नई दिल्ली। भारतमाला परियोजना से संबंधित मुआवजा घोटाले का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच में अब तक घोटाले की राशि 100 करोड़ रुपये से अधिक पहुंच चुकी है, जबकि प्रारंभिक अनुमान 35 से 40 करोड़ रुपये का था। जांच का दायरा प्रदेश के 11 से अधिक जिलों तक फैल चुका है।
जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि जमीन अधिग्रहण की गोपनीय जानकारी पहले ही कारोबारियों और दलालों को उपलब्ध कराई गई थी। इसके बाद सस्ते दामों पर जमीन खरीदकर राजस्व अधिकारियों की मिलीभगत से दस्तावेजों में हेरफेर कर मुआवजा कई गुना बढ़ाया गया। इस मामले में जिलों के तत्कालीन कलेक्टर और राजस्व अधिकारी जांच के घेरे में हैं।
मोटा कमीशन लेने का आरोप
स्वीकृति के बदले मोटा कमीशन लेने के आरोप भी सामने आए हैं। गुरुवार को ईडी ने रायपुर, भिलाई, बिलासपुर, कोरबा समेत 17 ठिकानों पर छापेमारी की थी। बिलासपुर में सराफा कारोबारी विवेक अग्रवाल के यहां से 17 किलो सोना, तीन करोड़ के हीरे के आभूषण और नकदी मिलने की चर्चा है।
अंबिकापुर के कांग्रेसी नेता के करीबी से 50 लाख से अधिक की रकम मिलने की भी जानकारी है। ईओडब्ल्यू पहले ही इस मामले में 10 आरोपितों को गिरफ्तार कर चुकी है और चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी में है। ईडी अब मनी लान्ड्रिंग के पहलुओं की जांच कर रही है।
डिजिटल साक्ष्य से खुलेंगे कई राज
धमतरी के एक कारोबारी द्वारा किसानों के नाम पर जमीन खरीदकर करीब 100 करोड़ रुपये का मुआवजा दिलाने का मामला भी गरमाया हुआ है। संदिग्धों के मोबाइल फोन खंगाले जा रहे हैं।
इन डिजिटल साक्ष्यों से आने वाले दिनों में नौकरशाही और राजनीति के कई बड़े चेहरे बेनकाब होंगे। वहीं रायपुर, धमतरी, कांकेर, कोंडागांव, बस्तर, बिलासपुर, जांजगीर-चांपा, रायगढ़, जशपुर, सरगुजा, दुर्ग और राजनांदगांव में ईडी की जांच जारी है।