करनाल में करंट लगने से 20 भैंस और एक कटड़ी की मौत, सरपंच पर गोचरान भूमि में अवैध खनन का आरोप

करनाल: मेरठ रोड स्थित नगला फार्म पुल के नीचे शनिवार को ऐसा दर्दनाक मंजर देखने को मिला, जिसने हर किसी को झकझोर दिया. करंट की चपेट में आने से 20 भैंसों और एक कटड़ी की मौके पर ही मौत हो गई. मृत पशुओं के शव सड़क किनारे पड़े थे और अपने पशुओं को खो चुके चरवाहों की आंखों में बेबसी साफ दिखाई दे रही थी. घटना की सूचना मिलते ही आसपास के लोग बड़ी संख्या में मौके पर पहुंच गए और पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया.

पंजाब से आए थे पशुपालक: जानकारी के अनुसार पंजाब के गुरदासपुर निवासी मोहम्मद रियाज और बाबू पिछले करीब दो वर्षों से करनाल में रहकर पशुपालन का कार्य कर रहे हैं. शनिवार को वे अपने झुंड को लेकर नगला फार्म पुल के नीचे पहुंचे ही थे कि अचानक करंट फैल गया. देखते ही देखते एक-एक कर सभी भैंसें जमीन पर गिरने लगीं. चरवाहों ने किसी तरह खुद को तो बचा लिया, लेकिन अपनी पूरी आजीविका को अपनी आंखों के सामने खत्म होते हुए देखने के अलावा उनके पास कोई विकल्प नहीं था.

‘आधे घंटे तक तड़पती रहीं भैंसें’, पशुपालकों का फूटा दर्द: भैंस मालिक मोहम्मद रियाज और बाबू ने आरोप लगाया कि बिजली विभाग की लापरवाही के कारण ये हादसा हुआ. उनका कहना है कि बिजली का खंभा और तार पहले से क्षतिग्रस्त थे. करीब आधे घंटे तक भैंसें करंट की चपेट में तड़पती रहीं, लेकिन समय पर बिजली आपूर्ति बंद नहीं कराई गई. एक-एक भैंस की कीमत लगभग दो लाख रुपये है और इस हादसे में करीब 45 लाख रुपये का नुकसान हुआ है. उन्होंने प्रशासन से उचित मुआवजे की मांग करते हुए कहा कि पशुपालन ही उनके परिवार की रोजी-रोटी का एकमात्र सहारा था.

अवैध खनन को लेकर पूर्व सरपंच ने लगाए गंभीर आरोप: घटना के बाद नगला फार्म के पूर्व सरपंच कृष्णलाल ने मौजूदा सरपंच पर गोचरान की सरकारी भूमि पर अवैध खनन करवाने और खनन करने वालों को संरक्षण देने के गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि इसी अवैध खनन के कारण वहां करंट फैलने जैसी स्थिति बनी. कृष्णलाल का दावा है कि इस संबंध में पहले भी बीडीपीओ कार्यालय में लिखित शिकायत दी गई थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई. उन्होंने कहा कि मृत 21 पशुओं की कीमत कम से कम 21 लाख रुपये है और प्रशासन को पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए.

पुलिस ने शुरू की जांच, बिजली विभाग से भी मांगी रिपोर्ट: घटना की सूचना मिलने पर डायल-112 की टीम मौके पर पहुंची और पूरे घटनास्थल का जायजा लिया. पुलिसकर्मी सुरेंद्र ने बताया कि प्रथम दृष्टया मौके पर बिजली की एक तार टूटी हुई दिखाई दी है, जो हादसे का संभावित कारण हो सकती है. उन्होंने कहा कि बिजली विभाग को भी मौके पर बुलाया गया है और जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि आखिर करंट फैलने की असली वजह क्या थी. पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए कार्रवाई की जा रही है.

अब सबसे बड़ा सवाल ये कि जिम्मेदार कौन? यह हादसा केवल 21 बेजुबान पशुओं की मौत भर नहीं है, बल्कि उन परिवारों की आजीविका पर भी बड़ा प्रहार है, जिनकी पूरी जिंदगी इन पशुओं पर निर्भर थी. अब जांच से यह साफ होना बाकी है कि हादसे की वजह बिजली विभाग की लापरवाही थी, टूटी हुई बिजली लाइन थी या फिर गोचरान भूमि पर कथित अवैध खनन. फिलहाल पीड़ित परिवार प्रशासन से न्याय, दोषियों पर कार्रवाई और आर्थिक मुआवजे की मांग कर रहे हैं.