हरियाणा में महिला सुरक्षा को लेकर पुलिस की रणनीति अब सिर्फ दावों तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसके ठोस और सकारात्मक नतीजे जमीन पर दिखाई देने लगे हैं। वर्ष 2025 में प्रदेश में महिलाओं के विरुद्ध अपराधों में 16.26 प्रतिशत की उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। यह गिरावट न केवल कानून व्यवस्था की मजबूती को दर्शाती है, बल्कि महिलाओं में बढ़ते सुरक्षा विश्वास का भी प्रमाण मानी जा रही है।
हरियाणा के पुलिस महानिदेशक अजय सिंघल ने मंगलवार को यहां कहा कि महिला सुरक्षा को लेकर पुलिस का दृष्टिकोण पूरी तरह स्पष्ट और परिणामोन्मुखी है। उन्होंने बताया कि 2025 में हासिल हुई सफलता योजनाबद्ध पुलिसिंग, तकनीकी संसाधनों के बेहतर उपयोग और फील्ड स्तर पर सक्रिय कार्रवाई का नतीजा है। डीजीपी ने कहा कि वर्ष 2026 में पुलिस का फोकस और अधिक सुदृढ़ होगा, जिसमें अपराध रोकथाम के साथ-साथ महिलाओं में निर्भीकता, भरोसा और आत्मसम्मान की भावना को मजबूत करना प्राथमिकता रहेगी।
डीजीपी अजय सिंघल ने स्पष्ट किया कि महिला सुरक्षा केवल पुलिस की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें समाज की सहभागिता उतनी ही जरूरी है। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि छेड़छाड़, हिंसा या किसी भी महिला विरुद्ध अपराध की जानकारी तुरंत पुलिस को दें और पीड़ित महिला का मनोबल बढ़ाएं। आने वाले वर्ष में हरियाणा पुलिस महिला सुरक्षा को लेकर और अधिक तकनीक-सक्षम, संवेदनशील और जवाबदेह बनेगी। सार्वजनिक स्थलों पर निगरानी बढ़ेगी, प्रतिक्रिया समय घटेगा और जागरूकता अभियानों को और विस्तार दिया जाएगा।
दुष्कर्म मामलों में 25 प्रतिशत गिरावट
सीसीटीएनएस के आंकड़ों के अनुसार, महिलाओं के खिलाफ गंभीर अपराधों में भी तेज कमी दर्ज की गई है। दुष्कर्म के मामलों में लगभग 25 प्रतिशत, दुष्कर्म के प्रयास में 33, छेड़छाड़ के मामलों में करीब 16, पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज मामलों में 10, अपहरण और किडनैपिंग में 17 तथा दहेज मृत्यु जैसे जघन्य अपराधों में 11 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट आई है। इसके साथ ही महिला अपराधों की वर्कआउट दर लगभग 98 प्रतिशत रही, जिससे यह स्पष्ट होता है कि अपराधियों के खिलाफ समयबद्ध और सख्त कार्रवाई की गई।
हॉटस्पॉट आधारित रणनीति ने बदला माहौल
महिला सुरक्षा को लेकर हरियाणा पुलिस ने 2025 में हॉटस्पॉट आधारित विशेष अभियानों पर विशेष जोर दिया। छेड़छाड़ की आशंका वाले इलाकों की पहचान कर वहां सादे कपड़ों में महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई। स्कूलों, कॉलेजों, बस स्टैंडों, बाजारों और अन्य भीड़भाड़ वाले इलाकों में पुलिस की बढ़ी मौजूदगी से मनचलों पर नकेल कसी गई और महिलाओं को सार्वजनिक स्थानों पर अधिक सुरक्षित माहौल मिला।
तकनीक और प्रशिक्षण से बढ़ी पुलिस की क्षमता
डीजीपी ने बताया कि महिला पुलिसकर्मियों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया, जिसमें पीड़ित महिलाओं से संवाद, संवेदनशील व्यवहार और त्वरित प्रतिक्रिया पर फोकस रहा। इसके साथ ही पुलिस ने ट्रिप मॉनिटरिंग सिस्टम की शुरुआत की, जिसके तहत अकेले यात्रा करने वाली महिलाएं हरियाणा 112 पर खुद को पंजीकृत करवा सकती हैं। सुरक्षित गंतव्य तक पहुंचने तक महिला की निगरानी की जाती है, जिससे परिवारों को भी मानसिक राहत मिलती है।