हरियाणा में कांग्रेस को टाइट फाइट में फंसाने वाले 5 विधायकों के नाम आए सामने, क्रॉस वोटिंग पर ऐक्शन

हरियाणा के राज्यसभा चुनाव में टाइट फाइट में कांग्रेस एक वोट से जीत पाई है। उसके कैंडिडेट कर्मवीर सिंह बौद्ध 28 वोट पाकर राज्यसभा पहुंचे हैं, जबकि भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार सतीश नांदल को 27 मत मिले हैं। इस तरह भाजपा ने तीसरा कैंडिडेट उतारकर अपनी जीत तय मान रही कांग्रेस को चुनाव में हांफने पर मजबूर कर दिया। इसकी वजह थी कि उसके ही 5 विधायकों ने क्रॉस वोटिंग कर दी और 4 के वोटों को अवैध करार दिया गया। क्रॉस वोटिंग को लेकर एक नाम मोहम्मद इलियास का सामने आया था, जो मेवात के पुन्हाना सीट से विधायक हैं।

अब उनके अलावा अन्य 4 विधायकों के बारे में भी सूत्रों के हवाले से जानकारी मिली है। इन 4 विधायकों में एक और मुस्लिम सदस्य मोहम्मद इसराइल हैं, जो हथीन सीट से विधायक हैं। इसके अलावा रतिया के जरनैल सिंह, साढौरा की रेनू बाला और नारायणगढ़ की शैली चौधरी शामिल हैं। कांग्रेस ने इस मामले में सभी विधायकों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। यही नहीं इन लोगों के खिलाफ निलंबन जैसी कार्रवाई भी हो सकती है। ऐसा ओडिशा में भी कांग्रेस ने किया है, जहां उसके विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की थी। हालांकि इस बगावत के बाद भी यदि कांग्रेस का कैंडिडेट एक वोट से जीत गया तो इसके लिए भी जश्न जैसी स्थिति है।

यही नहीं इसका श्रेय पूर्व सीएम भूपिंदर सिंह हुड्डा को दिया जा रहा है। उनकी लीडरशिप में ज्यादातर विधायकों को हिमाचल में रखा गया था और वे 16 मार्च को मतदान से ठीक पहले ही विधानसभा पहुंचे थे। चुनाव अधिकारी पंकज अग्रवाल ने कहा कि संजय भाटिया को पहली प्राथमिकता के 39 वोट मिले हैं। वहीं कर्मवीर सिंह बौद्ध को 28 वोट मिले हैं और सतीश नांदल के खाते में 16 मत गए हैं। इन 16 वोटों में से भाजपा के समर्थन वाले निर्दलीय प्रत्याशी सतीश नांदल को तीन मत तो निर्दलीय विधायकों के मिले हैं। इसके अलावा कांग्रेस के 5 वोट भी मिले।

बता दें कि सतीश नांदल ने 2019 का विधानसभा चुनाव लड़ा था, लेकिन हार गए थे। फिलहाल वह हरियाणा भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष हैं। इस बीच चर्चा यह भी है कि आखिर कैसे भूपिंदर सिंह हुड्डा ने अपने विधायकों को पाले में रखा और हार से बचा लिया। इस प्रकरण ने उनकी छवि को मजबूत भी किया है, जिस पर 2024 का विधानसभा चुनाव हारने के बाद सवाल उठ रहे थे। तब कहा गया था कि भूपिंदर सिंह हुड्डा ने ही पूरी रणनीति तैयार की थी और कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा तो वही जिम्मेदार हैं। हालांकि लंबी खींचतान के बाद हुड्डा ही नेता विपक्ष बनने में सफल रहे।