आरबीआई ने घटाया रेपो रेट, आज इस सरकारी बैंक ने अपने ग्राहकों को पहुंचा दिया डायरेक्ट बेनिफिट

नई दिल्ली. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने कल (5 दिसंबर) रेपो रेट घटाया और आज (6 दिसंबर) पब्लिक सेक्टर के बैंक ऑफ बड़ौदा (Bank of Baroda) ने बिना देर किए ग्राहकों तक इसका सीधा फायदा पहुंचा दिया. जैसे ही रेपो 5.25 फीसदी हुआ, बैंक ने भी अपनी लेंडिंग रेट कम कर दी यानी ग्राहकों को कम EMI देना होगा.

बैंक ने कहा कि बड़ौदा रेपो बेस्ड लेंडिंग रेट (BRLLR) को 8.15 फीसदी से घटाकर 7.90 फीसदी कर दिया गया है. ये नई दरें 6 दिसंबर 2025 से लागू हो गई हैं. यह कदम RBI द्वारा रेपो रेट को 5.50 फीसदी से घटाकर 5.25 फीसदी किए जाने के बाद उठाया गया है. बैंक का मार्कअप 2.65% पहले जैसा ही रहेगा. रेपो रेट कटने का सबसे सीधा फायदा होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन लेने वाले ग्राहकों को मिलेगा, क्योंकि EMI कम हो सकती है.

FY26 में 7.3 फीसदी रह सकता है जीडीपी ग्रोथ रेट
बैंक ऑफ बड़ौदा का यह फैसला ऐसे समय आया है जब आरबीआई ने अपनी एमपीसी मीटिंग में चालू वित्त वर्ष 2025-26 की जीडीपी ग्रोथ फोरकास्ट बढ़ाकर 7.3% कर दी है. पहले यह अनुमान 6.8 फीसदी का था. अक्टूबर-दिसंबर 2025 तिमाही में ग्रोथ रेट 7 फीसदी और जनवरी-मार्च 2026 तिमाही में 6.5 फीसदी रहने की बात कही गई है. वहीं अप्रैल-जून 2026 तिमाही में ग्रोथ रेट 6.7 फीसदी और जुलाई-सितंबर 2026 के दौरान 6.8 फीसदी रहने का अनुमान जताया गया है.

मल्होत्रा ने कहा कि महत्वपूर्ण आंकड़े चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में आर्थिक गतिविधियों में तेजी के संकेत दे रहे हैं. कृषि में बेहतर संभावनाएं, जीएसटी को तर्कसंगत बनाने के कदम, कंपनियों के बेहतर बही-खाते जैसे फैक्टर आर्थिक गतिविधियों को सपोर्ट देते रहेंगे.

फरवरी 2025 से अब तक 1.25 फीसदी घटी रेपो दर
आरबीआई ने फरवरी 2025 से अब तक रेपो रेट में 4 किस्तों में कुल 1.25 फीसदी की कटौती की है. हालांकि अगस्त और अक्टूबर की मीटिंग में रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं हुआ था. इसे 5.5 फीसदी पर ही जस का तस छोड़ा गया था.

रेपो रेट क्या होता है?
रेपो रेट वह ब्याज दर है जिस पर बैंक RBI से पैसा उधार लेते हैं. जब बैंकों को कैश की कमी होती है, तो वे सरकारी बॉन्ड गिरवी रखकर RBI से कर्ज लेते हैं. उस कर्ज पर RBI जो ब्याज वसूलता है, वही रेपो रेट कहलाता है. अगर RBI रेपो रेट बढ़ा देता है, तो बैंक के लिए उधार लेना महंगा हो जाता है. अगर RBI इसे घटा देता है, तो बैंकों को सस्ता कर्ज मिलता है.