हरियाणा में आयुष्मान कार्ड धारकों के लिए बुरी खबर! 20 अप्रैल के बाद अस्पतालों में नहीं होगा मुफ्त इलाज?

Haryana News: हरियाणा में आयुष्मान भारत योजना को लेकर बड़ा संकट खड़ा होता नजर आ रहा है. इंडियन मेडिकल एसोसिएशन हरियाणा ने आयुष्मान भारत स्वास्थ्य संरक्षण प्राधिकरण के CEO को पत्र लिखकर गंभीर चेतावनी दी है. डॉक्टरों और निजी अस्पतालों ने साफ कर दिया है कि अगर उनकी मांगों का जल्द समाधान नहीं हुआ, तो वे योजना से सामूहिक रूप से बाहर हो सकते हैं. इससे प्रदेश में लाखों मरीजों की मुफ्त इलाज सुविधा प्रभावित हो सकती है.

डॉक्टरों और निजी अस्पतालों ने दी चेतावनी
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन हरियाणा द्वारा भेजे गए इस पत्र में कई अहम मुद्दे उठाए गए हैं. सबसे बड़ी समस्या भुगतान में भारी देरी को लेकर है. अस्पतालों का कहना है कि नियमों के अनुसार 15 दिनों के अंदर भुगतान होना चाहिए, लेकिन सितंबर 2025 से अब तक करोड़ों रुपये के क्लेम लंबित हैं. कई बार विभाग की ओर से उठाई गई आपत्तियों का जवाब देने के बाद भी भुगतान जारी नहीं किया जा रहा, जिससे अस्पतालों पर आर्थिक दबाव लगातार बढ़ रहा है.

इसके अलावा, IMA ने कमेटियों में प्रतिनिधित्व की कमी पर भी सवाल उठाए हैं. जनवरी 2025 में मुख्यमंत्री के निर्देश के बावजूद, अभी तक IMA हरियाणा के अध्यक्ष या उनके प्रतिनिधि को ‘एम्पैनलमेंट और ग्रीवेंस कमेटी’ में शामिल नहीं किया गया है. इतना ही नहीं, इन कमेटियों की बैठकें भी पिछले पांच महीनों से नहीं हुई है, जिससे नए अस्पतालों के पैनल में जुड़ने और नई स्पेशलिटी को मंजूरी मिलने की प्रक्रिया ठप पड़ी है.

पत्र में क्या लिखा है?
IMA हरियाणा ने बताया कि 7 अप्रैल को हुई बैठक में सभी सूचीबद्ध अस्पतालों ने सर्वसम्मति से अपने सरेंडर लेटर अध्यक्ष को सौंपने का निर्णय लिया है. पत्र में साफ चेतावनी दी गई है कि यदि 20 अप्रैल 2026 तक समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो अस्पतालों के लिए आयुष्मान योजना के तहत सेवाएं जारी रखना संभव नहीं होगा. हम लगातार सरकार और प्राधिकरण के साथ संवाद कर रहे हैं, लेकिन अस्पतालों को समय पर भुगतान नहीं मिल रहा है. आर्थिक दबाव के कारण अस्पतालों के लिए योजना में बने रहना मुश्किल होता जा रहा है. अगर जल्द समाधान नहीं हुआ, तो मजबूरन हमें सामूहिक रूप से सरेंडर करना पड़ेगा.

CMO यमुनानगर डॉक्टर जितेंद्र सिंह ने क्या कहा?
दूसरी तरफ CMO यमुनानगर डॉक्टर जितेंद्र सिंह का कहना है कि सरकार ने पिछले वर्ष काफी संख्या में ऑपरेशन केवल सरकारी अस्पतालों में ही होंगे ऐसे निर्देश जारी किए हुए हैं, जिस पर अमल करते हुए सरकारी अस्पतालों में ऑपरेशन किए जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि अगर निजी अस्पतालों में आयुष्मान के तहत इलाज नहीं होता तो लोग सरकारी अस्पतालों में इलाज करवा सकते हैं. हमारे पास पूरी सुविधाएं हैं, मरीजों को किसी तरह की कोई कमी नहीं आने दी जाएगी. वहीं उन्होंने कहा कि फिलहाल उनके पास कोई ऐसी शिकायत नहीं आई पर वह चाहे तो विभाग के उच्च अधिकारियों को अपनी बात पहुंचा सकते हैं जिनका समाधान किया जाएगा.

अभी 20 अप्रैल में समय है. सरकार को इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने लिखकर भेज दिया है. सरकार चाहे तो समय रहते इन समस्याओं का समाधान कर सकती है, जिससे मरीजों को आने वाली समस्याएं रुक सकती हैं. देखना होगा सरकार इस दौरान क्या कदम उठाती है.