कांकेर: छत्तीसगढ़ का कांकेर जिला, जो घने जंगलों और पहाड़ियों से घिरा हुआ है, लंबे समय से नक्सलवाद की समस्या से जूझ रहा है. यह इलाका नक्सलियों का एक प्रमुख गढ़ रहा है, जहां हिंसा और आतंक का माहौल बना रहता था. लेकिन अब सुरक्षा बलों की सतत कोशिशों से यहां शांति की बहार आ रही है. हाल ही में कांकेर के कटेजरी जंगल में एक बड़ी कार्रवाई हुई, जिसमें सुरक्षाबलों ने नक्सलियों का 3 साल पुराना स्मारक ध्वस्त कर दिया. यह घटना न केवल नक्सलवाद के खिलाफ एक मजबूत संदेश है, बल्कि शांति और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है.
कटेजरी जंगल, जो महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले से सटा हुआ है, नक्सलियों की गतिविधियों का केंद्र रहा है. यहां के जंगलों में नक्सली अपने मृत साथियों की याद में स्मारक बनाते हैं, जो उनकी विचारधारा को फैलाने का माध्यम बनते हैं. यह स्मारक करीब 3 साल पहले बनाया गया था. नक्सली इसे अपनी शहादत का प्रतीक मानते थे और स्थानीय आदिवासियों को भड़काने के लिए इस्तेमाल करते थे. लेकिन अब, जब देश नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ फेंकने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, तो ऐसे प्रतीकों को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता.
इस कार्रवाई को अंजाम दिया गढ़चिरौली के C-60 कमांडो ने. C-60 महाराष्ट्र पुलिस का विशेष नक्सल विरोधी दस्ता है, जो घने जंगलों में अभियान चलाने के लिए प्रशिक्षित है. ये जवान नक्सलियों के खिलाफ कठिन परिस्थितियों में काम करते हैं. खुफिया सूचना के आधार पर C-60 की टीम ने कटेजरी जंगल में सर्च ऑपरेशन शुरू किया. जंगल की घनी झाड़ियों और ऊबड़-खाबड़ रास्तों के बावजूद, जवानों ने स्मारक तक पहुंच बनाई. वहां पहुंचते ही उन्होंने स्मारक को पूरी तरह तोड़ दिया. स्मारक के अवशेषों को साफ कर दिया गया, ताकि नक्सली विचारधारा का कोई निशान न बचे.
स्मारक ध्वस्त करने के बाद जवानों ने एक अनोखा कदम उठाया. उसी जगह पर उन्होंने पौधे रोपे. हरे-भरे पौधों को लगाते हुए उन्होंने शांति और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया. यह सिर्फ एक कार्रवाई नहीं, बल्कि एक प्रतीकात्मक संदेश था. जहां कभी हिंसा की यादें ताजा होती थीं, वहां अब जीवन और हरियाली का प्रतीक खड़ा हो गया. पौधों को लगाते समय जवानों ने कहा कि यह जंगल हम सबका है. नक्सलवाद ने यहां विकास को रोक दिया था, लेकिन अब हम शांति और प्रकृति के साथ आगे बढ़ेंगे.
स्थानीय आदिवासी समुदाय ने भी इस कदम की सराहना की. वे लंबे समय से नक्सलियों के डर से परेशान थे. अब उन्हें लगता है कि इलाका सुरक्षित हो रहा है.
यह घटना छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र की संयुक्त कार्रवाई का नतीजा है. हाल के वर्षों में C-60 ने कई सफल अभियान चलाए हैं. गढ़चिरौली में ही कई नक्सलियों को गिरफ्तार किया गया है और उनके ठिकानों को नष्ट किया गया है. केंद्र सरकार की ‘नक्सल मुक्त भारत’ अभियान के तहत ये प्रयास तेज हो गए हैं. कांकेर जैसे इलाकों में विकास कार्य तेजी से चल रहे हैं. स्कूल, अस्पताल और सड़कें बन रही हैं, जिससे आदिवासियों का जीवन सुधर रहा है.
नक्सलवाद ने इन जंगलों को हिंसा का अड्डा बना दिया था. 1980 के दशक से यह समस्या बढ़ी, जब नक्सली गरीबी और अन्याय के नाम पर लोगों को भड़काने लगे. लेकिन उनकी हिंसा ने हजारों निर्दोषों की जान ली. अब सुरक्षा बलों की मेहनत से स्थिति बदल रही है. C-60 जैसे दस्तों ने साबित कर दिया है कि दृढ़ इच्छाशक्ति से किसी भी चुनौती का सामना किया जा सकता है.
इस कार्रवाई से न केवल नक्सलियों का मनोबल टूटेगा, बल्कि स्थानीय लोगों में विश्वास बढ़ेगा. पौधा रोपण का संदेश स्पष्ट है – हिंसा की जगह हरियाली और शांति को अपनाएं. कांकेर अब शांति की ओर बढ़ रहा है. उम्मीद है कि जल्द ही यह पूरा क्षेत्र नक्सल मुक्त हो जाएगा, और यहां के लोग समृद्धि की नई सुबह का स्वागत करेंगे. यह घटना सभी के लिए प्रेरणा है कि एकता और सकारात्मक कदमों से समाज को मजबूत बनाया जा सकता है.