनियों की निर्यात पर निर्भरता पर कम होगी. ऐसे में टैरिफ का असर होने की संभावना कम हो जाएगी.
जीएसटी से घरेलू मांग में तेजी
मौजूदा समय में भारत दुनिया का सबसे तेजी से बढ़ता उपभोक्ता बाजार है. SBI रिसर्च रिपोर्ट की माने तो GST स्लैब में बदलाव होने से 1.98 लाख करोड़ रुपये का घरेलू खपत बढ़ेगा, यानी देश में ही लगभग 24 अरब डॉलर की खपत बढ़ेगी, हालांकि जीएसटी रिफॉर्म से राजस्व को 85,000 करोड़ रुपये का नुकसान भी होगा. इस जीएसटी सुधार से GDP में 0.6% की वृद्धि होने का अनुमान है. जीएसटी की वजह से मांग में आई 1.98 लाख करोड़ रुपये की तेजी अमेरिकी टैरिफ की वजह से होने वाले नुकसान जो कि करीब 10-15 अरब डॉलर के है उसे पूरा कर देगी.
टैरिफ से घरेलू मांग में तेजी
अमेरिकी टैरिफ बढ़ने से निर्यात कम होगा, ऐसे में कंपनियां घर में सामान को खपाने की कोशिश करेगी. यानी भारत में चीजें सस्ती हो जाएगी. इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका जाने वाला ज्यादातर सामानों को कंपनियां घरेलू बाजार में बेचने की कोशिश करेगी. जिसकी वजह से सामान की कीमतों में गिरावट आएगी. यानी कुल मिलाकर लोगों को सस्ता सामान मिलेगा तो उनकी खरीदारी की क्षमता बढ़ेगी और कंपनियों को निर्यात पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा.
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