Raipur News: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने छत्तीसगढ़ शराब घोटाले की जांच में तेजी दिखाते हुए पूर्व आबकारी आयुक्त निरंजन दास (IAS) और 30 अन्य आबकारी अधिकारियों की कुल 38.21 करोड़ की संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क कर लिया है. ईडी के मुताबिक शराब घोटाले से छत्तीसगढ़ के खजाने को करीब 2,800 करोड़ रुपए का बड़ा नुकसान हुआ है. दावा किया कि ये आंकड़ा जांच में सामने आए नए तथ्यों और मनी ट्रेल के आधार पर तय किया गया है.
ईडी के अनुसार, कुर्क की गई संपत्तियों में 78 अचल संपत्तियां शामिल हैं, जिनमें आलीशान बंगले, प्रीमियम आवासीय कॉम्प्लेक्स में फ्लैट, व्यावसायिक दुकानें और विशाल कृषि भूमि शुमार हैं. इसके अलावा, 197 चल संपत्तियां जैसे वाहन, मशीनरी और अन्य मूल्यवान सामान भी जब्त किए गए हैं. निरंजन दास पर व्यक्तिगत रूप से 18 करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार का आरोप है. निरंजन दास को दिसंबर 2025 में गिरफ्तार किया गया था और डिजिटल रिकॉर्ड्स से उनके बैंक खातों में संदिग्ध लेन-देन की पुष्टि हुई.
समानांतर प्रणाली चल रही थी
घोटाले की जड़ें 2019-2022 के बीच की हैं, जब कांग्रेस शासन में आबकारी विभाग ने एक समानांतर प्रणाली चला रखी थी. ईडी का दावा है कि निजी डिस्टिलरी मालिकों, नौकरशाहों और राजनेताओं के गठजोड़ ने शराब के उत्पादन, वितरण और बिक्री में हेराफेरी की, जिससे राज्य को भारी राजस्व हानि हुई. पहले चरण में ईडी ने 100 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियां कुर्क की थीं, जिसमें तीन प्रमुख डिस्टिलरी की 68 करोड़ की संपत्तियां शामिल हैं.
ईडी ने ‘एक्स’ पर दी ये जानकारी
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अपने आधिकारिक ‘एक्स’ हैंडल पर जानकारी देते हुए बताया कि रायपुर में 26 दिसंबर 2025 को पीएमएलए, 2002 के तहत छत्तीसगढ़ शराब घोटाले की जांच में एक और पूरक अभियोग शिकायत दायर की गई है. शिकायत में 2019 से 2023 के बीच राज्य के आबकारी विभाग में हुए बड़े भ्रष्टाचार कांड का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया गया है. ईडी के अनुसार, इस अवैध तंत्र के माध्यम से लगभग 2,883 करोड़ रुपये की अपराध की आय (प्रोसीड्स ऑफ क्राइम) उत्पन्न की गई. मामले की आगे जांच जारी है.