छत्तीसगढ़ के पूर्व पुलिस महानिदेशक (DGP) डीएम अवस्थी ने नक्सलवाद के खिलाफ चल रही मुहिम को लेकर केंद्र की बीजेपी सरकार की तारीफ की है. उन्होंने कहा कि सरकार की ठोस रणनीति और लगातार प्रयासों की वजह से नक्सल प्रभावित कई इलाके अब धीरे-धीरे सामान्य हालात की ओर लौट रहे हैं.
रविवार (29 मार्च) को न्यूज एजेंसी ANI से बातचीत में अवस्थी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के उस लक्ष्य का भी जिक्र किया, जिसमें 31 मार्च तक नक्सलवाद को खत्म करने की समय सीमा तय की गई है. उन्होंने इसे सरकार की ‘मजबूत इच्छाशक्ति’ का प्रतीक बताया.
अवस्थी के मुताबिक, इस तरह का स्पष्ट लक्ष्य न सिर्फ नीति स्तर पर सख्ती दिखाता है, बल्कि जमीनी स्तर पर काम कर रहे सुरक्षा बलों का मनोबल भी बढ़ाता है. उन्होंने कहा कि जब नेतृत्व स्पष्ट और प्रतिबद्ध होता है, तो उसका असर सीधे ऑपरेशन्स पर दिखाई देता है और सुरक्षा बलों को अपने मिशन में तेजी लाने की प्रेरणा मिलती है. पूर्व डीजीपी ने बातचीत के दौरान मौजूदा हालात पर संतोष जताते हुए कहा कि तय समय सीमा ने सुरक्षा बलों के भीतर नई ऊर्जा भरी और उन्हें स्पष्ट लक्ष्य दिया. साथ ही, यह गृह मंत्री की मजबूत इच्छाशक्ति का भी प्रमाण है.
धीरे-धीरे अंत की ओर बढ़ रहा है नक्सलवाद
पूर्व डीजीपी ने कहा कि इन प्रयासों का असर अब जमीन पर दिखने लगा है नक्सलवाद धीरे-धीरे अपने अंत की ओर बढ़ रहा है और बस्तर समेत अन्य प्रभावित इलाके सामान्य जीवन की तरफ लौट रहे हैं. उन्होंने 1900 के दशक के बस्तर को याद करते हुए उसकी समृद्ध संस्कृति, सादगी भरे जीवन और शांत माहौल का जिक्र किया. उनके मुताबिक, उस दौर का बस्तर अपनी प्राकृतिक खूबसूरती और सांस्कृतिक विरासत के लिए जाना जाता था. पूर्व डीजीपी ने उम्मीद जताई कि सरकार की मौजूदा पहल और लगातार प्रयासों के चलते यह क्षेत्र एक बार फिर उसी रौनक को हासिल करेगा, जहां हर तरफ खुशहाली होगी और बस्तर ‘फूलों और रोशनी’ से फिर खिल उठेगा.
कभी खूबसूरती का प्रतीक होता था बस्तर
कभी बस्तर सिर्फ नक्शे का एक इलाका नहीं, बल्कि सुकून और खूबसूरती का प्रतीक हुआ करता था. पूर्व डीजीपी उन दिनों को याद करते हुए भावुक हो उठते हैं. वह बताते हैं कि फरवरी 1989 में जब उन्होंने बस्तर को करीब से देखा, तो यह इलाका अपनी प्राकृतिक सुंदरता और शांत माहौल के लिए जाना जाता था. बीजापुर और दंतेवाड़ा जैसे क्षेत्रों में लोग बेखौफ होकर रहते थे, साप्ताहिक बाजारों में रौनक रहती थी और गोलापल्ली से जगदलपुर तक सरकारी बसें नियमित रूप से चलती थीं. खुद उन्होंने इन बसों में सफर किया था. उस दौर में बस्तर की पहचान उसकी खुली सड़कों, जीवंत गांवों और हरियाली से भरी घाटियों से थी. लेकिन वक्त के साथ हालात बदलते गए.
बीजेपी सरकार की तारीफ की
उन्होंने बीजेपी सरकार के सत्ता में आने से पहले के दौर को याद करते हुए कहा कि उस समय हालात काफी चिंताजनक थे. स्थिति ऐसी बन गई थी कि नक्सलवाद के राजधानी तक पहुंचने का खतरा बना रहता था और लोगों में असुरक्षा की भावना थी. उन्होंने बताया कि पिछले दस वर्षों में सरकार ने सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने पर खास ध्यान दिया है. सुरक्षा बलों की क्षमता और संसाधनों में इजाफा किया गया, जिसके चलते हालात में धीरे-धीरे सुधार आया. उन्होंने इसका श्रेय राज्य में नक्सलवाद के प्रभाव के कम होने को दिया.
नक्सलवाद को लेकर लड़ी लंबी लड़ाई
पूर्व डीजीपी अवस्थी ने नक्सलवाद के खिलाफ लंबी लड़ाई को याद करते हुए कहा कि एक दौर ऐसा भी था जब हालात बेहद चिंताजनक हो गए थे. उस समय एमसीसी और सीपीआई के एकजुट होकर सीपीआई-माओवादी बनने के बाद नक्सल गतिविधियां तेजी से बढ़ी थीं और लोगों को लगने लगा था कि सुरक्षा बल शायद कभी इस चुनौती पर पूरी तरह काबू नहीं पा सकेंगे. हालांकि, उन्होंने कहा कि बीते दस वर्षों में तस्वीर पूरी तरह बदल गई है. सुरक्षा बलों ने लगातार नक्सलवाद को कमजोर किया. इस दौरान जवानों ने भारी बलिदान दिए और नुकसान भी उठाया, जिसकी भरपाई संभव नहीं. लेकिन उनके त्याग का ही परिणाम है कि आज नक्सलवाद और आतंकवाद के खात्मे की दिशा में देश तेजी से आगे बढ़ रहा है.
धीरे-धीरे खत्म हो रहा है नक्सल हमलों का डर
उन्होंने आगे बताया कि कभी नक्सलियों ने IED धमाकों, विस्फोटों और घात लगाकर किए गए हमलों से जिन इलाकों में डर और दहशत का माहौल बना दिया था, वह अब धीरे-धीरे खत्म हो रहा है. हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि नक्सलवाद की विचारधारा पूरी तरह खत्म नहीं हुई है. उन्होंने कहा कि इस विचारधारा की जड़ में दबे-कुचले और वंचित लोगों को न्याय दिलाने की सोच रही है और न्याय के लिए लड़ाई आगे भी जारी रहनी चाहिए. लेकिन अब यह संघर्ष भारतीय संविधान के दायरे में रहकर, शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीकों से लड़ा जाना चाहिए. उन्होंने साफ तौर पर कहा कि बंदूक के दम पर चलने वाला रास्ता देश और समाज के लिए एक बड़ा खतरा था, जो अब खत्म होने की ओर है.