पंचकूला। हरियाणा में इस साल भले ही बिजली टैरिफ में बढ़ोतरी नहीं की गई है, लेकिन बिजली वितरण निगम दूसरे तरीके से उपभोक्ताओं को झटका देने की तैयारी में हैं। उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम और दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम ने ईंधन और बिजली खरीद समायोजन अधिभार (एफपीपीएएस) के नाम पर उपभोक्ताओं से 47 पैसे प्रति यूनिट वसूलने के लिए हरियाणा राज्य विद्युत विनियामक आयोग (एचईआरसी) से अनुमति मांगी है।
आयोग ने इस प्रस्ताव पर एक मई तक उपभोक्ताओं और हितधारकों से आपत्तियां और सुझाव मांगे हैं, जिसके बाद 14 मई को शुल्क जारी रखने की अनुमति देने या नहीं देने पर निर्णय लिया जाएगा।
हरियाणा में वर्ष 2022-23 से फ्यूल सरचार्ज एडजस्टमेंट (एफएसए) के नाम पर बिजली निगम उपभोक्ताओं से अतिरिक्त शुल्क लेते आ रहे हैं। 200 यूनिट से अधिक बिजली खपत वाले उपभोक्ताओं से 47 पैसे प्रति यूनिट एफएसए लिया जाता है, जबकि इससे कम खपत वाले उपभोक्ताओं की यह राशि प्रदेश सरकार चुकाती है।
अब इस शुल्क को नया नाम एफपीपीएएस देते हुए बिजली निगमों ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए भी यह राशि वसूलने की अनुमति मांगी है। बिजली टैरिफ में बढ़ोतरी के प्रस्ताव को ठुकरा चुका विद्युत विनियामक आयोग हालांकि एफपीपीएएस को लेकर बिजली निगमों के पक्ष में फैसला सुना सकता है।
प्रदेश में 83.79 लाख उपभोक्ता हैं, जिनमें करीब 7.15 लाख किसान हैं। एफपीपीएएस अगर बढ़ता भी है तो किसानों को पहले की तरह अपने ट्यूबवेल कनेक्शन के लिए मात्र 10 पैसे प्रति यूनिट की दर से ही बिल का भुगतान करना होगा। राज्य सरकार को बिजली निगमों को प्रति यूनिट आपूर्ति लागत के आधार पर सब्सिडी देनी होती है।
पहले बिजली आपूर्ति पर प्रति यूनिट खर्च 7.35 रुपये आता था, जो अब बढ़कर 7.48 रुपये प्रति यूनिट हो गया है। इस वृद्धि के कारण राज्य सरकार को नए वित्त वर्ष में 1089 करोड़ की अतिरिक्त सब्सिडी का प्रविधान करना होगा। वर्ष 2025-26 में यह सब्सिडी 6782 करोड़ थी।
किसानों को 7,870 करोड़ रुपये की सब्सिडी
नए वित्त वर्ष के लिए किसानों के ट्यूबवेलों हेतु 10 हजार 687 मिलियन यूनिट बिजली निर्धारित की गई है, जबकि पिछले वर्ष यह 9,304 मिलियन यूनिट थी। 7.48 प्रति यूनिट की दर से किसानों की बिजली पर कुल 7,994 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। 10 पैसे प्रति यूनिट की दर से किसानों से लगभग 123 करोड़ का राजस्व प्राप्त होगा। इस राजस्व को कुल लागत से घटाने के बाद राज्य सरकार को बिजली निगमों को किसानों के नाम पर 7,870 करोड़ रुपये की सब्सिडी देनी होगी।
इसलिए वसूला जाता अधिभार
दरअसल कोयला व अन्य ईंधन की लागत बढ़ने पर बिजली उत्पादन की लागत लगातार बढ़ रही है। साथ में डिस्काम को कम समय के लिए महंगी बिजली खरीदनी पड़ती है। बिजली उत्पादन कंपनियों को ईंधन की कीमतों में अस्थिरता के कारण वित्तीय नुकसान न हो, इसलिए बिजली नियामक आयोग ओर से अधिभार लगाने की मंजूरी दी जाती है। इस स्थिति में उपभोक्ताओं को अतिरिक्त भुगतान करना पड़ता है।